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बंगाल की आग और ममता

Wed, 12 Jul 2017 02:25 PM IST
जितेंद्र पांडेय
जितेंद्र पांडेय Updated Wed, 12 Jul 2017 02:25 PM IST
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Fire of Bengal and Mamta
जितेंद्र पांडेय

अभी दार्जिंलिंग की आग बुझी भी नहीं थी कि दक्षिण बंगाल में उत्तर चौबीस परगना जिले के बशीरहाट-बादुरिया का इलाका सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलसने लगा। सोशल मीडिया पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट जारी करने के बाद वहां हिंसा भड़क उठी। यह भी साफ दिखाई पड़ा कि हिंसा फैलाने वाले ज्यादातर लोग बाहरी थे। बंगाल में राजनीतिक हिंसा का यह स्वरूप पुराना है।

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वाम मोर्चे के दौर में भी बाहरी लठैतों और गुंडों का राज चलता था। बशीरहाट में अगर स्थानीय लोगों ने संयम का परिचय न दिया होता, तो हालत और भयावह हो सकती थी। राज्य की ममता सरकार बशीरहाट की हिंसा पर समय रहते अंकुश नहीं लगा पाई। भाजपा ने इस मामले में जैसी सक्रियता दिखाई, उस पर बहुत आश्चर्य नहीं है। पूर्वोत्तर के बाद पश्चिम बंगाल और बिहार उसकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं। चूंकि राज्य में अगले साल पंचायत चुनाव होने वाले हैं, इसलिए भी हिंसा की आग पर राजनीति की रोटी सेंकी जा रही है। पर बंगाल की इस स्थिति के लिए जिम्मेदार तो ममता बनर्जी ही हैं। यह माना जाता है कि बंगाल में वह वाम मोर्चे की ही राजनीति कर रही हैं। बंगाल की मौजूदा हालत के लिए वाम मोर्चे को जिम्मेदार माना जाता है। पर उस दौर में सांप्रदायिक हिंसा न के बराबर हुई थी। दूसरी ओर, ममता सरकार पर अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोप लग रहे हैं। कालियाचक से लेकर धुलागढ़ और बशीरहाट में हुई हिंसा इसी का पता देती है।
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ध्यान रखना चाहिए कि दार्जिलिंग में हिंसा अभी खत्म नहीं हुई है। स्वतंत्र गोरखालैंड की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले करीब एक महीने से वहां बंद जैसी  स्थिति है। दार्जिलिंग में पर्यटन व्यवसाय ठप पड़ गया है और लोग भूखों मर रहे हैं। पिछली वाम मोर्चा सरकार के विपरीत ममता को पहाड़ का हितैषी समझा जाता था। लेकिन बांग्ला भाषा के मुद्दे पर पहाड़ में आग तो सरकार के कारण ही लगी। इसके अलावा पहाड़ में मंत्रिमंडल की बैठक को भी पहाड़ के लोगों ने  पसंद नहीं किया। ममता सरकार शुरू से ही अपनी नाकामयाबी का ठीकरा विपक्षी दलों पर फोड़ती रही है। पहले वह वाम मोर्चे को जिम्मेदार ठहराती थी। लेकिन लेफ्ट के हाशिये पर चले जाने के बाद अब राज्य में भाजपा उसके निशाने पर है। बशीरहाट में हुई हिंसा पर ममता सरकार ने भाजपा को निशाना बनाया है, लेकिन उसे भूलना नहीं चाहिए कि दार्जिलिंग की स्थिति पर ममता सरकार को संवेदनशीलता से निपटने की सलाह कोलकाता हाई कोर्ट ने दी है। चूंकि सिक्किम में भारत और चीन आमने-सामने डटे हुए हैं, इसे देखते हुए भी दार्जिलिंग में जल्दी से जल्दी कानून-व्यवस्था की बहाली जरूरी है। इसके अलावा बशीरहाट-बादुरिया की आग बुझाते हुए ममता सरकार को इसका भी ध्यान रखना होगा कि आगे कहीं सांप्रदायिक हिंसा की घटना न हो।
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बंगाल को बुद्धिजीवियों की धरती माना जाता है। प्रतिवाद या विरोध यहां के खून में है। लेकिन शायद यह पहली बार है, जब सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ बोलने के लिए कोई तैयार नहीं है। हर तरफ खामोशी पसरी हुई है। प्रशासन की सुस्ती तो दिखती ही है, मीडिया, बुद्धिजीवी वर्ग और संस्कृतिकर्मियों की भूमिका भी काफी असहज स्थिति पैदा करती दिख रही है। बंगाल की मौजूदा अशांति का यह भी एक खतरनाक पहलू है।

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