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यह कर्ज भी उतार चले

Thu, 18 Apr 2013 09:38 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 18 Apr 2013 09:38 PM IST
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political leader and nation

यदि उन्हें पहले से पता होता कि उन पर राष्ट्र का कर्ज भी बाकी है, तो वह राज्य का कर्ज चुकाने में पूरे बारह साल नहीं लगाते! वह तो इसी में खुश थे कि राज्य की आखरी ईएमआई अदा हो गई और वह फ्री।

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राज्य के कर्ज में यही धांधली है कि पता नहीं चलता कि कुल कर्ज कितना है, और कितने साल में चुकाना है। पक्का अमाउंट पता चल जाए, तो माहवारी किस्त और बढ़ाई भी तो जा सकती है। गनीमत रही कि उन्हें राज्य की आखिरी और राष्ट्र की पहली किस्त की सूचना साथ-साथ मिली, वरना वह तो राज्य के खाते में ही झोंके जा रहे थे सारी कमाई!
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इसीलिए जानकारों ने कहा है कि भले आप राज्य के सर्वेसर्वा हों, दिल्ली का चक्कर मारते रहना चाहिए। वह तो इसी में लगे थे कि राज्य ही राष्ट्र है, मगर जब पिछली बार दिल्ली गए, तो मालूम पड़ा कि राज्य का कर्ज तो निपट गया है, राष्ट्र का कर्ज चुकाना है।
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बड़े नेताओं ने भी कहा कि यह हमारे बस का नहीं है। चुकाने को तो हम कब से उधार बैठे हैं, मगर मौका ही हाथ नहीं आ रहा। तुम आ जाओ, तो शायद मौका हाथ आ जाए। कब तक राज्य के मेंढक बने रहोगे, राष्ट्र के सागर में स्वागत है।

वह यह मानते रहे हैं कि उनका जन्म कर्ज उतारने के लिए हुआ है। गांव का कर्ज उतारना था, तो गांव छोड़ दिया। अब राज्य का कर्ज उतार दिया है, तो राज्य भी छोड़ने को तैयार हैं, बशर्ते राष्ट्र में कर्ज उतारने लायक माहौल मिल जाए। उनका यकीन है कि एक बार मौका हाथ लग गया, तो वह आगे-पीछे के सारे कर्ज उतार कर ही दम लेंगे।

राज्य का कर्ज उतारने के लिए उन पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा। राष्ट्र का कर्ज उतारने के लिए उन्हें धर्मनिरपेक्ष या सेक्यूलर भी होना पड़ सकता है। वह इस तरह की किसी अड़चन से नहीं डरते और कर्ज उतारने के लिए जो मुफीद हो, वैसा स्वांग रच सकते हैं।

डर की बात यही है कि राष्ट्र का कर्ज चुकाने के बाद कहीं दुनिया का कर्ज उतारने की नौबत न आ जाए। यदि ऐसा हो गया, तो बड़ी मुश्किल होगी, क्योंकि दुनिया का कर्ज उतारने के लिए उन्हें अमेरिका तो जाना ही होगा। अमेरिका ने अगर तब भी वीजा नहीं दिया, तो क्या होगा! क्या दुनिया का कर्ज उन पर बकाया ही रह जाएगा?


अमेरिका कैसा भी हो, कर्ज चुकाने की उनकी आदत का सम्मान करते हुए एक बार तो अपने देश में उन्हें आने ही देगा। तब आप देखिएगा कि कैसे दुनिया का कर्ज वह चुका रहे होंगे!

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