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असंभव अनुवाद

Sat, 21 Feb 2015 09:46 PM IST
परिचय दास
परिचय दास Updated Sat, 21 Feb 2015 09:46 PM IST
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impossible translation.

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प्रेम का अनुवाद नहीं हो सकता किसी भाषा में
न बच्चे की तुतलाहट का
न इतराते फूल की कमनीयता का
झरती पत्तियों के आख्यान का
अनुवाद नहीं हो सकता
न घनी छाया का
कंप्यूटर में कंपोज नहीं हो सकती
आंखों में झलकती करुणा
शब्दों में बयान नहीं हो सकता
जीवन भर का मर्मांतक दुख
अहैतुक !


आत्मा के शिल्प में
मंैने जितनी बार तुम्हारी ओर देखा
लगा : और पवित्र हो रहा हूं
अंतर्मन से
खीचती हैं तुम्हारी आंखें
मेरी विकलता के मीठे मर्म को
पृथ्वीमय हो जाती हैं मेरी सांसें
ऋतुओं के विविध रंगों से रची-बसी
तुम्हारी सांसों के युगपत् समीकरण में
आकाश घूमता है मेरे हृदय में
बादलों के रंग-संग
भीग जाता हूं रस से : जल से
आप्लावित होता हूं तुम्हारी रूपाकृति में
आत्मा के शिल्प में
निमज्जित करता हूं स्वयं को
चिर अवगाहन रूप में ... भाषा में.... शब्द में


तुम सयानी
बहती है हवा फागुन की
पेड़-पौधों में निकलते हैं पत्ते
नये-नये
तुम्हें देख कर हो जाता मेरा हृदय विकल !
तुम सयानी ! !

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