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सियासत: 'इंडिया' गठबंधन की बढ़ती मुश्किलें, प्राण प्रतिष्ठा पर फिर धारा के विपरीत

Thu, 18 Jan 2024 07:30 AM IST
अवधेश कुमार अवधेश कुमार
Updated Thu, 18 Jan 2024 07:30 AM IST
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सार
विपक्षी दलों ने श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण ठुकराकर समय की धारा को फिर न पहचानने का प्रमाण दिया है।
 
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Opposition Parties Politics on invitation to attend Ram Mandir consecration in Ayodhya
इंडिया गठबंधन के नेता। - फोटो : PTI

विस्तार

चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की घोषणा भले अभी दो महीने बाद करेगा, पर देश की पूरी राजनीति इसके इर्द-गिर्द घूम रही है। इस समय राष्ट्रीय स्तर पर दो प्रमुख समूह भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन या राजग तथा ‘इंडिया’ गठबंधन हैं। इन दो प्रमुख समूहों की स्थिति के आकलन से लोकसभा चुनाव की अस्पष्ट ही सही, लेकिन तस्वीर जरूर बन जाती है। भाजपा ने कहा है कि वह 2024 में 50 फीसदी वोट का लक्ष्य लेकर बढ़ रही है। जबकि, ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों ने श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण ठुकराकर समय की धारा को फिर न पहचानने का प्रमाण दिया है। खुद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा निमंत्रण ठुकराने पर दुख भी प्रकट कर दिया है।



वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता तथा उनके नेतृत्व में भाजपा के सत्ता में आने का मूल कारण ही हिंदुत्व प्रेरित राष्ट्रीय चेतना तथा भारत को अपनी पहचान के साथ विश्व के उच्चतम शिखर पर देखने का जनता के अंदर पैदा हुआ प्रबल भाव ही था। 2004 में सत्ता में आने पर यूपीए अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी के प्रभाव में चलने वाली मनमोहन सिंह सरकार ने स्वयं को सेक्यूलर साबित करने के लिए सच्चर आयोग से लेकर अल्पसंख्यक मंत्रालय का गठन तथा रामसेतु और राम को कल्पना का विषय न्यायालय में बताकर अपनी स्थिति धीरे-धीरे कमजोर करनी शुरू कर दी थी।


सत्ता से बाहर होने के बावजूद कांग्रेस, जिसका वास्तविक नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हाथों में दिखता है, प्रकारांतर से इस नीति को आगे बढ़ा रही है। एक ओर  देश का राममय वातावरण और दूसरी ओर राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की तुलना करें, तो दिख जाएगा कि विचार के स्तर पर बिल्कुल दो धाराएं देश में बन चुकी हैं। ‘इंडिया’ गठबंधन अब तक एक इकाई नहीं बन सका है, जिसका प्रमाण बीती 12 जनवरी को आयोजित इसकी बैठक में भी मिला, जिसमें गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल नहीं हुए। दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अंदर कोई विभाजन नहीं है।

चुनाव में नेतृत्व का चेहरा अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। नरेंद्र मोदी के समानांतर विपक्ष में कोई नेता नहीं, जिसे जनता उनके समक्ष या बड़ा मान सके। ‘इंडिया’ गठबंधन में नेतृत्व को लेकर व्यापक मतभेद हैं, क्योंकि अनेक नेताओं की महत्वाकांक्षा प्रधानमंत्री बनने की है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी तीसरी पारी में भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा 2047 तक वैश्विक महाशक्ति बनाने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। वहीं, विपक्ष मोदी, संघ और भाजपा विरोध की नीतियों तक सीमित है। विपक्षी नेताओं ने जिस तरह सनातन और हिंदुत्व से लेकर उत्तर के राज्यों को गोमूत्र की संज्ञा देने तथा उत्तर और दक्षिण के बीच विभाजन पैदा करने संबंधी बयान दिए हैं, उनसे देश के बहुमत में जो नाराजगी पैदा हुई है, उसे संतुलित करने के लिए जितने बड़े मुद्दे और जैसे चेहरे चाहिए, विपक्ष में उनका नितांत अभाव है।

विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है। कर्नाटक और तेलंगाना विधानसभा चुनाव में विजय से यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 2019 से बेहतर प्रदर्शन करेगी। 2019 में भाजपा द्वारा जीती गई 303 लोकसभा सीटों में तेलंगाना से चार मिली थी, हालांकि तेलंगाना के इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पिछली बार की तुलना में ज्यादा सीटें मिली हैं। कर्नाटक में पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 51.38 फीसदी वोट तथा 25 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस के पास मात्र एक सीट थी। भाजपा के लिए अच्छी बात यह है कि 2023 विधानसभा चुनाव में यहां उसकी सीटें घटी, वोट नहीं। हां, कांग्रेस के मतों में पांच फीसदी की बढ़ोतरी अवश्य हुई। दोनों राज्यों में मुसलमानों का मत कांग्रेस के पक्ष में ध्रुवीकृत हुआ है। मुस्लिम मत खिसकने के कारण ही कर्नाटक में जद-एस भाजपा के साथ आया है।

भाजपा तमिलनाडु पर खास ध्यान दे रही है और चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के अलावा रामनाथपुरम से भी चुनाव लड़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है और तमिलनाडु में स्थिति बदलती है, तो इसका असर पूरे दक्षिण भारत में होगा और यदि ऐसा नहीं हुआ, तब भी भाजपा जितना ध्यान दक्षिण पर दे रही है, वह बिल्कुल अप्रभावी तो साबित नहीं हो सकता।

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