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गाथा वीर नारियों की

Sat, 23 Aug 2014 07:31 PM IST
कल्लोल चक्रवर्ती/अमर उजाला, दिल्ली
कल्लोल चक्रवर्ती/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 23 Aug 2014 07:31 PM IST
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gatha veer nariyon ki book

देश के लिए शहीद होने वाले लोगों को याद रखने के लिए, उन्हें सम्मान देने के लिए यह किताब ‘गाथा वीर नारियों की’ एक सराहनीय पहल है, जिसमें आगरा और उसके आसपास रह रहे शहीदों के परिवारों पर नजर डाली गई है। सरसरी तौर पर देखते हुए इन शहीद परिवारों की कहानियां कमोबेश एक जैसी लगती हैं। पर ऐसा है नहीं।

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शहीदों की विधवाओं में कुछ को ससुराल का साथ मिला, तो कई जगह सास-ससुर ने विधवा बहू को बेटी जैसा प्यार दिया। पर ऐसे किस्से कम हैं। क्यारी की मदर इंडिया शांति देवी की जमीन पर देवर-जेठ की नजर थी, तो राधा को उसके ससुराल वालों ने पति की तेरहवीं के दिन ससुराल से निकाल दिया।
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बादामश्री और मीरा जैसी कई विधवाएं हैं, जिन्हें कहीं से कुछ न मिला। कई बार समाज ने शहीदों को नजरअंदाज किया, कई बार घर के अपनों ने, तो कई बार सरकारी तंत्र ने।
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शहीदों की ये कहानियां 'अमर उजाला' में पिछले साल पांच जुलाई से 15 अगस्त तक सिलसिलेवार छपी थीं, जिन्हें अब किताब की शक्ल दी गई है। इसे पढ़ते हुए हम त्याग और बलिदान की गाथा से साझा करते हैं।

गाथा वीर नारियों की, लेखिका-रैना पालीवाल
संपादक-राजेंद्र त्रिपाठी
अमर उजाला पब्लिकेशन लिमिटेड, आगरा

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