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सावधान : वायु प्रदूषण की चपेट में आ चुके लोगों को कोरोना संक्रमण का गंभीर खतरा
Tue, 07 Sep 2021 05:32 AM IST
Amit Mandal
अमर उजाला रिसर्च टीम, वाशिंगटन
अमर उजाला रिसर्च टीम, वाशिंगटन
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 07 Sep 2021 05:32 AM IST
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सार
- ऐसे मरीज जब प्रदूषित हवा लेते हैं तो फेफड़ों में मौजूद जिस प्रोटीन को वायरस जकड़ता है, उसकी संख्या बढ़ जाती है
- प्रदूषित हवा से केवल कैंसर जैसी बीमारी ही नहीं बल्कि श्वांस संबंधी रोग के साथ, अस्थमा और निमोनिया जैसी बीमारियां भी जन्म ले सकती हैं
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विस्तार
कोरोना संक्रमण से पहले व्यक्ति अगर वायु प्रदूषण की चपेट में आ चुका है तो उसे संक्रमण के कारण गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण और वायु प्रदूषण के आपसी संबंधों का पता लगाया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदूषित हवा के बीच रहने वाला व्यक्ति संक्रमित होता तो उसे अस्पताल में भर्ती होने का खतरा ज्यादा है। ऐसे लोगों को संक्रमण के बाद गंभीर तकलीफ की भी संभावना अधिक रहती है।
आखिर ऐसा क्यों हो सकता है
वैज्ञानिकों के अनुसार जानवरों में परीक्षण के दौरान पाया गया है कि वे जब प्रदूषित हवा लेते हैं तो फेफड़ों में मौजूद जिस प्रोटीन को वायरस जकड़ता है, उसकी संख्या बढ़ जाती है। इसी के जरिये वायरस शरीर में तेजी से संख्या बढ़ाता है। इसी कारण संक्रमित मरीजों को फेफड़ों और हृदय संबंधी गंभीर तकलीफ होती है।
महामारी में प्रदूषित हवा घातक
लंदन के मेयर सादिक खान ने इस खुलासे के बाद कहा है कि महामारी के साथ वायु प्रदूषण से भी निपटने की रणनीति बनानी होगी। प्रदूषित हवा से केवल कैंसर जैसी बीमारी ही नहीं बल्कि श्वांस संबंधी रोग के साथ, अस्थमा और निमोनिया जैसी बीमारियां भी जन्म ले सकती हैं, जो महामारी के बीच घातक हैं।
दूषित हवा और वायरस से बचाएगा मास्क
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के प्रो. पॉल प्लांट का कहना है कि दूषित हवा फेफड़ा और हृदय रोग से ग्रसित मरीजों के लिए खतरनाक है। अब कोरोना से फेफड़ों को खतरा दोगुना हो गया है। ऐसे में बचाव का एक ही तरीका है कि हवा की गुणवत्ता को सुधारा जाए और मास्क पहना जाए।