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बाढ़ के बीच पाकिस्तान में सियासी उफान : सरकार और सेना के मुखिया आमने-सामने, सोशल मीडिया पर मच रहा हल्ला
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सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और पीएम शाहबाज शरीफ।
- फोटो :
Agency (File Photo)
विस्तार
यदि कोई यह देखे कि पाकिस्तान में ट्विटर में क्या ट्रेंड कर रहा है, तो उसे पता चलेगा कि यहां के नागरिक दो भिन्न ग्रहों में रह रहे हैं। ट्विटर पर यह ट्रेंड कर रहा है- 'इस हाथ दे, उस हाथ ले : नवाज शरीफ की अयोग्यता को उलटने के बदले जनरल बाजवा को एक और विस्तार, ताकि वह कानूनी रूप से राजनीति में लौट सकें?' हाल ही में लंदन में जनरल बाजवा की पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) के नेता नवाज शरीफ से मुलाकात की रिपोर्ट्स आने के बाद सोशल मीडिया में लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि दोनों के बीच किस तरह का सौदा हुआ है।
दूसरी ओर आर्मी के प्रवक्ता जनरल बाबर ने पूछे जाने पर किसी तरह की मुलाकात को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। इस अपुष्ट सौदे के मुताबिक नवाज शरीफ लंदन में अपना स्व-निर्वासन खत्म कर पाकिस्तान लौटेंगे और राजनीति में सक्रिय होंगे। आम सहमति यह है कि पाकिस्तान तहरीक इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष को आगे बढ़ने और राजनीतिक परिदृश्य पर कब्जा करने से रोकने का एकमात्र तरीका नवाज शरीफ की वापसी उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों को फिर से जीवंत कर देगी और इससे इमरान खान का जनाधार खिसक जाएगा।
इसके बदले में जनरल बाजवा को एक और विस्तार मिलेगा। हालांकि पाकिस्तान में चाहे जो कुछ भी संभव हो, बाजवा के लिए एक और विस्तार मुश्किल है, क्योंकि वह अपने प्रवक्ता के जरिये सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह नवंबर में रिटायर हो जाएंगे। लेकिन पाकिस्तान में सच्चाई एकदम भिन्न है और असली खबर को न केवल सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा भी नजरंदाज किया जा रहा है और उसे महत्वहीन ढंग से प्रसारित किया जा रहा है।
पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा मूसलाधार बारिश में डूबा हुआ है, जिसमें बलूचिस्तान तथा सिंध प्रांत सर्वाधिक प्रभावित हैं। सिंधु नदी का पानी 5,00,000 क्यूसेक बढ़ गया है और अगले कुछ दिनों में इसके 7,00,000 क्यूसेक के निशान को छू लेने का अंदेशा है। मैंने हाल ही में ट्वीट किया था, 'न तो कोई भी सरकार और न ही कोई राजनीतिक दल अकेले अपने दम पर देश भर में आई इस आपदा से निपट सकता है। पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ही लोगों के बीच मौजूद हैं, जबकि और अधिक बारिश का अनुमान जताया जा रहा है।
मानवता को इमरान खान और उनके नेतृत्व के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी चाहिए, जो कि इस संकट के समय में गायब हैं।' कई महीनों से जारी इस आपदा में इमरान खान और उनकी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी ने अब तक एक बयान भी जारी नहीं किया कि उनके कार्यकर्ता फंड एकत्र करें और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर गरीब लोगों की मदद करें। दरअसल इमरान खान को बलूचिस्तान और सिंध की परवाह नहीं है, क्योंकि इन प्रांतों में उनकी पार्टी की सरकारें नहीं हैं।
पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन अब एक वास्तविकता है, जिसने देश को बुरी तरह प्रभावित किया है और सरकार अपनी तैयारियों में कमी को लेकर कोई भी बहाना नहीं बना सकती। जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने कहा, 'पाकिस्तान में मूसलाधार बारिश से कल तक 830 लोगों की मौत हो चुकी थी और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। देश में बारिश ने भारी तबाही मचा रखी है। हमें व्यक्तिगत राजनीति में उलझने के बजाय अभी लोगों तक मानवीय मदद पहुंचाने के बारे में ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।'
बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। अनेक गांव बाढ़ में पूरी तरह से बह गए, यहां तक कि छोटे बच्चों को भी बाढ़ अपने साथ बहा ले गई। बहुत से लोग बेघर हो गए हैं और कई तो ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों में फंसे हुए हैं, जो पूरी तरह से कट गए हैं और वहां तक राहत पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। मौत और विनाश का कहर जारी है, जो आजीविका को नष्ट कर रहा है और पूरी बस्तियों को नष्ट कर रहा है। हाल के उपचुनावों के बाद पहली बार पंजाब प्रांत की सत्ता पीटीआई के हाथों में आई है, जो कि नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग के लिए एक झटका है, दशकों से जो इसे नियंत्रित कर रही थी।
बाढ़ की आपदा जिसने पाकिस्तान को बुरी तरह प्रभावित किया है, और जिसकी वजह से शाहबाज शरीफ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार भी लगाई है, पंजाब प्रांत और केंद्र सरकार के बीच खींचतान जारी है। पूर्व राजदूत डॉ. मलीहा लोधी कहती हैं, 'पंजाब की प्रांतीय सरकार और केंद्र के बीच जारी टकराव ने राजनीतिक अव्यवस्था पैदा कर दी है। राजनीतिक लाभ लेने की उनकी कोशिशें उन्हें उलटी दिशा में ले जा रही है, और यह सब देश की आर्थिक स्थिरता को कमजोर करने की कीमत पर हो रहा है।'
फिलहाल इमरान खान अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए अदालतों के अंदर और बाहर लड़ रहे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ कई मजबूत मामले हैं, जिससे उनके राजनीतिक करियर को खतरा है। उन पर आतंक फैलाने का आरोप लगाया गया है, क्योंकि उन्होंने न्यायाधीशों और पुलिस को धमकी दी। उन पर अदालत की अवमानना के आरोप हैं। भ्रष्टाचार के आरोप हैं कि उन्होंने तोशखाना से उपहार ले लिए और उन्हें विदेशों में बेच दिया। यहां तक कि चुनाव आयोग का मानना है कि इमरान ने विदेशी फंडिंग मामले में धन की घोषणा नहीं की थी। ये आलोचनाएं भी हो रही हैं कि अदालत ने उनके खिलाफ उस तरह की कड़ी कार्रवाई नहीं की है, जैसा कि उसने अन्य राजनीतिकों के खिलाफ की हैं।
लेकिन अब बहुत गंभीर आरोपों और मामलों की सुनवाई उच्च न्यायपालिका में होने से क्या इमरान खान को सजा सुनाई जाएगी? इमरान खान ने अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी है और उनके समर्थकों को किसी भी अदालती मामले या आलोचना से फर्क नहीं पड़ रहा है। उनका वोट बैंक लगातार मजबूत हो रहा है, जिसके चलते इस हफ्ते तब लोग हैरत में पड़ गए, जब उपचुनाव में कराची की एक सीट जीत ली। विश्लेषक और टिप्पणीकार मुशर्रफ जैदी कहते हैं, 'युवाओं में इमरान खान का आकर्षण कायम है। वह मौलिक रूप से पाकिस्तान को बदलने के लिए आए थे, क्योंकि पाकिस्तानी यथास्थिति से थक चुके थे।'