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पुरुषवर्चस्व को तोड़ती खुफिया एजेंट
अभिषेक सक्सेना
Updated Fri, 29 Mar 2013 11:04 PM IST
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बचपन से ही यात्राओं की शौकीन और कार्टूनों के भेष में डिज्नी परेडों में हिस्सा लेने वाली जूलिया पियर्सन ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन वह महाशक्ति देश अमेरिका की खुफिया सेवा (यूएसएसएस) की कमान संभालेंगी। इतना ही नहीं, खुद ओबामा की बातों पर यकीन करें, तो उनके जीवन पर मिशेल ओबामा के अलावा सर्वाधिक नियंत्रण जूलिया पियर्सन का ही होगा।
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संयुक्त राज्य खुफिया सेवा के 148 वर्षों के इतिहास में इसकी बागडोर संभालने वाली वह पहली महिला बन गई हैं। 53 वर्षीय इस वरिष्ठ खुफिया एजेंट पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित उनके परिजनों, वहां के उपराष्ट्रपति एवं वाशिंगटन की कुछ गणमान्य हस्तियों एवं विदेशी अतिथियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होगी।
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लीक से हटकर काम करने और कुछ अनूठा कर गुजरने का जज्बा जूलिया में शुरू से ही रहा है। सेंट्रल फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी से स्नातक करने वाली जूलिया पियर्सन ने अपने करियर की शुरुआत ओरलेंडो में एक पुलिस अधिकारी के रूप में की थी। अपने जुझारू व्यक्तित्व का पहला परिचय तो उन्होंने तभी दे दिया था, जब 1983 में मियामी में पुरुषवर्चस्व वाली सीक्रेट सर्विस को जॉइन किया था। यह उनकी कार्यकुशलता ही थी कि उन्होंने चीफ ऑफ स्टाफ बनने तक सीक्रेट सर्विस से जुड़े लगभग हर पद पर काम किया।
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अगर उनके सहकर्मियों की मानें, तो जूलिया सीक्रेट सर्विस के काम से जुड़ी तमाम बारीकियों को समझती हैं। शायद यही वजह है कि वह चाहे किसी भी भूमिका में हों, अपना सर्वश्रेष्ठ कब और कैसे देना है, इसे बखूबी जानती हैं। उनकी क्षमताओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन्हें असाधारण प्रतिभा का धनी बताते हुए अपने काम के प्रति उनकी गंभीरता और प्रतिबद्धता की सराहना की है।
हालांकि उनके कुछ आलोचकों का कहना है कि नई भूमिका में पियर्सन को खुद को साबित करना अभी बाकी है। और यह तभी होगा, जब वह कुछ समय पहले कोलंबिया में सीक्रेट सर्विस एजेंटों के वेश्याओं से संबंध रखने और राष्ट्रपति ओबामा की सुरक्षा में ढिलाई बरतने के आरोपों के चलते विभाग पर लगी कालिख को साफ कर सकेंगी। अमेरिकी लोगों को उम्मीद है कि जूलिया खुफिया सेवा के क्षेत्र में पुरुषवर्चस्व को खत्म करने के साथ ही देश की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से भी बखूबी निपटेंगी।