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निवेश की पसंदीदा जगह बनता भारत
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विदेशी निवेश (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
कोविड-19 की चुनौतियों के बीच भी भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (अंकटाड) द्वारा प्रकाशित वैश्विक निवेश रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2019 में सबसे अधिक एफडीआई आकर्षित करने वाले देशों की सूची में नौवें स्थान पर है।
2018 में भारत 12वें स्थान पर था। इस साल भी भारत अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने वाला देश दिखाई दे रहा है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, वर्ष 2019-20 में रिकॉर्ड 49.97 अरब डॉलर का एफडीआई आया। यह पिछले साल की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक और विगत चार वित्त वर्ष की तुलना में एफडीआई की सबसे तेज वृद्धि है।
एफडीआई बढ़ने के साथ एफडीआई वाले क्षेत्रों का भी विस्तार होता गया है। 2019-20 में सेवा क्षेत्र में सर्वाधिक 7.85 अरब डॉलर का एफडीआई आया। ऐसे ही कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में 7.67 अरब डॉलर, व्यापार क्षेत्र में 4.57 अरब डॉलर, दूरसंचार क्षेत्र में 4.44 अरब डॉलर, वाहन क्षेत्र में 2.82 अरब डॉलर, निर्माण क्षेत्र में दो अरब डॉलर और रसायन क्षेत्र में एक अरब डॉलर का एफडीआई प्रमुख है। इस दौरान सिंगापुर से सर्वाधिक 14.67 अरब डॉलर का एफडीआई आया। लगातार दूसरे साल देश में सर्वाधिक एफडीआई सिंगापुर के रास्ते से आया है।
देश में एफडीआई प्रवाह की तस्वीर में पांच प्रमुख बातें उभरकर दिखाई दे रही हैं। एक, सिंगापुर से एफडीआई का प्रवाह सर्वोच्च क्रम पर बना हुआ है। दो, भारत और मॉरीशस के बीच दोहरे कर से बचने संबंधी संधि में संशोधन के बाद वहां से एफडीआई घटा है। तीन, एफडीआई का प्रवाह लक्जमबर्ग, केमैन द्वीप और आयरलैंड के रास्ते भारत की ओर बढ़ रहा है। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स नियमों में सरलता के कारण आकर्षक वित्तीय बाजार है।
चार, भारत में चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पिछले तीन वर्षों से लगातार घट रहा है। पांच, अमेरिका से भारत में एफडीआई बढ़ता जा रहा है। इस वर्ष की शुरुआत से अब तक अमेरिकी टेक कंपनियां भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि तथा रिटेल सेक्टर के ई-कॉमर्स बाजार की चमकीली संभावनाओं को मुठ्ठियों में करने के लिए करीब 17 अरब डॉलर के निवेश के साथ आगे बढ़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि विगत 22 जुलाई को अमेरिका-भारत बिजनेस काउंसिल की इंडिया आयडियाज समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अमेरिका से भारत में एफडीआई की नई संभावनाएं निर्मित हुई हैं। प्रसिद्ध जापानी फाइनेंशियल रेटिंग एजेंसी नोमुरा ने 'कोविड-19 के बाद की दुनिया' शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा है कि चीन के प्रति दुनिया की नकारात्मकता की वजह से भारत को विदेशी निवेश में प्राथमिकता मिलेगी।
सरकार ने पिछले पांच साल में एफडीआई बढ़ाने और अधिक टिकाऊ तरीके से विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए हैं। सरकार ने अनेक क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी है, साथ ही, रक्षा, निर्माण क्षेत्र के विकास, बीमा, बिजली क्षेत्र, बुनियादी ढांचा, पेंशन, अन्य वित्तीय सेवाओं, प्रसारण, नागरिक उड्डयन, फार्मास्यूटिकल्स, ट्रेडिंग जैसे कई क्षेत्रों में एफडीआई संबंधी नीतिगत सुधार लागू किए हैं।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति के तहत देश में कारोबार को गति देने के लिए कई सुधार किए गए हैं। उत्पादकों और श्रमिकों के हितों को देखते हुए श्रम कानूनों में संशोधन किए गए हैं। निवेश और विनिवेश के नियमों में परिवर्तन भी किए गए हैं। कॉरपोरेट कर में भारी कमी की गई हैं। जीएसटी से बड़ा टैक्स रिफॉर्म किया गया है। प्रवासी भारतीयों को घरेलू निवेशक के रूप में अनुमति दिए जाने से भारत एफडीआई के लिए और अधिक आकर्षक जगह बन गया है।
