सड़कों पर अब साइकिल का दम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐसी चली पॉल्यूशन की हवा तेरे शहर में, फंसकर रह गई कार अब तेरे शहर में, न जाने स्मार्ट शहरों ने कैसी पकड़ी राह, साइकिल हुई है हवा पर सवार तेरे शहर में। स्मार्ट शहरों के कदम कुछ इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। ये उस गीत के बोल हैं, जो जल्द ही किसी बड़े गीतकार के नाम से किसी फिल्म में देखने-सुनने को मिल सकता है। उसके हिट होने के बाद इसी तर्ज पर ढेर सारे गीत आएंगे। नायक नायिका के लिए गाएंगे कि मेरी साइकिल के डंडे पे बैठ जा, संडे को अपन फन-डे मनाएंगे, हिल-टॉप जाएंगे, कंडे जलाएंगे, कंडे जलाकर ठंडी भगाएंगे। धरम दा कहेंगे कि बसंती, इस कार के धुएं से तुम्हारी आंखों से ये जो आंसू बह निकले है, मैं इन कारों को ही सड़कों से उड़ा दूंगा। न रहेगी कार, न उठेगा धुआं।
निर्माता कंपनियों को भी अब ऐसी साइकिलें बनानी होंगी कि चलाने वाले का स्टेटस भी बना रहे। उनके मॉडलों का नामकरण कुछ इस तरह होगा- लंगड़ा साइकिल, चौसा साइकिल, दशहरी साइकिल और सिंदूरी साइकिल। समय-समय पर कुछ अल्फांजो साइकिल के लिमिटेड एडिशन भी बाजार में उतारे जाएंगे। लाल बत्ती सुसज्जित लिमिटेड एडिशन केवल अति विशिष्ट लोगों को दिए जाएंगे, ताकि साइकिल का सांकेतिक प्रचार सुलभ हो सके। लंगड़ा साइकिल के पहिए सिल्वर प्लेटिड और इससे ऊपर के सभी मॉडल गोल्ड प्लेटिड हों, तभी इन्हें परमिट दी जाए। साइकिल के एक पहिए की चोर बाजार में कम से कम इतनी कीमत तो हो कि एक चोर परिवार अच्छे रेस्तरां में खाना खा सके।
मोटर कारें आज सुबक-सुबक कर यही गुनगुना रही हैं, वक्त ने किया क्या हंसी सितम, जिन्हें सड़कों पर ढेर करते थे हम, वही साइकिलें सड़कों पर दिखा रहीं दम। पन्नू भाई गा रहे हैं, मन्नू भाई मोटर गई थम थम थम, साइकिल चलाएंगे, हेल्थ बनाएंगे, पॉल्यूशन से अपनी दिल्ली बचाएंगे, नेचर से अब नहीं खेलेंगे हम। दिनकर जी की पंक्तियों से जोश में भरी साइकिल ललकार रही है कि ‘हवा अब दिल्ली की सुधरने को है, सड़कें खाली करो कि साइकिल आती है।’