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कानून-व्यवस्था : नई सुबह के इंतजार के बीच फिर कठघरे में आई ममता सरकार, वहशत के बाद दहशत

Mon, 01 May 2023 07:07 AM IST
Bimal Rai बिमल राय
Updated Mon, 01 May 2023 07:07 AM IST
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सार
रामनवमी के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि कालियागंज की घटना से ममता सरकार फिर सवालों के घेरे में है।
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Law and order: Amidst waiting for new dawn Mamata Banerjee government again in the dock, panic after violence
पश्चिम बंगाल के कालियागंज में हिंसा के बाद तैनात पुलिस। - फोटो : Agency

विस्तार

पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों फिर कानून-व्यवस्था की बदहाली का मामला उठा, जिससे ममता बनर्जी की सरकार सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री के पास पुलिस विभाग भी है। उनकी पुलिस ने उत्तर बंगाल के कालियागंज में एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या की घटना को आत्महत्या करार दिया, क्योंकि उसके शव के पास कथित तौर पर जहर की शीशी पाई गई थी। लड़की के शव को पुलिस घसीटकर ले गई, जिसे पूरे देश ने देखा। जनता इस दृश्य से इतनी क्षुब्ध हुई कि उसने स्थानीय थाना फूंक दिया और वहां से भागकर एक घर में शरण लेने वाले 25 पुलिस कर्मियों को लाठी-डंडों से पीटा। 



आम लोगों द्वारा कानून को अपने हाथ में लेने के इस मामले को किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता। लेकिन राज्य के हालात ही ऐसे हैं कि कोई किसी को उपदेश देने की स्थिति में नहीं है। पिछले दिनों पुलिस ने एक भाजपा पंचायत सदस्य के घर पर धावा बोला और लोग जब आड़े आए, तो पुलिस की गोली से एक व्यक्ति की मौत भी हो गई। इससे पहले राज्य में रामनवमी के दौरान दंगा फैला था, जिसे मुख्यमंत्री ने बाहरी लोगों की साजिश बताया था। 


अलबत्ता हकीकत पर नजर रख रहे कलकत्ता हाई कोर्ट ने 27 अप्रैल को एनआईए जांच का आदेश दिया। उससे एक दिन पहले मालदा के एक स्कूल में बंदूक और बम लेकर घुसने वाले व्यक्ति को ममता ने बड़ी साजिश बताकर पता नहीं, क्या इशारा किया।

एक तरफ पश्चिम बंगाल की यह स्थिति है, दूसरी तरफ ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी भतीजे अभिषेक बनर्जी अभी 60 दिनों के 'तृणमूल का नया ज्वार' अभियान पर हैं, जिसमें वह स्वच्छ छवि वालों को ही पंचायत टिकट देने के लिए वोटिंग करवा रहे हैं। पर कूचबिहार में उनकी सभा के पहले ही दिन बैलेट बॉक्स लूट लिए गए और बैलेट पेपर फाड़े गए। यह यही बताता है कि ज्वार कई बार अनुशासन की दीवार तोड़ देता है। इस नए ज्वार के बीच ही मुख्यमंत्री बार-बार यह कहती रहती हैं कि वह राज्य के किसी भी व्यक्ति की नौकरी नहीं जाने देंगी। उल्लेखनीय है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने घूस देकर स्कूलों में नौकरी पाने वाले ग्रुप सी-डी के हजारों लोगों को नौकरी से हटा दिया है और मजबूर प्रधानाध्यापकों को घंटी बजाने तक का काम करना पड़ रहा है।

सत्ता में रहते हुए भ्रष्टाचार में लिप्तता का आलम यह है कि अब अणुब्रत मंडल जैसे बाहुबली नेता को अपनी बेटी और पशु तस्करी के अन्य आरोपियों के साथ पूछताछ में शामिल होना पड़ेगा। बार-बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की दुहाई देने वाली मुख्यमंत्री पहले दिन से ही अणुब्रत मंडल का बचाव करती आ रही हैं। उन्होंने अणुब्रत को वीरभूम जिला अध्यक्ष भी बनाए रखा है, और अणुब्रत मंडल की बेटी सुकन्या और अपने भतीजे अभिषेक की पत्नी रुजिरा व साली मेनका (कोयला घोटाले के आरोपी) को समन जारी किए जाने पर बंगाली अस्मिता का कार्ड भी खेल चुकी हैं कि बंगाल की बहू-बेटियों को दिल्ली ले जाकर परेशान किया जा रहा है। 

पश्चिम बंगाल में सत्ता से जुड़ा भ्रष्टाचार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि बहुआयामी है। अगर ऐसा नहीं होता, तो तृणमूल में ही बने रहकर सत्ता का सुख भोगने का इच्छुक एक बेटा अपने पिता मुकुल राय को आधा पागल नहीं घोषित करता, जो भाजपा में वापस लौटने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। इस बेटे ने पिता के अपहरण की रिपोर्ट लिखाई और कुछ घंटे बाद ही मुकुल ने दिल्ली में बता दिया कि वह अपने मन से दिल्ली आए हैं और वापस भाजपा का दामन थामेंगे। वैसे ये दोनों बाप-बेटे अभी भाजपा विधायक ही हैं, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष की कृपा से काम तृणमूल का करते आ रहे हैं। ममता की पुलिस की मुस्तैदी ऐसी कि वह मुकुल राय को खोजने दिल्ली तक पहुंच गई।  

इस चरम कोलाहल-कलह में भटक रहे पश्चिम बंगाल के 10 करोड़ लोगों को उस सुबह का इंतजार है, जिसमें कानून का शासन हो और जहां सरकार, प्रशासन और संसाधनों पर सिर्फ पार्टी कैडरों का नहीं, बल्कि सबका हक हो।

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