फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   love blooms such

ऐसे खिलता है प्रेम

Sat, 25 May 2013 08:46 PM IST
अशोक वाजपेयी
अशोक वाजपेयी Updated Sat, 25 May 2013 08:46 PM IST
विज्ञापन
love blooms such

लेखक, संस्कृतिकर्मी, संपादक। हिंदी में कविता और आलोचना की 38 पुस्तक। इनके यहां उत्सव ,संभावना और प्रेम जैसे शब्द दोस्त की तरह आते हैं।

विज्ञापन


इनके शब्द हमें बार-बार बताते हैं कि यह जीवन जीने के लिए है। अगर इनके पद्य की बात करें तो कहना गलत नहीं होगा कि कविता की तहें एक रहस्य बनाती हैं।

हाल ही में आई एक किताब से इनकी दो कविताएं।


किससे
किससे कहूं घर में हो, मैं आ रहा हूं?
किससे कहूं देर हो गई है, मैं जा रहा हूं?
किससे कहूं प्यास लगी है?
किससे कहूं यह ऐन दोपहर में
नींद आ रही है?
किससे कहूं शाम कहीं चलना है?
किससे कहूं बहुत दिन हो गए,
अच्छा संगीत नहीं सुना?
किससे कहूं कि मैं हूं और नहीं हूं?

फिर नाम
मैं फिर नाम खोज रहा हूं:
नाम जो हंसे, खिल जाए,
पुकारे, मचल जाए,
नाम जो उजाले के कंधों पर चढ़ जाए
अंधेरे में ठिकाने पर पहुंच जाए
नाम जो पंखुरी-सा हलका हो,
ओस-सा द्रवित हो,
किसलय-सा कोमल हो,
और सिर्फ तुम्हारा हो, किसी शब्दकोश में न हो।...

आश्चर्य की तरह खुला है संसार (अशोक वाजपेयी की प्रेम कविताएं)
संपादन- ओम निश्चल
प्रकाशक- किताबघर प्रकाशन
मूल्य- 290 रुपए

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed