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लीव एप्लीकेशन

Tue, 24 Feb 2015 07:39 PM IST
कल्लोल चक्रवर्ती
कल्लोल चक्रवर्ती Updated Tue, 24 Feb 2015 07:39 PM IST
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यह अच्छा हुआ कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी की लीव एप्लिकेशन कांग्रेस अध्यक्ष ने मंजूर कर ली। यह छुट्टी वाकई जरूरी थी। मई, 2014 से ही हार का मंथन करते हुए वह थक गए थे। इस घटनाक्रम से पता चलता है कि कांग्रेस में इंटरनल डेमोक्रेसी बरकरार है। वर्ना ऐसा कभी नहीं सुना कि पार्टी उपाध्यक्ष छुट्टी के लिए अध्यक्ष को बाकायदा एप्लीकेशन दे।

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एक भाजपा है, जिसने दिल्ली हारने के बाद ऑफिस बीयररों की छुट्टी बिहार विधानसभा चुनाव तक के लिए कैंसिल कर दी है। खुद शाह जी उसूल के इतने पाबंद और नाम के विपरीत इतने मितव्ययी हैं कि ऐन दिल्ली के चुनावी नतीजे के दिन ही अहमदाबाद में अपने बेटे की शादी रखी थी, ताकि बैंड-बाजे और मिठाइयों के लिए दो-दो जगह खर्च न करना पड़े। दिल्ली हार पर मंथन के लिए छुट्टी तो हालांकि उन्हें भी चाहिए, पर अन्ना आंदोलन से पार्टी इतनी सहमी हुई है कि इस समय खुद वह छुट्टी लेना एफोर्ड नहीं कर सकते।
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सोनिया गांधी चाहतीं, तो राहुल की छुट्टी का एप्लीकेशन खारिज कर, अपने उसूल का एक और परिचय दे सकती थीं, जैसा कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद का त्याग करके दिया था। पर मां की ममता भी तो कोई चीज होती है! वैसे भी बजट सत्र में मौजूद रहकर राहुल सत्ता पक्ष को कौन-सी परेशानी में डालते? बल्कि ठीक इसी समय छुट्टी लेकर उन्होंने जताया दिया है कि बजट-वजट के मौके पर कोई उनसे सक्रियता की उम्मीद न पाले। बड़ा नेता वही होता है, जो जरूरी समय पर खिसकना एफोर्ड कर सके।
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अब यह कोई न पूछे कि होली की मारामारी के इस सीजन में जब लोग चार-पांच सौ वेटिंग लिस्ट वाली टिकट भी मजबूरी में ले रहे हैं, तब राहुल कौन-सी गाड़ी से, कितने वेटिंग में, और कहां जाएंगे। वह कोलंबिया भी जा सकते हैं, होनोलुलू भी। खत्म हो रही कांग्रेस को खड़ा करने के लिए वह चिंतन करना चाहते हैं, और इसके लिए उन्हें माकूल जगह चाहिए। अब अगर इस देश में ऐसी कोई जगह नहीं है, तो राहुल गांधी तो उसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं न!

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