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तू जिंदा क्यों नहीं है?
कमलेश भट्ट कमल
Updated Sat, 10 Jan 2015 11:33 PM IST
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कोई पक्का इरादा क्यों नहीं है
तुझे खुद पर भरोसा क्यों नहीं है?
बने हैं पांव चलने के लिए ही
तू उन पांवों से चलता क्यों नहीं है?
बहुत संतुष्ट है हालात से क्यों
तेरे भीतर भी गुुस्सा क्यों नहीं है?
तू झूठों की तरफदारी में शामिल
तुझे होना था सच्चा, क्यों नहीं है?
मिली है खुदकुशी से किसको जन्नत
तू इतना भी समझता क्यों नहीं है?
सभी का अपना है यह मुल्क आखिर
सभी को इसकी चिन्ता क्यों नहीं है?
गरीबों की भी ये धरती है, इसमें
गरीबों का ही हिस्सा क्यों नहीं है?
किताबों में बहुत अच्छा लिखा है
लिखे को कोई पढ़ता क्यों नहीं है?
उन्हें मारा है बेकारी ने तिल- तिल
बताओ तो ये हिंसा क्यों नहीं है?
वहां हैं डिग्रियां ही डिग्रियां बस
वहां शिक्षा में शिक्षा क्यों नहीं है?
लहू रिश्तों का पानी हो गया है
लहू रिश्तों का गाढ़ा क्यों नहीं है?
तू बाहर से तो जिंदा लग रहा है
तू भीतर से भी जिंदा क्यों नहीं है?