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अमेरिकी चुनाव में भारतीयों की दमदार हाजिरी

Sun, 23 Aug 2020 04:14 AM IST
rajesh badal राजेश बादल
Updated Sun, 23 Aug 2020 04:14 AM IST
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Indians strong presence in US presidential election
अमेरिका-भारत - फोटो : pixabay

जैसे-जैसे अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की तारीखें करीब आती जा रही हैं, दोनों बड़ी पार्टियां अपने-अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने और दूसरे के मतों में सेंध लगाने का कोई अवसर नहीं छोड़ रही हैं। अब तक के पूर्वानुमानों में फिलहाल डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बिडेन रिपब्लिक उम्मीदवार और मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं। पर इन अनुमानों पर भरोसा करना ठीक नहीं होगा।


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चार साल पहले हिलेरी क्लिंटन भी पूर्वानुमानों में बढ़त बनाए रहीं, पर परिणाम ट्रंप के पक्ष में आया। इन चार साल के दौरान अमेरिकी सियासत में भारत और भारतीय महत्वपूर्ण भूमिका में उभरे हैं। दोनों ही पक्ष भारतवंशियों को लुभाने का अवसर नहीं छोड़ रहे। वैसे अधिकतर अमेरिकी भारतीयों की पहली पसंद डेमोक्रेटिक पार्टी है, क्योंकि यह पार्टी अश्वेतों, अल्पसंख्यकों और भारतीय मूल के लोगों का ख्याल रखने का दावा करती रही है। पर हाल ही में इस पार्टी के प्रत्याशी जो बिडेन से एक चूक हो गई। अब वह इसकी भरपाई में जुटे हैं।

दरअसल जो बिडेन ने अपने प्रचार अभियान के दौरान अमेरिकी मुस्लिमों के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था। उसमें भारतीय कश्मीर नीति की आलोचना कर उन्होंने भारतीय मूल के अधिकांश मतदाताओं को नाराज कर दिया। बिडेन ने कहा था कि भारत सरकार ऐसे सभी कदम उठाए, जिससे कश्मीरियों के अधिकार बहाल हो सकें। उन्होंने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध पर पाबंदी, इंटरनेट बंद करने और अन्य पाबंदियां लगाने जैसे फैसलों से गणतंत्र कमजोर होता है। बिडेन यहीं नहीं रुके।

उन्होंने असम में एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भी निराशा का इजहार किया था। उनकी राय थी कि भारत सरकार का इस सीमांत प्रदेश के बारे में लिया गया फैसला मुल्क की धर्मनिरपेक्ष परंपरा और संविधान के अनुरूप नहीं है।

बाद में डेमोक्रेटिक पार्टी को शायद अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कमला हैरिस को अपना उपराष्ट्रपति चुनकर भारतीयों की चोट पर मरहम लगाने का प्रयास किया। पहले राष्ट्रपति की उम्मीदवारी की दौड़ में भारतीय मूल की दो महिलाएं तुलसी गेबार्ड और कमला हेरिस शामिल थीं। पर इस दल के कूटनीतिक शिल्पकार बराक ओबामा ने अमेरिकी सोच को परखा कि वह मुल्क के इस शिखर पद पर किसी महिला के चुनाव में परहेज करती है।

ऐसे में, बिडेन सामने आए। जब बिडेन ने कमला हैरिस को दूसरे शिखर पद के लिए चुना, तो उनके समर्थन में कहा था, 'मुझे ऐसे शख्स का साथ चाहिए, जो स्मार्ट हो, कड़ी मेहनत करे और नेतृत्व के लिए तैयार रहे। कमला ऐसी ही शख्सीयत हैं।' पर यह दांव बहुत कारगर नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कमला हैरिस खुद भी हिंदुस्तान की मौजूदा कश्मीर नीति की अनेक बार सार्वजनिक तौर पर आलोचना कर चुकी हैं।

इस आधार पर साफ-सुथरी छवि और कुशल प्रशासक होते हुए भी कमला को भारतीयों का व्यापक समर्थन न मिलने की बात कही जा रही है। इसके बाद बिडेन ने भारतीय हिंदुओं के लिए भी अलग से एक विजन डॉक्यूमेंट जारी किया, जिसमें पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए कहा गया कि भारत में सीमा पार से आतंकवादी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीयों को कमला हैरिस और उन पर भरोसा रखना चाहिए। अमेरिका में आर्थिक सुधारों में भारतीयों की भूमिका बेहद खास है।

जो बिडेन ने भारतीय स्वतंत्रता दिवस के दिन भी कमला हैरिस के साथ संयुक्त वीडियो संदेश जारी कर कहा कि भारत के लोग अमेरिका की सहायता से देश को आगे ले जा सकते हैं। उन्होंने वादा किया कि भारत सीमाओं पर जिन खतरों का सामना कर रहा है, उनसे निपटने में उनके जीतने पर अमेरिका हरदम भारत के साथ खड़ा रहेगा।

ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी की त्रुटि को भुनाने में कोई संकोच नहीं किया। न्यूयॉर्क पुलिस के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जो बिडेन और कमला हैरिस को लगता है कि भारतीय उनके साथ हैं, पर यह सच नहीं है। ट्रंप भारतवंशी मतदाताओं के इलाके में ह्यूस्टन रैली को याद करना नहीं भूलते।

हालांकि अनेक अवसरों पर भारत के प्रति उनका रवैया बेरुखी भरा रहा है। ट्रंप के खिलाफ एक बात यह भी है कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोग रिपब्लिकन पार्टी से उसके रंगभेदी व्यवहार के चलते दूरी बनाकर रखते हैं। हालांकि ट्रंप जब से राष्ट्रपति बने हैं, भारतवंशियों के वोट बैंक को लुभाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। अमेरिका में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग आज भी मेलजोल से रहते हैं।

यह सही है कि कश्मीर के मामले में जो बिडेन ने गलती की है, पर भारतवंशियों के लिए उनका विजन डॉक्यूमेंट निश्चित रूप से इसकी भरपाई करता है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने भारत के सभी धर्मों के लोगों की सुरक्षा, नौकरीपेशा लोगों को परिवार रखने की छूट देने, चीन के खिलाफ साथ आने, नौकरियों के लिए वीजा संख्या बढ़ाने. भारत के शोध छात्रों पर लगी रोक हटाने और नस्ली भेदभाव रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का वादा किया है।

एक पढ़े-लिखे देश का राष्ट्रपति बनने के लिए निर्णायक वोटों का समर्थन मिल जाए, तो बिडेन को और क्या चाहिए। वह इस बार पदेन राष्ट्रपति को पराजित कर इतिहास रच सकते हैं। पर अभी उन्हें भारत के और निकट आने की आवश्यकता है।

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