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बौद्धिक संपदा से बढ़ेंगे आर्थिक मौके

Thu, 14 Feb 2019 06:29 PM IST
जयंतीलाल भंडारी जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Thu, 14 Feb 2019 06:29 PM IST
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Economic opportunities to grow from intellectual property
जयंतीलाल भंडारी

अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स के वैश्विक नवोन्मेष नीति केंद्र (जीआईपीसी) की ओर से हाल ही में जारी अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा (आईपी) सूचकांक 2019 में 50 अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने 36वां स्थान हासिल किया है। यह 2018 में हासिल 44वें स्थान से आठ स्थान ऊपर है। नया आईपी सूचकांक तैयार करते समय प्रतिस्पर्धात्मकता पर वैश्विक बाजार में आंकड़े आधारित विचार, कारोबारी समुदाय द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मानदंडों जैसे 45 क्षेत्रों के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। जीआईपीसी के मापदंडों में व्यापार गोपनीयता का संरक्षण, पेटेंट और कॉपीराइट प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं। इन मापदंडों पर ज्ञान आधारित उद्योग-कारोबार का विकास, स्टार्टअप, घरेलू कारोबारियों और विदेशी निवेशकों के निवेश निर्भर करते हैं।


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जहां बौद्धिक अधिकार संपदा का एक पक्ष रचनात्मक होता है, तो दूसरा पक्ष कारोबार से संबंधित होता है। रचनात्मक कार्यों के लिए कॉपीराइट का अधिकार होता है, जबकि कारोबार के उद्देश्य से किए गए किसी आविष्कार को यह अधिकार पेटेंट के रूप में दिया जाता है। भारत में बौद्धिक संपदा प्रदर्शन में सुधार कुछ अहम सुधारों जैसे डब्ल्यूआईपीओ इंटरनेट संधियों आदि से आया है, जो छोटे कारोबार से संबंधित है। इसके अलावा पेटेंट के बैकलॉग को खत्म करने के लिए प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। इन सब कदमों की वजह से 'आर ऐंड डी' आधारित उद्योगों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है। कुछ समय पहले तक देश में शोध का माहौल काफी कमजोर था। दवा और कई अन्य उद्योग-कारोबार क्षेत्रों में हम दूसरों के द्वारा आविष्कार की गई तकनीक और प्रक्रियाओं में कुछ परिवर्तन करके उद्योग-कारोबार को आगे बढ़ाते रहे हैं। लेकिन अब सूचना प्रौद्योगिकी तथा अन्य क्षेत्रों में मौलिक खोजों को प्रोत्साहन मिला है। वर्ष 2016 की राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा नीति के बाद इनमें उल्लेखनीय रूप से तेजी आई है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों की बड़ी-बड़ी कंपनियां नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय आईटी प्रतिभाओं के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत में अपने ग्लोबल इन हाउस सेंटर (जीआईसी) तेजी से बढ़ाते हुए दिखाई दे रही हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमता और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में शोध और विकास को बढ़ावा देने के लिए लागत और प्रतिभा के अलावा नई प्रोद्यौगिकी पर इनोवेशन और जबर्दस्त स्टार्टअप माहौल के चलते दुनिया की कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं। देश के कारोबारी सुगमता और कारोबारी प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के जो वैश्विक सर्वेक्षण प्रकाशित हो रहे हैं, उनमें शामिल बौद्धिक संपदा के मापदंडों पर भी घरेलू उद्योगों के बढ़ने और अधिक विदेशी निवेश आने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

यदि हम चाहते हैं कि भारत अपनी बौद्धिक संपदा की बढ़ती हुई शक्ति से देश और दुनिया में उभरते हुए आर्थिक मौकों को अपनी मुट्ठियों में कर ले, तो हमें कई बातों पर ध्यान देना होगा। अब देश की अर्थव्यवस्था को ऊंचाई देने के लिए शोध को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अहम स्थान देना होगा। उद्योगों को नए अविष्कारों, खोज से परिचित कराने के मद्देनजर सीएसआईआर, डीआरडीओ और इसरो जैसे शीर्ष संस्थानों को महत्वपूर्ण बनाना होगा। अभी बौद्धिक संपदा के कई क्षेत्रों में व्यापक सुधार की जरूरत है। ऐसा करने पर ही आगामी वर्ष में जीआईपीसी की नई बौद्धिक संपदा सूची में भारत की रैंकिंग और ऊंचाई पर होगी और उसका लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकेगा।

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