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वर्तमान पूछ रहा है, डिजिटल मेमोरी कब तक रहेगी संस्कृति की साक्षी
नई दिल्ली
Updated Sat, 06 Apr 2013 11:33 PM IST
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पिछली कई सदियों के दौरान ब्रिटेन में प्रकाशित किताबों, पैम्फलेट्स, पत्रिकाओं और अखबारों की एक-एक प्रति लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में मौजूद है। किताबों की उम्र कागज की जिंदगी से जुड़ी है, ऐसे में लोगों को लगता था कि वेब पर शब्द सदियों तक सुरक्षित रहेंगे, लेकिन असल में ऐसा है नहीं।
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वेब की दुनिया में कुछ भी बहुत दिनों तक नहीं ठहरता। एक वेबपेज की उम्र औसतन 75 दिन होती है। इसका मतलब यह नहीं कि पेज का अस्तित्व खत्म हो जाता है, बल्कि ये है कि इसके बाद या तो इसे आर्काइव कर दिया जाता है या इसका यूआरएल बदल दिया जाता है। इसे विशेषज्ञ डिजिटल ब्लैक होल कहते हैं।
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लंदन बम धमाके या 2008 की आर्थिक मंदी जैसी घटनाओं की जानकारी पहले ही डिजिटल ब्लैक होल में जा चुकी है। अगर अब भी इस डिजिटल सामग्री को सहेजने का काम शुरू नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए 21वीं सदी एक पहेली बन जाएगी। इस चिंता को ध्यान में रखते हुए अब ब्रिटेन में वेब सामग्री को बचाने की कवायद तेज हो गई है।
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लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में ऑपरेशन ‘कैप्चर द डिजिटल यूनिवर्स’ नामक प्रोजेक्ट पिछले 10 सालों से जारी है। 2003 के लीगल डिपाजिट लाइब्रेरी एक्ट के तहत वेब सामग्री को सुरक्षित रखने की यह मुहिम शुरू हुई थी। लेकिन कॉपीराइटधारकों के विरोध की वजह से यह काम अब तक पूरा नहीं किया जा सका था।
इस समस्या को खत्म करते हुए अब नया कानून बना दिया गया है। यह कानून कल से ही लागू किया गया है। इसके तहत ऑक्सफोर्ड की बोडलेइन लाइब्रेरी से लेकर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ स्कॉटलैंड, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ वेल्स और डबलिन की ट्रीनिटी कॉलेज लाइब्रेरी तक इन सभी लाइब्रेरियों के पास ब्रिटेन के इलेक्ट्रॉनिक पब्लिकेशन की एक-एक प्रति प्राप्त करने का अधिकार होगा।
इस प्रोजेक्ट की प्रमुख लूसी बारगेस की मानें तो यह अनोखी मुहिम आने वाले समय के लोगों को 21वीं सदी की जिंदगी का एक आशुचित्र उपलब्ध करवाएगी। यह ऑपरेशन 4.8 मिलियन वेबसाइट्स के ऑटोमेटिक वेब हारवेस्ट के साथ शुरू किया जाएगा।
इस ऑपरेशन के तहत ब्रिटिश लाइब्रेरी को अरबों वेब पेज, ब्लॉग और ई-बुक्स की दुनिया में दाखिल होना होगा, ताकि देश की डिजिटल यादों को हमेशा के लिए सहेजा जा सके। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध किसी भी व्यक्ति, कंपनी या संस्था के ट्वीट्स को संरक्षण में शामिल किया जा सकता है। लाइब्रेरी ने इस सामग्री को इस साल के अंत तक सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।