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इतना अहंकार ठीक नहीं
राजेंद्र शर्मा
Updated Mon, 16 Mar 2015 07:06 PM IST
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हरियाणा की केसरिया सरकार के साथ तो बड़ा अन्याय हो रहा है। उसकी इस मेहरबानी पर तारीफ के कोई दो बोल बोलने के लिए भी तैयार नहीं है कि वह अब भी इंसान की जान की कीमत गाय और उसके परिवार वालों की जान से ज्यादा लगाने के लिए तैयार है। इंसान के कत्ल की सजा उम्रकैद या फांसी होती है, जबकि गाय परिवार वालों की जान लेने की सजा दस साल। खट्टर सरकार कितनी बड़ी कुर्बानी कर रही है, और वह भी मामूली इंसान के लिए।
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संस्कृति तो कहती है कि गाय परिवार की जान की कीमत इंसान की जान से भी ज्यादा है। अगर इंसान के कत्ल की सजा उम्रकैद या फांसी है, तो गाय के कत्ल की सजा उससे ज्यादा ही होनी चाहिए। पर प्रैक्टिकल प्रॉब्लम यह है कि मौत की सजा से बड़ी सजा दूसरी हो नहीं सकती। इंसानों पर यह खट्टर सरकार की मेहरबानी है कि संस्कृति के निर्देश के बावजूद वह गाय परिवार की जान की कीमत इंसानों से कम लगाने के लिए तैयार है। इंसानों को गाय के मुकाबले अपनी कीमत और कितनी ज्यादा चाहिए! इंसान होने का इतना अहंकार भी ठीक नहीं।
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कुछ लोग इस मामले में अर्थशास्त्र घुसाने की कोशिश कर रहे हैं। यह ठीक नहीं। जहां माता आ जाए, वहां अर्थशास्त्र का क्या काम? वैसे यह भी संस्कृतिविरोधियों का दुष्प्रचार ही है कि बुढ़ापे में गाय परिवार का बोझ उठाना मुश्किल होता है। गाय बेचारी इतनी सीधी होती है कि उस पर खर्च करने की जरूरत ही नहीं होती। बस घर से निकाल दो, सड़कों पर घूमकर अपना पेट वह अपने आप भर लेती है। रहे बूढ़े बैल, सांड़ वगैरह, तो वे भी डरा-धमकाकर अपना गुजारा खुद कर ही लेते हैं। फिर किस बोझ की बात करते हैं संस्कृतिविरोधी?
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खट्टर सरकार संस्कृति वालों की सरकार है। और संस्कृति वालों की सरकार वही है, जो गाय, बैल वगैरह का इंसानों से बढ़कर मोल लगाए। वर्ना इंसानों का ज्यादा मोल तो कोई भी सरकार लगा सकती है।