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पाकिस्तान का झूठ बेनकाब

रवींद्र दुबे Updated Sun, 12 Aug 2018 06:55 PM IST
मुन्ना झिंगाड़ा
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पाकिस्तान के नए सदर इमरान खान कुर्सी संभालने वाले हैं। लेकिन पाकिस्तान की सेना और उसकी दुर्दांत खुफिया एजेंसी आईएसआई के आला अफसरों की नींदें हराम हो रही हैं। इसकी वजह मुल्क के नए सदर नहीं हैं। दरअसल इसकी वजह थाईलैंड की अदालत का एक फैसला है, जो पाकिस्तान द्वारा जमीन-आसमान के कुलाबे मिलाने के बावजूद हिंदुस्तान के हक में गया है। इसी आठ अगस्त को थाईलैंड की एक अदालत ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के पक्ष में फैसला सुनाया कि कुख्यात माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम के साथी  मुदस्सर हुसैन सैयद उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा वास्तव में भारतीय नागरिक है।
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इस फैसले का सीधा-सा मतलब यह है कि पाकिस्तान में शरण लिए हुए दाऊद इब्राहिम के एक साथी को भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा और उससे मिलेगा जानकारियों का खजाना, जिससे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी मुसीबत में आ सकता है। और तो और, हमेशा की तरह पाकिस्तान इससे अपना पल्ला भी नहीं झाड़ सकता, क्योंकि मुन्ना झिंगाड़ा पर उसका दावा अब एक अदालती रिकॉर्ड बन चुका है।

थाईलैंड की अदालत द्वारा सुनाए गए इस फैसले को स्वाभाविक ही भारत की राजनयिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। मजेदार बात यह है कि भारत और पाकिस्तान, दोनों ही पिछले अट्ठारह साल से मुन्ना झिंगाड़ा के प्रत्यर्पण  की लड़ाई लड़ रहे थे। दोनों का दावा था कि झिंगाड़ा उनका नागरिक है। झिंगाड़ा दाऊद इब्राहिम के धुर विरोधी छोटा राजन पर बैंकाक में गोलीबारी करने के आरोप में वर्ष 2000 से थाईलैंड की जेल में बंद था।

भारत सरकार का यह कहना था कि झिंगाड़ा ने मोहम्मद सलीम के नाम का एक फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट पेश किया था। जबकि वर्ष 2011 में पाकिस्तान ने थाईलैंड के समक्ष यह दावा पेश किया कि झिंगाड़ा पाकिस्तानी नागरिक है और उसने नकली पहचान पत्रों समेत इस आशय के फर्जी दस्तावेज पेश किए। यह पता चलते ही थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने तुरंत आपत्ति दर्ज करवा कर इस प्रत्यर्पण को रुकवाया। मुंबई पुलिस को तुरंत झिंगाड़ा की भारतीय राष्ट्रीयता के दस्तावेजी सबूत मुहैया करवाने के निर्देश जारी किए गए, ताकि उसे भारत प्रत्यर्पित करवाया जा सके। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने थाई अधिकारियों को मुंबई में झिंगाड़ा के स्कूल के रिकार्ड्स, उसके परिवार और रिश्तेदारों की जानकारी और उसके आपराधिक कारनामों का लेखा-जोखा भिजवा दिया। झिंगाड़ा के माता-पिता और रिश्तेदार आज भी मुंबई में जोगेश्वरी पूर्व की एक झोपड़पट्टी में रहते हैं। झिंगाड़ा वहीं पला बढ़ा है। पुलिस के अनुसार, झिंगाड़ा जब जोगेश्वरी के एक कॉलेज में बीए के दूसरे साल में पढ़ रहा था, तब उसने एक लड़के को चाकू मार दिया था। उसी घटना के बाद वह दाऊद इब्राहिम के साथी छोटा शकील की नजर में आया था।

भारत द्वारा झिंगाड़ा के प्रत्यर्पण को सुरक्षित करने के लिहाज से जून, 2013 में मुंबई के अंधेरी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट से पुलिस ने  झिंगाड़ा के घरवालों से डीएनए सैंपल लेने की इजाजत भी हासिल कर ली थी। मुंबई पुलिस की टीम ने इस सिलसिले में बैंकाक के काफी चक्कर भी लगाए। विदेश मंत्रालय हालांकि आश्वस्त था कि थाई अदालत का फैसला भारत के ही हक में होगा, क्योंकि सारे सबूत झिंगाड़ा को भारतीय नागरिक साबित करते थे। दूसरी ओर, पाकिस्तान शुरू से ही चिंतित था कि यदि झिंगाड़ा भारत के हाथ लग गया, तो दाऊद इब्राहिम और आईएसआई की सारी गतिविधियों की उसे जानकारी मिल जाएगी। लिहाजा पाकिस्तान ने उसे वापस ले जाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया।

बहरहाल, मुन्ना झिंगाड़ा के डीएनए सैंपल फॉरेंसिक साइंस लेबोरटरी को भेजे गए, जहां उन पर काम हुआ। उसके स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र, मुंबई में जन्मे उसके पहले बच्चे के जन्म के रिकॉर्ड और उसके मतदाता प्रमाण पत्र आदि समेत सारे दस्तावेजों के साथ एक रिपोर्ट थाईलैंड के अधिकारियों को भेजी गई। थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी भी इस काम में निरंतर लगे रहे और एक अदालत ने झिंगाड़ा के डीएनए टेस्ट का आदेश दे ही दिया। उसका डीएनए मुंबई क्राइम ब्रांच के सैंपल से मैच कर गया।

लेकिन पाकिस्तान भी कहां चुप बैठने वाला था। उसने भारत के दावे को चुनौती देते हुए झिंगाड़ा की पत्नी का घरेलू पता और उस स्कूल के रिकॉर्ड पेश किए, जहां उसके बच्चे पढ़ रहे हैं। जबकि भारत ने मुंबई के इस्माइल यूसुफ स्कूल छोड़ने का उसका प्रमाण पत्र लगाया। अलबत्ता डीएनए रिपोर्ट उसके खिलाफ सबसे पक्का सबूत साबित हुई। इसका सारा श्रेय मुंबई पुलिस और थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास को जाता है।

झिंगाड़ा के खिलाफ मुंबई में जबरिया वसूली करने और धमकी देने सहित कुल सात मामले दर्ज हैं। वर्ष 2000 में वह अपने बीवी-बच्चों के साथ मुंबई से चला गया था। सूत्रों के अनुसार, उसने पकिस्तान में शरण ली, जहां उसका दूसरा बच्चा पैदा हुआ। वर्ष 2001 में थाईलैंड की पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और छोटा राजन पर गोलीबारी में उसकी भूमिका पर उसे आठ साल की सजा हुई। बस तभी से उसके प्रत्यर्पण को लेकर भारत और पाकिस्तान में रस्साकशी चल रही थी।
 
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को तो एकबारगी लगा था कि उसके हाथ से बाजी निकल गई है, क्योंकि पिछले साल  झिंगाड़ा का परिवार जोगेश्वरी के अपने घर से गायब हो गया था। यह समझा गया कि वे सब पाकिस्तान चले गए हैं। अगर ऐसा होता, तो सारी मेहनत बेकार हो जाती। लेकिन जब यह पता चला कि वे भारत में ही हैं, तो जान में जान आई। दरअसल झिंगाड़ा के परिवार वाले मीडिया द्वारा ध्यान देने से उकता कर अन्यत्र चले गए थे।

बहरहाल देखना यह है कि झिंगाड़ा की यह ‘घर वापसी’ पाकिस्तान के लिए क्या-क्या नए गुल खिलाती है।

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