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जीवन में हमेशा खुश रहने का यह मंत्र आप भी याद कर लीजिए
आनंद स्वामी
Updated Wed, 27 May 2015 11:34 AM IST
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उन ऋषि का कुलशील किसी को पता नहीं था, फिर भी लोग अपनी कठिनाइयां लेकर उनके पास आते थे। एक दिन कोई जिज्ञासु उनके पास आया और कहने लगा, गुरुदेव, हमेशा खुश रहने का राज क्या है? मैं जानना चाहता हूं कि हमेशा प्रसन्न कैसे रहेंगे? ऋषि कुछ देर तक चुप रहे और फिर बोले, तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे खुश रहने का राज बताता हूं।
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ऐसा कहकर ऋषि उसे साथ लेकर जंगल की तरफ बढ़ चले। रास्ते में ऋषि ने एक बड़ा-सा पत्थर उठाया और उस व्यक्ति को देते हुए कहा, इसे पकड़ो और चलो। वह व्यक्ति पत्थर उठाकर चलने लगा। कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा, लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा।
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लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया और उस व्यक्ति से दर्द सहा नहीं गया, तो उसने ऋषि को अपनी परेशानी बताई। ऋषि ने कहा, पत्थर को नीचे रख दो। पत्थर नीचे रखते ही उस व्यक्ति को बड़ी राहत महसूस हुई।
तभी ऋषि ने कहा, यही है खुश रहने का राज। उस व्यक्ति ने कहा, गुरुवर, मैं समझा नहीं। ऋषि ने उसे समझाते हुए कहा, जिस तरह इस पत्थर को कुछ पल तक हाथ में रखने पर थोड़ा-सा दर्द, एक घंटे तक रखने पर थोड़ा ज्यादा दर्द, और काफी ज्यादा समय तक उठाए रखने पर तेज दर्द होता है, उसी तरह दुखों के बोझ को हम जितने ज्यादा समय तक अपने कंधों पर उठाए रखेंगे, उतने ही ज्यादा दुखी और निराश रहेंगे।
यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को कुछ पल तक उठाए रखना चाहते हैं या जिंदगी भर। अगर खुश रहने की आकांक्षा हो, तो दुखरूपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीखना होगा। संभव हो, तो उसे उठाने से बचना ही चाहिए।