यद्यपि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की विकास दर सकारात्मक रहने की संभावना कम है। लेकिन आगामी वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने की संभावना के कारण विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बना हुआ है। उम्मीद करनी चाहिए कि देश में एफडीआई प्रवाह की संभावनाओं को चमकीला बनाने के लिए सरकार फिर एफडीआई नीति की समग्र समीक्षा करेगी।
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2018 में भारत 12वें स्थान पर था। इस साल भी भारत अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने वाला देश दिखाई दे रहा है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, वर्ष 2019-20 में रिकॉर्ड 49.97 अरब डॉलर का एफडीआई आया। यह पिछले साल की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक और विगत चार वित्त वर्ष की तुलना में एफडीआई की सबसे तेज वृद्धि है।
एफडीआई बढ़ने के साथ एफडीआई वाले क्षेत्रों का भी विस्तार होता गया है। 2019-20 में सेवा क्षेत्र में सर्वाधिक 7.85 अरब डॉलर का एफडीआई आया। ऐसे ही कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में 7.67 अरब डॉलर, व्यापार क्षेत्र में 4.57 अरब डॉलर, दूरसंचार क्षेत्र में 4.44 अरब डॉलर, वाहन क्षेत्र में 2.82 अरब डॉलर, निर्माण क्षेत्र में दो अरब डॉलर और रसायन क्षेत्र में एक अरब डॉलर का एफडीआई प्रमुख है। इस दौरान सिंगापुर से सर्वाधिक 14.67 अरब डॉलर का एफडीआई आया। लगातार दूसरे साल देश में सर्वाधिक एफडीआई सिंगापुर के रास्ते से आया है।
देश में एफडीआई प्रवाह की तस्वीर में पांच प्रमुख बातें उभरकर दिखाई दे रही हैं। एक, सिंगापुर से एफडीआई का प्रवाह सर्वोच्च क्रम पर बना हुआ है। दो, भारत और मॉरीशस के बीच दोहरे कर से बचने संबंधी संधि में संशोधन के बाद वहां से एफडीआई घटा है। तीन, एफडीआई का प्रवाह लक्जमबर्ग, केमैन द्वीप और आयरलैंड के रास्ते भारत की ओर बढ़ रहा है। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स नियमों में सरलता के कारण आकर्षक वित्तीय बाजार है।
चार, भारत में चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पिछले तीन वर्षों से लगातार घट रहा है। पांच, अमेरिका से भारत में एफडीआई बढ़ता जा रहा है। इस वर्ष की शुरुआत से अब तक अमेरिकी टेक कंपनियां भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि तथा रिटेल सेक्टर के ई-कॉमर्स बाजार की चमकीली संभावनाओं को मुठ्ठियों में करने के लिए करीब 17 अरब डॉलर के निवेश के साथ आगे बढ़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि विगत 22 जुलाई को अमेरिका-भारत बिजनेस काउंसिल की इंडिया आयडियाज समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अमेरिका से भारत में एफडीआई की नई संभावनाएं निर्मित हुई हैं। प्रसिद्ध जापानी फाइनेंशियल रेटिंग एजेंसी नोमुरा ने 'कोविड-19 के बाद की दुनिया' शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा है कि चीन के प्रति दुनिया की नकारात्मकता की वजह से भारत को विदेशी निवेश में प्राथमिकता मिलेगी।
सरकार ने पिछले पांच साल में एफडीआई बढ़ाने और अधिक टिकाऊ तरीके से विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए हैं। सरकार ने अनेक क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी है, साथ ही, रक्षा, निर्माण क्षेत्र के विकास, बीमा, बिजली क्षेत्र, बुनियादी ढांचा, पेंशन, अन्य वित्तीय सेवाओं, प्रसारण, नागरिक उड्डयन, फार्मास्यूटिकल्स, ट्रेडिंग जैसे कई क्षेत्रों में एफडीआई संबंधी नीतिगत सुधार लागू किए हैं।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति के तहत देश में कारोबार को गति देने के लिए कई सुधार किए गए हैं। उत्पादकों और श्रमिकों के हितों को देखते हुए श्रम कानूनों में संशोधन किए गए हैं। निवेश और विनिवेश के नियमों में परिवर्तन भी किए गए हैं। कॉरपोरेट कर में भारी कमी की गई हैं। जीएसटी से बड़ा टैक्स रिफॉर्म किया गया है। प्रवासी भारतीयों को घरेलू निवेशक के रूप में अनुमति दिए जाने से भारत एफडीआई के लिए और अधिक आकर्षक जगह बन गया है।
यद्यपि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की विकास दर सकारात्मक रहने की संभावना कम है। लेकिन आगामी वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने की संभावना के कारण विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बना हुआ है। उम्मीद करनी चाहिए कि देश में एफडीआई प्रवाह की संभावनाओं को चमकीला बनाने के लिए सरकार फिर एफडीआई नीति की समग्र समीक्षा करेगी।