नकली से परेशान है असली...
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पुलिस को इससे परेशानी कतई नहीं है कि कोई डकैती डाल रहा है या चोरी कर रहा है या दादागीरी कर रहा है। उसको दरअसल रंज इस बात का है कि कई बार नकली पुलिस ऐसे काम कर जाती है और बदनाम होती है असली पुलिस। सही बात तो यह है कि असली पुलिस को सिवाय नकली पुलिस के और किसी से कोई शिकायत नहीं है। क्योंकि बाकी से तो उसकी सेटिंग रहती है। मसलन, कटी जेब देखकर ही समझ लेती है पुलिस कि पप्पू पाजी का ही काम है यह। कहते हैं कि एक फिल्म में हीरो को पुलिस का रोल करना था, तो इसके लिए वह पुराने सिद्धहस्त चोर के ही पास ट्रेनिंग के लिए गया था। हीरो को ऐसा ट्रेंड किया उस चोर ने कि असली पुलिसवाले भी चकरा गए।
पुलिस को चोर-डाकू-बदमाश अगर बदनाम करते हैं, तो इसके बदले में पुलिस उनसे ‘हिसाब’ बराबर कर लेती है। यह ईमानदारी का सौदा है। मगर जब यही काम नकली पुलिस करने निकल जाती है, तो पुलिस की बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। वैसे ही चोरी, डकैती, लूट, हत्या, जुआ आदि पर कौन रोक लगा रहा है कि ऐसे सद्कर्म के लिए नकली पुलिस बनना जरूरी हो। पुलिस ने ऐसे मामले में कभी रोका हो, तो आप बताएं। यह कौन नहीं जानता कि हमेशा चोर-बदमाश के भाग निकलने के बाद ही पुलिस पहुंचती है? इतना अंदाजा तो पुलिस को हो ही जाता है कि अपराधी अब तक सुरक्षित जगह पर पहुंच गया होगा। उसके बाद ही वह ऑपरेशन के लिए निकलती है। अगर अपराधी का नाम मालूम हो जाए, तो उसके छिपने की जगह भी बता सकते हैं। आखिर हिस्सा लेने तो जाना ही पड़ता है, कोई देने आता है क्या कभी अपने आप?
यह तो पुलिस की भलमनसाहत ही कही जाएगी कि शहर में बढ़ रहे अपराध में वह रोड़ा नहीं बनती। जब पुलिस ने इतनी छूट दे रखी है, तो अपराधियों को भी चाहिए कि वे ऑरिजिनल रूप में ही काम को अंजाम दें। नकली पुलिस बनकर यह सब करने की क्या जरूरत है! कोई रोकता है, तो हमें बताएं... हड्डी का कचूमर निकाल देंगे। मगर हमारी वर्दी का तो इस्तेमाल मत करो। और कुछ नहीं, नकली पुलिस की आड़ लेकर कहीं हम असली पुलिसवालों पर लोग हाथ न उठा दें। आज पुलिस पर उठाया है, तो कल गुंडे-बदमाशों पर भी उठा सकते हैं! हम तो आपके भले के लिए ही कह रहे थे...कि हम बचे रहेंगे, तो आपका भी बचे रहना तय है...वरना...!