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क्या कहती है सुबह की पहली चाय: छोटी खुशियां हासिल करने में एक मिनट भी तो नहीं लगता, बड़ा करने की भागम-भाग…

Sun, 13 Jul 2025 08:05 AM IST
दीपक कुमार शर्मा जान्सी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
जान्सी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 13 Jul 2025 08:05 AM IST
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सार
जिंदगी में खुशियां पाने का कोई रहस्य नहीं है। कुछ बड़ा करने की भागम-भाग में कहीं आप चाय की चुस्की या सब्जियां काटने में जो सुख है, उसे भूल तो नहीं गए।
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Message of first tea in morning even a minute not needed to achieve small happiness
चाय (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

जीवन की कुछ घटनाओं के कारण मैं कुछ दिनों से थोड़ा अभिभूत महसूस कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि किसी पहाड़ की चोटी पर जाकर बैठ जाऊं, लेकिन मेरी यथार्थवादी योजना यह है कि मैं हर दिन खुद को तरोताजा महसूस करने के लिए छोटी-छोटी खुशियों की तलाश करूं। मसलन, हर सुबह मैं यह पता करती हूं कि क्या मेरे घर के पिछवाड़े में कोई नया पक्षी आया है। आज सुबह मुझे उत्तरी फ्लिकर पक्षी के बारे में पता चला, जिसके बारे में मुझे नहीं पता था कि इस नाम का कोई पक्षी होता भी है। चैपल हिल स्थित उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय में सकारात्मक भावनाएं और मनोविज्ञान प्रयोगशाला की निदेशक बारबरा फ्रेडरिकसन कहती हैं कि इस तरह की सकारात्मकता के सूक्ष्म क्षण आपके स्वास्थ्य में सुधार ला सकते हैं। हालांकि, ये पल क्षणिक हैं, पर ये ‘मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और विकास के लिए पोषक तत्वों के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिससे आपको धीरे-धीरे खुद को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।’



उनका और अन्य लोगों का शोध यह बताता है कि खुशी के इन अंशों को पहचानना, विकसित करना और उनका आनंद लेना एक व्यक्ति के रूप में भी आपका विकास करता है। प्रकाशनाधीन पुस्तक टुडे वाज फन की लेखिका ब्री ग्रॉफ कहती हैं, ‘एक छोटी-सी बात आपको परेशान कर सकती है, आप उससे चिढ़ सकते हैं। लेकिन इसके विपरीत, कुछ छोटी-छोटी बातें आपको ऐसी गहरी खुशियां दे सकती हैं, जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। वह कहती हैं कि मुझे अपनी डेस्क पर सभी चीजों को व्यवस्थित करने से शांति तो मिलती ही है, अपनी छोटी-सी दुनिया पर नियंत्रण का एहसास भी होता है।


द जॉय रीसेट की लेखिका मैरीकैथरीन मैकडोनाल्ड, कहती हैं कि सुबह की पहली चाय की चुस्की या फलों को छीलकर उसे बराबर टुकड़ों में काटने से भी खुशी मिलती है। ग्रॉफ कहती हैं कि इन छोटी-छोटी खुशियों में से किसी एक को आदत बनाने की कोशिश करें। वह कहती हैं कि जो गतिविधियां हमें ‘बड़ी खुशी’ देती हैं, जैसे छुट्टियां, उनके लिए बहुत अधिक योजना, धन, समय और प्रयास की आवश्यकता होती है। पर आप हर दिन कहीं बाहर नहीं जा सकते, कभी-कभी ही छुट्टियों का आनंद ले सकते हैं।

यदि आपको पेंटिंग करना पसंद है, और कैनवास व ब्रश निकालने का समय नहीं है, तो आप दिन में कोई एक स्केच बनाने का लक्ष्य रख सकते हैं। यदि बागवानी से खुशी मिलती है, तो अपने साथियों को उपहार में कोई पौधा दे सकते हैं। उन्हें अच्छा ही लगेगा। छोटी-छोटी खुशियां हासिल करने में एक मिनट भी तो नहीं लगता।

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