फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   No difference between the mind and the fish

मछलियों के जरिये गुरु ने विवेकानंद को दिया खास ज्ञान

Tue, 09 Jun 2015 04:43 PM IST
डॉ रश्मि
डॉ रश्मि Updated Tue, 09 Jun 2015 04:43 PM IST
विज्ञापन
No difference between the mind and the fish

एक बार की बात है। नरेंद्र को इंसान की विभिन्न प्रवृत्तियों के बारे में स्वामी रामकृष्ण समझा रहे थे। वह बोले, इंसान अपने स्वभाव के अनुसार चार प्रकार के होते हैं, बद्ध, मुमुक्षु, मुक्तात्मा और नित्य। नरेंद्र ने कहा, गुरुवर, इन चारों के बारे में विस्तार से बताइए।

विज्ञापन


स्वामी जी ने समझाया, बद्ध वे हैं, जो संसार से बंधे रहते हैं। मुमुक्षु वे हैं, जो संसार से मुक्ति की इच्छा रखते हैं, और उनमें से कोई-कोई मुक्त हो भी जाते हैं। मुक्तात्मा संत-महात्मा के समान होते हैं। वे संसार की इच्छाओं में नहीं फंसते और ईश्वर में ही ध्यान लगाए रहते हैं। और नित्य प्राणी इस संसार से इतने विरक्त हो चुके होते हैं कि एक दिन अपने सभी कर्म पूरे करके ईश्वर में ही नित्य हो जाते हैं और संसार से मुक्त हो जाते हैं।
विज्ञापन


पढ़ें, धन और खुशहाली लाने वाले वास्तु के 15 खास टिप्स, फायदा खुद महसूस करेंगे


नरेंद्र ने इसे और आसान उपमा देकर समझाने की गुजारिश की। तब स्वामी रामकृष्ण ने मछली का उदाहरण देते हुए कहा, जब जाल तालाब में फेंका जाता है, तब जो दो-चार होशियार मछलियां होती हैं, वे जाल में नहीं फंसतीं। ऐसी मछलियां नित्य जीव के समान हैं। किंतु जाल में अनेक मछलियां फंस जाती हैं, जिनमें से कुछ निकल भागने की कोशिश करती हैं और सफल भी हो जाती हैं। वे मछलियां मुक्तात्मा के समान हुईं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें, अप्सराओं को देखकर भोग के लिए मचल उठने वाले इस तपस्वियों के बारे में जानिए

दो-चार मछलियां ऐसी भी होती हैं, जो जाल में फंसने के बाद भी उछलकर निकलने की चेष्टा करती हैं और मुक्त हो जाती हैं। उन मछलियों को मुमुक्ष जानो। अंत में वे ही मछलियां जाल में रह जाती हैं, जो बद्ध होती हैं। वे भागने की चेष्टा ही नहीं करतीं। वे जाल को मुंह में फंसाकर और मिट्टी के अंदर सिर घुसाकर चुपचाप पड़ी रहती हैं और सोचती हैं कि भय की बात नहीं; हम तो बड़े आनंद में हैं। आखिरकार उन्हें ही मछुआरा घसीटकर ले जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed