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अब हर घर तक पहुंचे बिजली

Mon, 07 May 2018 05:51 PM IST
अवधेश कुमार
अवधेश कुमार Updated Mon, 07 May 2018 05:51 PM IST
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Now electricity for every house
अवधेश कुमार
देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाए जाने की सूचना से हर भारतवासी प्रसन्न होगा। हालांकि इस पर राजनीतिक बयानबाजी चलती रहेगी। श्रेय लेने की होड़ भी पार्टियों के बीच जारी रहेगी। सरकार के दावों पर प्रश्न भी उठेंगे। यह हमारी राजनीति का स्थायी चरित्र है।

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लेकिन प्रधानमंत्री के ट्वीट एवं उर्जा मंत्रालय के दावों को स्वीकार करें, तो मणिपुर के लेइसांग गांव के साथ देश के सभी 5,97,464 गांवों में अब बिजली पहुंच गई है। लेइसांग जैसे इतने दूरस्थ और छोटे गांव तक बिजली पहुंच गई, तो फिर इस खबर पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि भारत में बिना बिजली एक भी गांव नहीं बचा। कुछ मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि कई जगह बिजली के खंभे, तार और ट्रांसफर्मर तक लगे हैं, लेकिन बिजली नहीं आ रही। तो इसे ठीक करने की आवश्यकता है।

केवल एक बार खंभे और तार लगाकर बिजली पहुंचा देना ही पर्याप्त नहीं होता। कई कारणों से बिजली आपूर्ति बाधित होती है। इन सबको ठीक करने की दुरुस्त प्रणाली खड़ी किए बगैर स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकती। किंतु इसमें राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।  

यह कहना तो गलत होगा कि पूर्व की सरकारों के कार्यकाल में बिजली पर काम नहीं हुआ। लेकिन शेष बचे दूरस्थ गांवों को बिजली से जोड़ना भी एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लालकिले की प्राचीर से 1000 दिन के अंदर देश के अंधेरे में डूबे 18,452 गांवों में बिजली पहुंचाने का ऐलान किया था। इसके लिए दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना शुरू की गई। 28 अप्रैल 2018 को यह संकल्प पूरा हुआ। यानी तय समय सीमा से 12 दिनों पहले। 

सरकार की योजना पहले मार्च 2019 तक हर घर को बिजली देने की थी। अब इसे पीछे खींचकर 31 दिसंबर 2018 कर दिया गया है। पिछले वर्ष सितंबर में पंडित दीनदलाय उपाध्याय के 101वें जन्मदिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने सहज बिजली हर घर योजना सौभाग्य आरंभ की थी। इस योजना का उद्देश्य देश के करीब चार करोड़ घरों तक बिजली पहुंचाना है।

उस समय के आंकड़ों के अनुसार देश के कुल 25 करोड़ परिवारों में चार करोड़ परिवार बिना बिजली के रह रहे थे। अभी तक के नियम के अनुसार यदि किसी गांव में 10 प्रतिशत लोगों के पास बिजली के कनेक्शन हैं और उसी गांव के सामुदायिक स्थानों जैसे स्कूल, अस्पताल, पंचायत कार्यालय में बिजली है, तो यह विद्युतीकृत गांव की श्रेणी में आ जाता है। जबकि वहां की आबादी का बड़ा हिस्सा बिजली से वंचित होता है।

राजनीतिक आलोचना के बाद सरकार ने जो आंकड़े दिए हैं, उनके अनुसार देश में 82 प्रतिशत गांव ऐसे हैं, जहां विद्युतीकरण का स्तर 46 से 100 प्रतिशत के बीच है। यदि मिशन मोड में काम हुआ, तो इस वर्ष के अंत तक संपूर्ण विद्युतीकरण के लक्ष्य को हासिल करना कठिन नहीं होगा। हालांकि देश में ऐसे परिवारों की संख्या कम नहीं है, जो शायद लगातार बिजली शुल्क का भुगतान नहीं कर सकें। हम उन्हें कनेक्शन तो दे देंगे, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति जब तक शुल्क वहन करने की नहीं होगी, तो वे चाहकर भी विद्युत सेवा का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

इसलिए एक तो बिजली के शुल्क का निर्धारण व्यावहारिक करना होगा, गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए अलग शुल्क की व्यवस्था करनी होगी। लेकिन सबसे बढ़कर लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए सरकार को काम करना होगा, ताकि वे सम्मानजनक जीवन भी जी सकें।
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