फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   knowledge is not perceived age

ज्ञानी की आयु नहीं देखी जाती

Wed, 22 May 2013 09:58 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Wed, 22 May 2013 09:58 PM IST
विज्ञापन
knowledge is not perceived age

एक क्षेत्र में अनेक वर्षों से बारिश नहीं हो रही थी। वहां अकाल पड़ गया। लोग भूखे मरने लगे और उस क्षेत्र को छोड़कर अन्यत्र जाने लगे। युवा मुनि सारस्वत सरस्वती नदी के अनन्य आराधक थे।

विज्ञापन


उन्होंने प्रार्थना की कि अकाल पीड़ितों को संकट से उबारने के लिए कुछ कीजिए। सरस्वती ने कहा, तुम निश्चिंत होकर मेरे तट पर वेदों का स्वाध्याय करो। मैं संकट हरने का प्रयास करूंगी।
विज्ञापन


सारस्वत मुनि ने तट को वेदों की पवित्र ऋचाओं से गुंजायमान कर दिया। सरस्वती नदी ने खेत-खलिहानों को जल से सराबोर कर दिया। खूब अनाज-फल पैदा होने लगे।

आस-पास के ऋषियों को पता चल गया कि मुनि सारस्वत के वेदों के स्वाध्याय और तप के कारण अकाल दूर हुआ है। वे सारस्वत मुनि के दर्शन के लिए पहुंचे और उनसे विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की कि उन्हें वेदों का अध्ययन कराने की कृपा करें।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऋषि आयु में मुनि से बड़े थे, जबकि सारस्वत किशोर। मुनि ने कहा, मैं धर्मशास्त्रों के नियमानुसार केवल शिष्यों को ही अध्ययन कराता हूं। मैंने संकल्प लिया है कि केवल शिष्यों को ही अध्ययन कराऊंगा। मैं अपना संकल्प तोड़कर अधर्म का पाप क्यों मोल लूं?


एक वृद्ध ऋषि ने कहा, ज्ञानी और तपस्वी की आयु नहीं देखी जाती। जो अधिक ज्ञानी होता है, वह कम आयु का होने पर भी गुरु समान होता है। और इस तरह ऋषियों ने शिष्य बनकर उनसे वेदों का अध्ययन किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed