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पक्षी से सीखा जीवन का मर्म
शिवकुमार गोयल
Updated Fri, 05 Jul 2013 09:22 PM IST
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अवधूत दत्तात्रेय हर क्षण किसी से ज्ञान प्राप्त करने के लिए तत्पर रहा करते थे। वह पशु-पक्षियों एवं कीट-पतंगों की गतिविधियों को बड़े ध्यान से देखा करते और विवेचना कर उनसे शिक्षा प्राप्त करते थे। वह कहते थे, जिनसे मैं शिक्षा लेता हूं, वे मेरे गुरु हैं।
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एक दिन वह वन जा रहे थे। रास्ते में एक वृक्ष के नीचे बैठकर वह भगवान का स्मरण करने लगे। अचानक उनकी दृष्टि आकाश की ओर गई। उन्होंने देखा कि एक पक्षी आगे-आगे उड़ा जा रहा है और एक दर्जन पक्षी उसका पीछा कर रहे हैं। दत्तात्रेय ने ध्यान से देखा कि आगे वाले पक्षी की चोंच में रोटी का टुकड़ा है और उसे छीनने के लिए ही सभी पक्षी उसका पीछा कर रहे हैं। इस क्रम में कुछ पक्षी चोंच मारकर उसे घायल कर रहे हैं।
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पक्षियों के आक्रमण से लहूलुहान हुए उस पक्षी ने अचानक चोंच से रोटी का टुकड़ा गिरा दिया। पीछा कर रहे किसी अन्य पक्षी ने उसे लपक लिया। अब अन्य पक्षी उसे चोंच मारने लगे। पहले वाला पक्षी चोंचों के प्रहार से लहूलुहान हो नीचे उतरकर एक वृक्ष पर बैठ गया।
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दत्तात्रेय ने हाथ जोड़कर उसे संकेत करते हुए कहा, हे पक्षी, आज तू भी मेरा गुरु हुआ। मैंने तुझसे आज यही सीखा है कि संसार में जिस वस्तु की प्राप्ति के लिए ज्यादा लोग अधिकार जताते हों, उसे छोड़ देना ही उचित है।