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निवेश का नया रास्ता
नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Sun, 01 Oct 2017 08:19 PM IST
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नारायण कृष्णमूर्ति
सरकार अब नए तरह से रणनीतिक विनिवेश की तैयारी कर रही है और इस बार अभिप्राय और तरीका दोनों ही इस तरह का है, जिससे आश्वस्त हुआ जा सकता है। मैंने पहले भी विनिवेश के लिए एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) यानी उद्यम विनिमय व्यापार कोष के बारे लिखा है, जोकि सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, निवेशक और संबंधित कंपनियों के प्रंबधन-सभी के लिए फायदेमंद है।
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सरकार ने मार्च, 2014 में सीपीएसई-ईटीएफ (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइज-एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) की शुरुआत की थी, जिसे बड़ी कामयाबी मिली थी और इसके जरिये एक ही बार में 3,000 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इसी वर्ष इसके तहत दूसरी बार पेशकश की गई थी, जिसमें निवेशकों ने खासी दिलचस्पी दिखाई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के अपने बजट भाषण में भी इसका न केवल जिक्र किया था, बल्कि संकेत दिए थे कि सरकार विनिवेश के इस रास्ते पर आगे बढ़ेगी।
इसी क्रम में इसी वर्ष अगस्त में नए एक्सचेंज ट्रेडेड फंड भारत-22 की घोषणा की गई थी, जिसे अक्तूबर में आम लोगों के लिए खोला जाएगा। त्योहारों के मौसम में आम लोगों के लिए निवेश का यह नया रास्ता है। भारत-22 ऐसा ईटीएफ है, जिसका प्रबंधन आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल म्युचुअल फंड करेगा। इस घोषणा से उपजे उत्साह को जो लोग हैरत से देख रहे हैं, उनकी जानकारी के लिए ईटीएफ निवेशकों से धन खींचेगा और उसे शेयरों में लगाएगा। भारत-22 सार्वजनिक क्षेत्र की उन 22 दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर नजर रखेगा, जिसमें सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करना चाहती है। ईटीएफ के तहत कंपनियों के शेयरों को सूचीबद्ध किया जाएगा, जिन्हें कोई भी निवेशक खरीद या बेच सकेगा। भारत-22 ईटीएफ में छह क्षेत्रों को शामिल किया गया है और वे हैं, 1. बेसिक मटेरियल (बुनियादी सामग्री), इसमें नाल्को (नेशनल एल्यूमिनियम कंपनी) को रखा गया है । 2. ऊर्जा, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां शामिल हैं। 3. वित्त, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक और कुछ अन्य बैंक आते हैं। 4. एफएमसीजी यानी तेजी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं से संबंधित कंपनी आईटीसी। 5. इंडस्ट्रियल कंपनियां, जिनमें लार्सन ऐंड टूब्रो जैसी कंपनियां शामिल हैं। 6. यूटिलिटी से जुड़ी कंपनियां जिनमें एनटीपीसी जैसी कंपनियां शामिल हैं। यानी सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों, खनिज और कंस्ट्रक्शन कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के साथ ही ईटीएफ में एसयूयूटीआई में सरकार की कुछ हिस्सेदारी भी शामिल होगी। भारत-22 ईटीएफ एक तरह से सूचकांक है, जिसमें इन 22 कंपनियों के शेयर निश्चित अनुपात में शामिल किए गए हैं।
ईटीएफ सरकार के लिए विनिवेश के वास्ते एक विकल्प बनकर उभरा है, जिसके जरिये वह अपना विनिवेश संबंधी लक्ष्य हासिल कर सकती है। दरअसल 2014 में लाए गए सीपीएसई-ईटीएफ के जरिये तीन चरणों में 11,500 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, जिससे सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा और उसने विनिवेश के लिए इस रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला किया। इससे निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ेगी। ईटीएफ के जरिये सरकार को भी इनमें से हर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कुछ कम करने का अवसर मिलेगा। इसके जरिये जहां सरकार को विकास कार्यों में खर्च करने के लिए धन मिलेगा, वहीं निवेशकों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में निवेश का मौका मिलेगा। सीपीएसई-ईटीएफ के दस शेयरों के उलट भारत-22 ईटीएफ में विभिन्न क्षेत्रों के 22 शेयर शामिल होंगे। हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि भारत-22 के जरिये कितना धन जुटाने की योजना है, लेकिन अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह व्यापक होगा, क्योंकि इसमें शामिल कंपनियां आकार में बड़ी हैं और उनमें काफी विविधताएं भी हैं। ध्यान रहे कि इस ईटीएफ में सूचीबद्ध की गई कंपनियों में सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली विभिन्न पहलों से लाभ उठाने की क्षमता भी है।
उदाहरण के लिए, इस सूचकांक के घटकों में हाल ही में सुधार के लिए शुरू की गई पहलों से लाभ उठाने की क्षमता है, जिनमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), वित्तीय समावेशन, डिजिटल और नकदीविहीन अर्थव्यवस्था, ढांचागत सुधार, मेक इन इंडिया और सब्सिडी की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना शामिल है। इन सारे सुधारों में घटक कंपनियों की आय में बढ़ोतरी करने की क्षमता है, जिससे अंततः निवेशकों को ही लाभ होगा। चूंकि इसमें शेयरों के आवंटन की सीमा विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर तय है, इसलिए इसमें विविधता की काफी गुंजाइश है, जैसा कि निवेश करते समय अक्सर निवेशक चाहते हैं।
भारत-22 ऐसे निवेशकों के लिए है, जोकि शेयर बाजारों में सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं। पहली बार निवेश करने वाले ऐसे निवेशकों के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है, जिन्हें लग रहा है कि सावधि जमा या उसी तरह के दूसरे तरीकों में निवेश अब कम होती ब्याज दरों के कारण फायदेमंद नहीं रहा। इस ईटीएफ की सबसे बड़ी खासियत तो यही है कि इसमें शामिल अधिकांश कंपनियां भारत सरकार द्वारा संचालित हैं। इससे निवेशकों में यह भरोसा पैदा होगा कि उनके साथ किसी तरह का छल नहीं होगा और उनके धन का सही जगह पर निवेश होगा। वे इस बात पर भी गर्व कर सकेंगे कि वे ओएनजीसी, एनटीपीसी और नाल्को सहित ऐसे विश्वसनीय सार्वजनिक उपक्रम का हिस्सा बन रहे हैं, जिन्होंने दशकों से देश की सेवा की है। ये ईटीएफ छोटे-छोटे निवेशकों के लिए हैं।