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अब पाकिस्तान में #मीटू, इन कहानियों में बस किरदार अलग हैं

Sat, 26 Oct 2019 10:43 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Sat, 26 Oct 2019 10:43 AM IST
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Now #MeToo in Pakistan
मरिआना बाबर, पाकिस्तानी पत्रकार - फोटो : a

मीडिया में सेक्स स्कैंडल कोई नई चीज नहीं है और दुनिया की अनेक राजधानियों से ऐसी कहानियां सुनी जा सकती हैं। पाकिस्तान में कुछ हलकों में भारतीय मीडिया को दिए गए अपने योगदान के कारण तरुण तेजपाल जाना पहचाना नाम थे, लेकिन जब उन पर गोवा में अपनी एक युवा सहयोगी के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा और एक भारतीय अदालत ने उन पर मुकदमा चलाने का फैसला किया, तो उनके पाकिस्तानी समर्थक स्तब्ध रह गए। जमी नाम से लोकप्रिय पाकिस्तानी पुरस्कार विजेता फिल्मकार जमशेद महमूद ने इसी हफ्ते ट्विटर पर खुलासा किया कि उनके साथ 13 वर्ष पहले दुष्कर्म किया गया था। पाकिस्तान में दुष्कर्म का शिकार कम ही महिलाएं मीडिया के सामने आकर इसका खुलासा करती हैं, लेकिन यह तो और भी हैरत की बात है कि एक पुरुष ने यह स्वीकारोक्ति की है।


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पाकिस्तान जैसे रूढ़वादी देश में समलैंगिक अधिकार भी धीरे-धीरे ही सही सार्वजनिक रूप से जगह बना रहे हैं, जबकि इस्लाम समलैंगिकता का निषेध करता है। हाल ही में काला कौआ के छद्म नाम वाले एक व्यक्ति को उस वक्त भारी विरोध का सामना करना पड़ा जब उसने ट्विटर पर खुद के समलैंगिक होने की घोषणा की। हालांकि कुछ उदार लोग उसके पक्ष में आगे भी आए। काला कौआ ने ट्वीट किया, 'मैं एक समलैंगिक हूं।

पश्चिम के बरसों के सुरक्षित रोजगार को छोड़कर वापस आया हूं। मुझे खुद पर गर्व है और मुझे पता है कि अंततः मेरे परिवार को भी मुझ पर गर्व होगा। मैं एक सफल व्यक्ति हूं। पढ़ा-लिखा हूं। सोचने समझने वाला शख्स हूं। और मुझे किसी बात पर शर्म नहीं है। आखिर किसी को तो शुरुआत करनी ही थी। और इसकी शुरुआत करते हुए मैं गर्व महसूस कर रहा हूं।'  

लेकिन जमशेद महमूद के आरोपों से जो तूफान खड़ा हो गया, उसकी वजह यह है कि उन्होंने खुलासा किया कि उनसे दुष्कर्म करने वाला शख्स मीडिया उद्योग की बड़ी हस्ती है। उन्होंने उनके साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी का नाम तो नहीं बताया, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उसका संबंध मीडिया उद्योग से है। फिल्मकार ने उस पीड़ादायक स्मृतियों को याद करते हुए कहा कि कैसे उन्हें उस कथित घटना के बाद बेहद कठिन समय से गुजरना पड़ा था। उन्होंने कहा कि वह उनका विरोध इसलिए नहीं कर पाए, क्योंकि वह बेहद ताकतवर था।

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कुछ करीबी दोस्तों से इसके बारे में बताया था, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जमशेद महमूद ने कहा कि वह इसके बारे में इसलिए लिख रहे हैं, क्योंकि यौन उत्पीड़न के खिलाफ शुरू हुए #मीटू मूवमेंट पर हमले किए जा रहे हैं। हाल ही में लाहौर के एक कॉलेज के प्रोफेसर ने उन पर दुष्कर्म का गलत आरोप लगाए जाने के कारण खुदकुशी कर ली। जांच रिपोर्ट में उन्हें निर्दोष पाया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया, तो प्रोफेसर ने जान दे दी।

फिल्मकार ने कहा कि वह यौन उत्पीड़न की अपनी व्यथा को बताने के लिए सामने आने वाले हर व्यक्ति के साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि उनके खुलासों के घातक नतीजे हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए इसे साझा करना जरूरी था, क्योंकि इस मूवमेंट (#मीटू) की वैधता पर सवाल किए जा रहे हैं।

मैंने जब उनसे पूछा कि वह उस मीडिया उद्यमी का नाम क्यों उजागर नहीं कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, 'वह मीडिया उद्यमी बेहद ताकतवर है और उसका नाम सार्वजनिक करने पर पाकिस्तान का कानून और व्यवस्था मेरी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते।' जमशेद के ट्वीट के बाद बहुत से लोग उनके समर्थन में आगे आए हैं। लोग चाहते हैं कि उनके साथ दुष्कर्म करने वाले मीडिया उद्यमी का नाम सामने आए।

नवाज का संघर्ष
इस बीच, लाहौर से खबर आई है कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल (नवाज) के नेता नवाज शरीफ जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि उनकी प्लेटलेट्स बेतहाशा गिर चुकी हैं। उन्हें जेल से अस्पताल लाया गया है। पिछले कई महीने से नवाज शरीफ के स्वास्थ्य में बुरी तरह से गिरावट आई है और डॉक्टर तथा उनकी पार्टी के नेता प्रधानमंत्री इमरान खान से उन्हें अस्पताल में भरती करने का आग्रह कर रहे थे, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली।

पूरे पाकिस्तान में भारी विरोध होने और मंत्रिमंडल की सलाह के बाद ही नवाज शरीफ को अस्पताल में भरती करने की इजाजत दी गई। उनकी बेटी मरियम नवाज भी बीमार हैं और सुनवाई का सामना कर रही हैं। उन्होंने अदालत से अपने पिता को देखने की इजाजत मांगी। पहले उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई और एक बार फिर जब प्रधानमंत्री पर दबाव बनाया गया, तो मरियम को भी उसी अस्पताल में भरती करने और अपने पिता से मिलने की इजाजत दी गई।

वाकई इमरान खान के लिए चीजें राजनीतिक रूप से बहुत अच्छी नहीं हैं। इस महीने के आखिर में जमात ए उलेमा इस्लाम के नेता मौलाना फजलूर रहमान अपने लाखों समर्थकों के साथ इस्लामाबाद में धरना देने वाले हैं। उन्होंने दावा किया है कि वह तब तक डटे रहेंगे, जब तक कि प्रधानमंत्री इमरान खान इस्तीफा नहीं दे देते। कुछ लोग अटकल लगा रहे हैं कि पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल बाजवा इमरान खान की ढेर सारी नाकामियों को बर्दाश्त कर चुके हैं, खासतौर से अर्थव्यवस्था को नियंत्रित रखने की उनकी नाकामी को, ऐसे में सेना उन पर और दबाव बना सकती है।

यदि यह सच है, तो यह खराब कदम होगा, क्योंकि नियंत्रण रेखा पर हालात अच्छे नहीं हैं, श्रीनगर में भी स्थिति सामान्य नहीं है और मुजफ्फराबाद से भी नई संविधान सभा के गठन की मांगें उठ रही हैं। लेकिन इन सबके बीच एक अच्छी खबर यह है कि दशकों बाद भारत और पाकिस्तान करतारपुर साहिब गलियारा खोलने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने को राजी हो गए।

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