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वायदों के साथ अर्थव्यवस्था को गति देनी होगी

Tue, 17 Jun 2014 11:46 AM IST
जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 17 Jun 2014 11:46 AM IST
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Have to give pace to economy with fulfill promise

इन दिनों वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट के लिए विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे हैं। चूंकि यह बजट नई सरकार की आर्थिक नीति संबंधी दस्तावेज होगा, इसलिए इसमें रणनीतिक कदम उठाए जाने होंगे। यह भाजपा के चुनावी वायदे-रोजगार के नए मौके, महंगाई घटाने के प्रयासों के साथ-साथ व्यापक आर्थिक नीति दर्शाने वाला पहला दस्तावेज होगा। इसमें निवेश और घरेलू आय बढ़ाने के साथ अर्थव्यवस्था को गति देनी होगी।

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पिछली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण नई सरकार के सामने कई वित्तीय परेशानियां मुंह बाए खड़ी हैं। वर्ष 2008-09 से 2013-14 तक के बजटों में राजकोषीय अनुशासन पर ध्यान कम रहा। इससे राजकोष की हालत खराब हुई। रिजर्व बैंक के साथ मिलकर कदम नहीं बढ़ाने से महंगाई पर नियंत्रण नहीं हो सका। विदेशी निवेशकों के बीच विश्वसनीयता बहाल न हो पाने से विदेशी निवेश घटते गए। पिछले 25 वर्षों में पहली बार लगातार दो वर्ष विकास दर पांच फीसदी से कम रही।
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यद्यपि पिछले वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा लक्ष्य के नजदीक रहा। पर अल्पावधि उपायों से मिली यह राहत दिखावटी ही सिद्ध हुई। यूपीए सरकार ने सोने के आयात पर प्रतिबंध लगाकर इस घाटे को थाम लिया। इससे सोने का आयात नियंत्रित तो हुआ, पर सोने की तस्करी और इसके अवैध कारोबार की एक काली अर्थव्यवस्था विकसित हो गई। पिछले दो साल से राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने के प्रयासों के कारण उत्पादक खर्च कम हुए हैं, जिसका असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ रहा है। सरकार को तेल और उर्वरक सब्सिडी के मामले में बकाया भुगतान भी करना है।
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बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी मुहैया कराने की चिंता भी वित्त मंत्री के सामने है। ढांचागत बुनियादी क्षेत्र की बंद बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाना जरूरी हो गया है। बैंकों के लिए पूंजीकरण की बेसल तीन जरूरतें पूरी करना अनिवार्य हो चला है। राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन अधिनियम-2003 के तहत राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के दो फीसदी तक सीमित रखने का प्रयास करना होगा। अगले दो-तीन वर्षों में सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना तैयार करनी होगी। कराधान प्रणाली में सुधार के साथ राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी के लिए स्पष्ट कार्ययोजना की भी जरूरत है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) को लागू करने की दिशा में त्वरित कदम उठाने होंगे।


सरकार को सामाजिक विकास योजनाओं एवं विभिन्न प्रकार के निवेश की जरूरत पूरी करने के लिए अधिक धन जुटाने की जरूरत है। बजट में किसानों के हितों पर तो ध्यान देना ही होगा, चालू वित्त वर्ष में संभावित अल नीनो का अधिक प्रतिकूल असर कृषि उत्पादन पर न पड़े, इसके लिए भी प्रयत्न करने होंगे। हमारी अर्थव्यवस्था चूंकि कम आय वाली ऐसी अर्थव्यवस्था है, जहां युवाओं को भारी संख्या में रोजगार चाहिए, इसलिए युवाओं के कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा। देखना है, नए वित्त मंत्री बजट से आम आदमी, बाजार, उद्योग, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वैश्विक रेटिंग एजेंसियों का कितना भरोसा बहाल कर पाएंगे।

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