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पड़ोस की भी सुध लीजिए
Updated Tue, 05 Mar 2013 09:38 PM IST
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केरल का कृष्णन एक लोकप्रिय कलाकार था। वह भगवान के सुंदर-सुंदर चित्र बनाता था तथा शेष समय भगवान की भक्ति तथा सेवा-परोपकार में व्यतीत करता था। उसकी पत्नी भी परम भक्त करुण हृदय महिला थी। एक दिन उसके पड़ोसी मुसलमान के मकान में आग लग गई।
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पति-पत्नी तो जैसे-तैसे मकान से बाहर निकल आए, लेकिन दो बच्चे कमरे में आग की लपटों के बीच घिरे रह गए। कृष्णन ने जैसे ही मां-बाप के रोने की आवाज सुनी, तो वह अपने घर से भागा-भागा बाहर आया तथा अपनी जान खतरे में डालकर कमरे में घुस गया। उसने दोनों बच्चे उठाए और बाहर आ गया। दोनों बच्चे बच गए, किंतु कृष्णन आग की चपेट में आ गया।
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कृष्णन द्वारा दूसरों के बच्चे को बचाते हुए जान दे देने की साहसिक घटना की सभी प्रशंसा करने लगे। कुछ दिन बाद बस्ती के लोगों ने रुपये इकट्ठे किए तथा उसकी पत्नी की सहायता के लिए उसके पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम ये रुपये तुम्हारी सहायता के लिए लाए हैं।
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महिला ने कहा, 'पड़ोस का घर जल कर राख हो जाने से पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे दिन गुजार रहा है। आप लोग इस धन से उनके मकान का छप्पर डलवा दें। मैं तो मेहनत करके अपने बच्चों का पालन-पोषण कर लूंगी।'
सभी लोग करुणा की साक्षात मूर्ति उस महिला के आगे नतमस्तक हो उठे।