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हवाएं
रामकुमार आत्रेय
Updated Sat, 31 Jan 2015 09:00 PM IST
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स्वयं साथ नहीं देंगी
किसी का
लेकिन जो कोई भी
साथ चलता है हवाओं के
उन्हें पहुंचा देती हैं वे
कहीं से कहीं
ऐसे लोग दर्ज करवा लेते हैं
इतिहास में अपना नाम
लेकिन उस इतिहास को, इतिहास में
दिशाहीनों का इतिहास कहा जाता है।
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हवाएं जानती हैं
हवाएं जानती हैं
बहुत अच्छी तरह से
कि उनका रूख मोड़ने की ताकत
सिर्फ उस छाती को छोड़कर
किसी में नहीं है
जो खोलकर कमीज के बटन
तानकर खुद को खड़ी हो जाती है
उसके सामने
पसलियां तुड़वाकर भी
पीछे नहीं हटने का संकल्प लिए हुए।
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जोश
उसने जोश में आकर उठा लिया था झंडा
झंडा कुछ देर तक फहराता रहा
लोगों को अच्छा भी लगा
उसकी प्रशंसा भी हुई।
कुछ देर बाद
ऐसा भी समय आया
कि तेज हवाओं का एक तेज झोंका,
फुंफकारता हुआ आया,
और उखाड़ ले गया झंडे को
अब झंडे का कोई अता-पता नहीं था
कि वह कहां है?
अस्पताल में है, जहां चल रहा है
उसकी टूटी हड्डियों का इलाज।