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संतुष्टि: उम्र और जीवन जीने का कोई रिश्ता नहीं, बेकार है आंकड़ों में पड़ना

Sun, 07 Jan 2024 06:58 AM IST
गुलाम अहमद एमिली लेबर वॉरेन
एमिली लेबर वॉरेन Published by: गुलाम अहमद Updated Sun, 07 Jan 2024 06:58 AM IST
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सार
जो जिंदगी जीना नहीं जानते, वे बेशक 70 के हों और 40 का महसूस करते हों, संतुष्ट फिर भी नहीं हो सकते।
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life satisfaction no relation between age and way of living
बूढ़ा आदमी - फोटो : Istock

विस्तार

समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्।


विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति।।
अर्थात् जो पुरुष नष्ट होते
हुए सब चराचर भूतों में परमेश्वर
को नाशरहित और समभाव से स्थित देखता है वही यथार्थ देखता है।
भीष्म पर्व, गीता 13/28
(अर्जुन के प्रति साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का गीतोपदेश)


हम सभी की उम्र का एक आंकड़ा होता है, जिसे हम अपने हर जन्मदिन पर याद करते हैं। लेकिन कुछ 50, 60 या 70 साल के लोग अपेक्षाकृत ज्यादा युवा दिखते और खुद महसूस भी करते हैं, जबकि इसी आयु-वर्ग के कुछ दूसरे लोग बढ़ती उम्र का रोना रोते रहते हैं। कुछ बायोमार्कर होते हैं, जैसे, त्वचा की सेहत, रक्तचाप, फेफड़ों की क्षमता इत्यादि जिनके आधार पर वैज्ञानिक इस फर्क को माप सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली और भाग्यशाली आनुवंशिक विरासत वाले लोग इन आकलनों में युवा पाए जाते हैं। लेकिन लोगों की बायोलॉजिकल उम्र जानने का एक तरीका सब्जेक्टिव उम्र पर आधारित भी होता है।

फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंटोनियो टेरासियानो के अनुसार, 'जब वैज्ञानिक पूछते हैं, 'आप दिन के ज्यादातर वक्त खुद को कितनी उम्र का महसूस करते हैं?', तब लोग इस सवाल का जो जवाब देते हैं, वह उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को दर्शाता है।' जो लोग खुद को अपनी उम्र से कम का महसूस करते हैं, वे अमूमन उन लोगों की तुलना में ज्यादा स्वस्थ होते हैं, जो खुद को ज्यादा उम्र का महसूस करते हैं। 2018 में दक्षिण कोरिया में हुए एक अनुसंधान में 68 स्वस्थ बुजुर्गों के दिमाग की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि जो लोग खुद को युवा महसूस करते हैं, उनमें वृद्धावस्था के लक्षण कम ही दिखे। सवाल उठता है कि क्या युवा महसूस करना लोगों को स्वस्थ बनाता है, या फिर जो लोग पहले से स्वस्थ हैं, वे युवा महसूस करते हैं।


एजिंग एंड मेंटल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक चीनी अध्ययन में पाया गया कि लोगों ने याददाश्त संबंधी कार्य में बेहतर प्रदर्शन किया, जब उन्हें बताया गया कि वे अपनी उम्र के अन्य लोगों की तुलना में अधिक तेज हैं। लीपजिग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वीज़ के अनुसार जिन संस्कृतियों में बुढ़ापे को नकारात्मक नहीं समझा जाता, वहां के लिए सब्जेक्टिव उम्र के विचार से वाकिफ नहीं होते। उनके एक शोध के दौरान बुजुर्ग व्यक्ति ने जवाब दिया, 'मैं 80 साल का हूं, लेकिन आपका क्या मतलब है कि मैं खुद को कितनी उम्र का महसूस करता हूं?'

वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी की डॉ ट्रेसी गेंड्रोन के अनुसार 'जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हम अधिक खुश और संतुष्ट होने लगते हैं। सब्जेक्टिव उम्र के विचार के मुताबिक एक साठ साल का व्यक्ति खुद को 45 साल का महसूस कर सकता है। लोग लगातार परिपक्व होते हैं और कोई व्यक्ति जो 45 साल में होता है, वह 60 साल में नहीं हो सकता। यह सवाल दरअसल अनैतिक है। उम्र बढ़ना कोई नकारात्मक चीज नहीं। जो लोग जिंदगी का आनंद उठाना जानते हैं, वे हर उम्र में शांति से रह सकते हैं। और जो जिंदगी जीना नहीं जानते, वे बेशक 70 के हों और 40 का महसूस करते हों, संतुष्ट फिर भी नहीं हो सकते।'

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