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जानकर हैरान हो जाएंगे, कैसे एक छोटे से बच्चे ने लुटेरे को मात दी
जमील सयानी
Updated Thu, 09 Apr 2015 08:08 AM IST
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बहुत समय पहले की बात है। अरब देश में यात्रियों का लुट जाना मामूली बात थी। इक्का-दुक्का लोगों की बात तो दूर, लूट से बचने के लिए काफिला बनाकर चल रहे लोग भी लुट जाते थे।
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इसी माहौल में यात्रियों का एक काफिला रेगिस्तान से गुजर रहा था। अचानक लुटेरों के एक गिरोह ने काफिले को चारों ओर से घेर लिया। उन्होंने हर यात्री की तलाशी ली। लगभग हर यात्री के पास कुछ न कुछ मिला। लुटेरों ने सारा सामान छीन लिया।
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काफिले में एक बारह वर्षीय लड़का भी था। उसके पास से कुछ नहीं मिला। गिरोह के सदस्यों ने यह बात सरदार से कही। इस पर सरदार ने उस लड़के से पूछा, तेरे पास से कुछ नहीं मिला, क्या अनाथ है तू? बच्चे ने कहा, मैं अपनी बीमार बहन की खिदमत करने जा रहा हूं। मेरी मां ने सोने की पांच अशर्फियां मेरी तहमद में छिपा कर रख दी थीं। वही मेरे पास हैं।
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सरदार को बड़ा आश्चर्य हुआ। अब तक जितने भी काफिले उसने लूटे थे, किसी यात्री ने अपने माल-असबाब के बारे में नहीं बताया था। यह पहला यात्री था, जो अपने पास छिपाकर रखी अशर्फियों की खबर दे रहा था। सरदार ने उस बच्चे से पूछा, जब मां ने अशर्फियां छिपाकर रख दी थीं, तो तुम हमें क्यों बता रहे हो?
जानते हो न कि हम लुटेरे हैं और तुमसे सारी अशर्फियां छीन लेंगे। बच्चा बोला, जानता हूं, पर मां ने यह भी तो सिखाया है कि कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। आपने पूछा, तो झूठ कैसे बोलता?
बच्चे की सत्यनिष्ठा ने लुटेरों के सरदार का हृदय बदल दिया। उसने तमाम यात्रियों से लूटा हुआ धन वापस कर दिया। सरदार ने भविष्य में लूटपाट न करने का वायदा किया। वह सत्यनिष्ठ बच्चा कोई और नहीं, खलीफा अमीन थे।