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नवाज शरीफ के दौर में भी निशाने पर अल्पसंख्यक

Wed, 06 Aug 2014 08:10 PM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Wed, 06 Aug 2014 08:10 PM IST
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Minority on target in Nawaz sharif regime too

पाकिस्तान में कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता, जब अल्पसंख्यकों को निशाना न बनाया जाता हो। अहमदिया समुदाय पर हो रहे हमले इसके ताजा सुबूत हैं। इस समुदाय को जुल्फिकार अली भुट्टो के शासन के दौरान गैर-मुस्लिम घोषित किया गया था। इस्लाम के कुछ बुनियादी उसूलों पर मुख्यधारा के मुसलमानों और अहमदिया मुस्लिमों के बीच अलग-अलग राय है। मुख्यधारा के मुसलमान मोहम्मद साहब को आखिरी रसूल और पैगंबर मानते हैं, जबकि अहमदिया समुदाय इससे इत्तफाक नहीं रखते। इसी कारण बहुसंख्यक मुसलमान उन्हें गैरमजहबी समझते हैं। अहमदिया समुदाय के धर्मस्थलों या कब्रों को अपवित्र किए जाने के बाद भी संबंधित अधिकारी दहशतगर्दों का साथ देते हैं।

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अहमदिया समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक ताजा घटना ईद से दो दिन पहले पंजाब के शहर गुजरांवाला में हुई है। हिंसा की शुरुआत इस आरोप के साथ हुई कि इस समुदाय के एक सदस्य ने फेसबुक पर ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री रखी थी। हिंसा के बाद इस समुदाय की एक बड़ी आबादी असुरक्षित महसूस करते हुए वहां से पलायन कर गई है। मानवाधिकार आयोग ने इस घटना की निंदा करने के साथ सरकार से सुरक्षा बहाल करने की मांग की है।
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इसी तरह हाल में 25 शिया तीर्थयात्रियों को, जो ईरान से यात्रा करके लौट रहे थे, बलूचिस्तान में मौत के घाट उतार दिया गया। इस हत्याकांड की निंदा करते हुए नेताओं ने कुछ आश्वासन तो दिए, पर उन पर अमल नहीं हुआ। बहुसंख्यक सुन्नियों द्वारा अल्पसंख्यक शियाओं को निशाना बनाना वहां आम है। जियाउल हक के काल में वहां धार्मिक चरमपंथ को खूब पोषित किया गया। उसी दौरान ईशनिंदा कानून बना, जिसके तहत इस्लाम या अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वालों के लिए मौत की सजा निर्धारित है। बहुसंख्यक सुन्नी सरकार पर यह दबाव बना रहे हैं कि शिया समुदाय को भी अहमदियों की तरह गैर-मुस्लिम घोषित किया जाए।
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हिंदू और सिखों को निशाना बनाने की घटनाएं तो वहां होती रहती हैं। ऐसे ही उत्पीड़न से तंग हिंदू बिरादरी का एक जत्था धार्मिक यात्रा पर अस्थायी वीजा लेकर भारत आया था। ये लोग वापस नहीं लौटना चाहते और भारत की नागरिकता की मांग कर रहे थे। वहां मंदिरों पर हमले की सिलसिलेवार घटनाओं के बीच नेशनल एसेंबली में सत्ताधारी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज) के हिंदू सांसद रमेश कुमार वंकवानी ने अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थानों की सुरक्षा के लिए सरकार पर दबाव डाला है। सिख बिरादरी भी सरकार से ऐसी ही मांग कर रही है। वहां रह रहे लगभग एक करोड़ ईसाइयों का जीवन भी सुरक्षित नहीं। गौरतलब है कि पाक की कुल आबादी के चार प्रतिशत से भी कम अल्पसंख्यक हैं।


पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अल्पसंख्यकों के मूल अधिकारों की सुरक्षा का खुद संज्ञान लेकर सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक परिषद और एक खास सुरक्षा बल का गठन करे, ताकि संविधान में अल्पसंख्यकों को जो अधिकार दिए गए हैं, उन पर अमल किया जा सके। सरकार ने अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का भरोसा तो दिलाया है, पर वहां ईशनिंदा कानून को खत्म करना और दूसरे जरूरी कदम उठाना उतना आसान भी नहीं है।

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