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यायावर

Sun, 20 Jan 2013 03:43 PM IST
लहब आसिफ अल जुंडी
लहब आसिफ अल जुंडी Updated Sun, 20 Jan 2013 03:43 PM IST
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poetry of lahab asif al zundi

मैं इस ठंडी रात में उठ बैठा हूं

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तुम अब भी सो रहे हो
लेकिन पक्षी नहीं जानते
चुप रहना
कुछ पुकार रहा है मुझे
तुम्हारे गर्म शरीर से कुछ अधिक
कुछ अधिक नींद के स्पर्श से
थकी आंखों पर
बहुत बार बुलाया गया हूं
या वापस भेज दिया गया हूं
आंखें खोलने के लिए
अपने आवरणों के नीचे से शरीर को
हिलाने के लिए
और वार्तालाप करने के लिए
रात्रि की आत्मा के साथ
मैं प्राय: चकित होता हूं तुम कहां हो
जब मैं जागकर विचरता हूं
इस जगह में जिसे हम घर कहते हैं।

(लहब आसिफ अल जुंडी का जन्म सीरिया के दमासकस शहर में हुआ। बाद में वे टेक्सास आ गए। पहले कविता संग्रह 'ए लॉन्ग वे' (एक लंबा रास्ता) से कविता की दुनिया के जरूरी नाम हो गए। अनुवाद-किरण अग्रवाल)

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