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पड़ोस: रोटी-बेटी के रिश्ते को नई ऊंचाई, मधुर संबंधों का आधार बनेंगे नेपाल से सात समझौते

Sat, 10 Jun 2023 07:26 AM IST
K S Tomar केएस तोमर
Updated Sat, 10 Jun 2023 07:26 AM IST
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सार
प्रचंड की हालिया यात्रा के दौरान सात समझौतों पर हुए हस्ताक्षर दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।
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Nepal-India relations taken to new height after pm pushpa kamal dahal prachanda india visit
पीएम पुष्पकमल दहल-पीएम मोदी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यह भारत और नेपाल के लिए अनूठा अवसर था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 की अपनी नेपाल यात्रा को याद करते हुए बताया कि उन्होंने द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए हिट (हाई-वे, आई-वे और ट्रांस-वे) का फार्मूला दिया था, जिसका उद्देश्य मौजूदा बाधाओं को दूर करना था। हाल ही में भारत दौरे पर आए नेपाली प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के साथ जब उन्होंने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए, तो माहौल कुछ अलग ही था। मोदी ने सदियों पुराने संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की उम्मीद जताई, तो नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड ने भी गर्मजोशी दिखाई और मोदी की पड़ोस नीति की प्रशंसा की।



इन समझौतों का भविष्य के आर्थिक संबंधों को आकार देने में विशेष प्रभाव पड़ेगा, जो पारस्परिक रूप से लाभप्रद होगा। इन समझौतों में सीमा पार पेट्रोलियम पाइपलाइन, व्यापार एवं वाणिज्य, एकीकृत चेक पोस्ट एवं जलविद्युत परियोजनाओं का विकास शामिल है। दोनों पक्ष रामायण सर्किट से संबंधित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर सहमत हुए हैं, जिसमें 15 पर्यटन सर्किट शामिल हैं, जिससे भविष्य में धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। मोदी और प्रचंड ने सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के रिश्ते को हर कीमत पर बनाए रखने का संकल्प लिया।


तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा के लिए विचार करते वक्त कट्टर कम्युनिस्ट प्रचंड ने चीन के ऊपर भारत को तवज्जो दी। इसके अलावा, पर्यवेक्षकों का मानना है कि नागरिकता विधेयक की मंजूरी को प्रचंड द्वारा भारत और अमेरिका के साथ अपनी निकटता दिखाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिससे चीन परेशान हो सकता है। पहले नेपाली पुरुष से शादी करने वाली भारतीय महिलाओं को सात साल नागरिकता के लिए इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब यह नौबत नहीं आएगी।

नेपाल के लिए खुशी की बात है कि भारत ने आने वाले दस वर्षों में नेपाल से 10,000 मेगावाट बिजली आयात करने का लक्ष्य रखा है, जिससे नेपाल को हजारों करोड़ रुपये की आमदनी होगी और हमारे देश के उपभोक्ताओं को बिजली की अतिरिक्त उपलब्धता का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि द्विपक्षीय साझेदारी का एक प्रमुख तत्व 669 मेगावाट लोअर अरुण हाइड्रो प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए भारत और नेपाल के बीच हुआ एक महत्वपूर्ण समझौता है, जिसे प्रचंड की नई दिल्ली यात्रा शुरू होने से पहले नेपाली निवेश बोर्ड से मंजूरी मिल गई थी। भारत नेपाल में एक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने में भी सहयोग करेगा।

मोदी और प्रचंड ने उन मुद्दों से परहेज किया, जो प्रचंड की यात्रा के नतीजे को बिगाड़ सकते थे। प्रचंड ने चतुराई से सीमा मुद्दे को उठाया और इसे कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने की बात की। ओली ने भारतीय क्षेत्रों को अपने नक्शे में दिखाकर दोनों देशों के रिश्ते को खराब कर दिया था। तब भारत ने इसे सिरे से खारिज किया था। फिर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचूला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क खोलने पर भी आपत्ति जताई थी। अपनी यात्रा की सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रचंड ने ऐसा कोई भी मुद्दा नहीं उठाया।

मोदी ने कहा, 'मैंने और प्रचंड ने भविष्य में दोनों देशों के बीच साझेदारी को 'सुपर हिट' बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए।' प्रचंड ने कहा, 'दोनों राष्ट्रों के बीच सदियों पुराने संबंध विशेष महत्व के और बहुआयामी हैं। रिश्ते ठोस नींव पर खड़े होते हैं, जो एक तरफ सांस्कृतिक, सामाजिक-आर्थिक, सभ्यतागत जुड़ाव की समृद्ध परंपरा और दूसरी तरफ संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, समझ और सहयोग के प्रति दोनों देशों की दृढ़ प्रतिबद्धता से निर्मित होते हैं।'

विश्लेषकों का मानना है कि प्रचंड की यात्रा का परिणाम नेपाल को भारत से दूर करने की चीन की नीति को खटाई में डाल सकता है, क्योंकि सात समझौतों पर हस्ताक्षर दोनों देशों के बीच संबंधों की गतिशीलता बदल सकते हैं, जिससे भविष्य में रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

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