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कायम है सोने का जादू : भारत सरकार की नीतियों से यह महंगा तो हो ही रहा था

Sat, 27 Jul 2019 01:33 AM IST
मधुरेंद्र सिन्हा मधुरेन्द्र सिन्हा
मधुरेन्द्र सिन्हा Published by: मधुरेंद्र सिन्हा Updated Sat, 27 Jul 2019 01:33 AM IST
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सोना (फाइल फोटो) - फोटो : social media

सोना अब फिर बहुमूल्य हो गया है, कीमती और दुर्लभ। भारत सरकार की नीतियों से यह महंगा तो हो ही रहा था, लेकिन अब अमेरिका के कारण यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी महंगा होता जा रहा है। इसके बावजूद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातक देश बना हुआ है। कई वर्षों तक वह दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश रहा, लेकिन अब चीन उससे आगे निकल गया है। भारतीयों का सोने के प्रति मोह भंग नहीं होता है और वे सोना खरीदने में परहेज नहीं करते।


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सोना अब फिर बहुमूल्य हो गया है, कीमती और दुर्लभ। भारत सरकार की नीतियों से यह महंगा तो हो ही रहा था, लेकिन अब अमेरिका के कारण यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी महंगा होता जा रहा है। इसके बावजूद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातक देश बना हुआ है। कई वर्षों तक वह दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश रहा, लेकिन अब चीन उससे आगे निकल गया है। भारतीयों का सोने के प्रति मोह भंग नहीं होता है और वे सोना खरीदने में परहेज नहीं करते।

हमारी परंपराएं भी ऐसी हैं कि सोना खरीदना मजबूरी भी है। अक्षय तृतीया, धन तेरस जैसे पर्व पर हमारे यहां सोना खरीदने का चलन तो है, हम बेटियों के ब्याह में भी सोना खरीदते ही हैं। महिलाएं अपनी सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए स्वर्णाभूषण खरीदती ही हैं। यानी सोना खरीदने की पूरी वजहें हैं। इतना ही नहीं, भविष्य में आने वाले बुरे वक्त के लिए भी सोना खरीदना अच्छा माना जाता है। सोना एक बढ़िया निवेश भी है।

पहले सरकारें सोने पर टैक्स बढ़ाने से बचती थीं, लेकिन पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोने पर कस्टम शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया और इस बार निर्मला सीतारमण ने ढाई प्रतिशत और बढ़ोतरी कर दी। यानी कुल 12.5 प्रतिशत। इसके अलावा तीन प्रतिशत जीएसटी भी है। इतने सारे टैक्स के कारण भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में पांच लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा का फर्क पड़ गया है।

इसका बुरा असर सोने तथा इसके आभूषणों की बिक्री पर पड़ा और इसमें 10 प्रतिशत की गिरावट आ गई है और ज्वेलरी उद्योग मंदी के दौर में आ गया है, जिससे यहां रोजगार घटता जा रहा है। टैक्स बढ़ाने का सरकार का यह फैसला इस तर्क पर आधारित है कि इससे सोने का आयात घटेगा और राजस्व घाटे में कमी आएगी।

साथ ही रुपये के मूल्य में गिरावट थमेगी। इतना ही नहीं, सरकार चाहती है कि लोग सोने के बजाय उत्पादक वस्तुओं में निवेश करें। लेकिन इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। ईमानदारी से व्यवसाय करने वाले कारोबारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि इस तरह से तो सरकार के टैक्स वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।

लेकिन सोने का मोह आसानी से जाता भी तो नहीं। महंगा होने के बावजूद भारत हर महीने तकरीबन ढाई अरब डॉलर का सोना आयात कर रहा है। कच्चे तेल के बाद हम सोने पर सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करते हैं, क्योंकि भारत में सोने की खदानों से उत्पादन नगण्य ही है। देश में सोने की कीमतें विदेशों की तुलना में कहीं ज्यादा होने का असर यह हुआ कि इसकी तस्करी बढ़ गई है। हर दिन देश में कहीं न कहीं तस्करी के सोने के पकड़े जाने की खबरें आती रहती हैं।

खाड़ी के देशों, मसलन यूएई (संयुक्त अरब अमीरात), बहरीन वगैरह के अलावा थाईलैंड, म्यांमार, नेपाल, बांग्लादेश तक से सोने की तस्करी की खबरें आती रहती हैं। राजस्व गुप्तचर विभाग (डीआरआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017-18 में कुल 974 करोड़ रुपये का सोना पकड़ा गया। उसका यह भी मानना है कि यह कुल तस्करी का पांच से दस प्रतिशत ही है। इसका मतलब हुआ कि देश में कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये का सोना तस्करी से आया।

अब चूंकि इस पर ढाई प्रतिशत टैक्स और बढ़ गया है, तो यह धंधा पहले से कहीं लाभदायक हो गया है। अब यह राशि बढ़कर कहीं ज्यादा हो गई होगी। इसलिए इन दिनों बड़े पैमाने पर सोना पकड़े जाने की खबरें आ रही हैं। थल, वायु और जल मार्ग से भी सोना तस्करी के जरिये भारत आ रहा है। लेकिन भारतीय एजेंसियों की समस्या है कि उनके पास न तो उतना बल है और न संसाधन कि इसे रोका जा सके। उनके लिए यह बहुत बड़ी चुनौती है। आज हालात उस जमाने जैसे हैं, जब मोरारजी देसाई ने गोल्ड कंट्रोल ऐक्ट लागू किया था और उसके बाद सोने की जबर्दस्त तस्करी शुरू हुई, जिसका केंद्र दुबई बना।

सिर्फ इतना ही नहीं, इससे हमारे आभूषणों के निर्यात को चोट पहुंची है। सोने से बनने वाले आभूषण अब महंगे हो गए हैं। पिछले वित्त वर्ष के 11 महीनों में रत्न और आभूषणों के निर्यात में 6.3 प्रतिशत की गिरावट आ गई थी। यह साल भी कुछ बेहतर नहीं होगा क्योंकि इनकी तैयार माल की लागत बढ़ गई है। निर्यात बढ़ाना हमारी बहुत बड़ी वरीयता होनी चाहिए, क्योंकि तभी हम पचास खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देख सकते हैं। नीतिकारों को यह याद रखना चाहिए कि हमारे निर्यात में रत्न और आभूषणों की बड़ी भूमिका रही है। उसे संरक्षण देने की जरूरत है, क्योंकि यह सेक्टर बड़े पैमाने पर रोजगार भी देता है।

सोने के दाम अभी और बढ़ेंगे?

सोने के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब बढ़ते हैं, तो भारत उससे अछूता नहीं रह जाता है। पिछले दिनों अमेरिका-चीन व्यापारिक तनाव के कारण सोने के दाम कुछ बढ़े, लेकिन इसके बाद अमेरिका-ईरान तनाव के कारण हालात और बिगड़ गए और सोने के दाम बढ़ गए। युद्ध जैसे हालात हो जाने पर सोने के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन एक और कारण है और वह यह कि अमेरिका चाहता है कि वहां ब्याज दर घटे।

इसका असर कई वस्तुओं पर तो पड़ेगा, लेकिन सोने पर निश्चित रूप से पड़ेगा, क्योंकि निवेशक तब डॉलर के बजाय सोने की खरीदारी करेंगे। इससे सोने के दामों में बढ़ोतरी हुई है। जब यह घोषणा हुई तो स्पॉट गोल्ड 0.3 प्रतिशत उछल गया। जाहिर है, जब वहां ब्याज दरें घटाई जाएंगी, तो एक बार फिर गिरावट देखने को मिल सकती है। इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा।
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