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डॉन को पकड़ना नामुमकिन है
शरद उपाध्याय
Updated Tue, 12 May 2015 08:21 PM IST
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भारतीय फिल्म पुराण के अनुसार डॉन अमर है। उसे न कोई शस्त्र मार सकता, और न कोई गोली उसके शरीर को भेद सकती है। डॉन अनाहार्य है, यानी उसे पकड़ा भी नहीं जा सकता। इस पुराण के अध्ययन के बाद लगता है कि यह ज्ञान दाऊद भाई के जीवन चरित्र का पाठ करने के बाद ही प्राप्त हुआ होगा। दाऊद भाई भी अमर हैं, उन्हें कोई गिरफ्तार नहीं कर सकता। भारतीय पुलिस को लगता है कि बस अब वह दाऊद तक पहुंच गई है। उसे विश्वास हो जाता है कि बस वह शरीर की तरह उनके बंधन में बंधने ही वाला है। मगर वह आत्मा की तरह भारतीय पुलिस के घेरे से निकल जाता है।
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फिल्म पुराण में यह भी कहा गया है कि डॉन के पीछे ग्यारह मुल्कों की पुलिस पड़ी हुई है। जिस तरह पीछे पड़े रहना शाश्वत सत्य है, उसी तरह न पकड़ा जाना भी एक अकाट्य सत्य है। डॉन एक व्यवस्था है, जिसे कोई भी कानूनी धारा भिगो नहीं सकती। उसके अनेक रूप हैं। भारतीय पुलिस उसे अनेकांतवाद से जानने की कोशिश करती है। भारतीय पुलिस का आंशिक ज्ञान उसके एक रूप को ही जान पाता है। कभी वह मीडिया की सूंड पकड़कर कहती है कि दाऊद पाकिस्तान में है, कभी वह सीबीआई से ज्ञान प्राप्त कर कहती है कि वह दुबई में है। कभी उसके निजी स्रोत फुसफुसा जाते हैं कि डॉन फलां जगह पर है। मगर अनेकांतवाद के ज्ञान के पश्चात वह सार के रूप में बयान दे देती है कि उसे दाऊद के शाश्वत रूप का ज्ञान नहीं है। जिस पते को वह प्रत्यक्ष प्रमाण मानकर मुग्ध हो रही थी, वह अनुमान का प्रमाण है, जिसे सत्य नहीं मान सकते।
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किंतु अब हम क्या करें? हम अज्ञानी कुछ कर ही नहीं सकते। कलियुगी ज्ञानधारा यही कहती है कि जब-जब धरा पर पाप बढ़ते हैं, तो दाऊदी अवतारों का जन्म होता है। हमारे हाथ में है ही क्या? बस इन्हीं दाऊदों व डॉनों के समक्ष खुद को अर्पित कर देते हैं। यही सबसे उत्तम सहारा है। आजकल हमें तो यही जीवन मुक्ति का सरल और सच्चा मार्ग लगने लगा है, और करें भी क्या। यही सच्चा ज्ञान है।
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