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विनाश का कारण बना अपशब्द

Mon, 01 Jul 2013 02:16 PM IST
Updated Mon, 01 Jul 2013 02:16 PM IST
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prajapati daksh and shiv story

प्रजापति दक्ष अपने दामाद शिव जी से ईर्ष्या रखते थे। एक बार उन्होंने शिव जी को नीचा दिखाने के लिए यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ में उन्होंने देवर्षियों, महर्षियों और देवताओं को आमंत्रित किया, किंतु अपनी पुत्री सती और शिव जी की उपेक्षा की। इस यज्ञ में सर्व यज्ञों में पारंगत महर्षि दधीचि को भी सादर आमंत्रित किया गया था।

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महर्षि दधीचि ने शिव को अनुपस्थित देखकर दक्ष को समझाते हुए कहा, देवाधिदेव भगवान शंकर की कृपा के बिना कोई भी यज्ञ सफल नहीं हो सकता। राग-द्वेष की कुत्सित भावना से किया गया कोई भी सत्कर्म विनाश का कारण बनता है। इसलिए अब भी समय है, हठ त्यागकर भगवान महादेव को सादर आमंत्रित करें।
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यह सुनते ही प्रजापति दक्ष शिव जी के प्रति कटु वचनों का प्रयोग करने लगे। वह उन्हें भूतों और पिशाचों का स्वामी कहने लगे। दक्ष के भय से वहां उपस्थित जनों में से किसी ने भी इसका प्रतिवाद नहीं किया, लेकिन महर्षि दधीचि निर्भीकता से बोले, शिव जी के प्रति अपशब्द सुनना मेरे लिए असहनीय है। मैं भविष्यवाणी करता हूं कि यह यज्ञ तुम्हारे कल्याण का नहीं, विनाश का कारण बनेगा। भगवान रुद्र की क्रोधाग्नि से सब कुछ ध्वस्त हो जाएगा। यह कहते-कहते महर्षि यज्ञ छोड़कर अपने आश्रम लौट आए।
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इसी यज्ञ में भगवती सती ने आत्मदाह किया और यह यज्ञ दक्ष के सकल विनाश का कारण बना।

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