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भविष्य की मुद्रा है ई-रुपया : डिजिटल रुपये के विकास का चरण और प्रौद्योगिक चुनौतियों से सामना

Fri, 04 Nov 2022 07:03 AM IST
Ajay Bagga अजय बग्गा
Updated Fri, 04 Nov 2022 07:03 AM IST
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सार
हम अब भी डिजिटल रुपये के विकास के शुरुआती चरण में हैं और आगे कई चुनौतियां होंगी। अच्छी बात यह है कि सरकार और रिजर्व बैंक इस मामले में बहुत व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।
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E-rupee is currency of future: Stage of development of digital rupee and meeting technological challenges
Digital Currency- New - फोटो : iStock

विस्तार

जनवरी, 2009 में अपनी लॉन्चिंग के बाद से बिटकॉइन ने दुनिया भर में क्रिप्टो मुद्राओं के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। नवंबर, 2021 में अपने चरम पर इसके 10,000 से अधिक सिक्के बाजार में थे और इनका बाजार मूल्य करीब तीस खरब डॉलर था, जिनमें बिटकॉइन का बाजार मूल्य 12.8 खरब डॉलर था। वर्ष 2022 में बाजार में सुधार के चलते सभी क्रिप्टो मुद्राओं का मूल्य लगभग 10 खरब अमेरिकी डॉलर रह गया है, जिसमें कई मुद्राओं का मूल्य शून्य रह गया है और क्रिप्टो क्षेत्र में काम करने वाली कई कंपनियां दिवालिया हो रही हैं। 



क्रिप्टो मुद्राओं में इस बड़ी गिरावट ने क्रिप्टो दलालों, उधारदाताओं, फंडों और एक्सचेंजों को खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए अर्जी लगाने पर बाध्य किया है, जिससे इनमें निवेश करने वालों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक क्रिप्टो उत्पादों की अनियमित प्रकृति पर चिंता जता रहे थे, जिसका मनी लॉन्ड्रिंग, ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी और आपराधिक गतिविधियों के लिए उपयोग हो सकता है। 


पिछले एक साल में ऐसे मामलों में कई गुना वृद्धि हुई है, जिसमें ऋण एप्स क्रिप्टो का उपयोग विदेशों में धन भेजने के लिए होता है। क्रिप्टो उत्पादों की बुनियाद रखने वाली ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और डेफी अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी है, पर उत्पाद का वर्तमान स्वरूप (जिसका न तो कोई आंतरिक मूल्य है और न ही कोई नियामक ढांचा) एक चुनौती पेश करता है कि 'प्रौद्योगिकी से कैसे लाभ उठाएं और क्रिप्टो की वर्तमान संरचना में निहित खतरनाक पहलुओं से कैसे बचें?'

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2022-23 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए घोषणा की थी कि भारतीय रिजर्व बैंक डिजिटल रुपया पेश करेगा। यह भारत की अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) होगी। सीबीडीसी एक डिजिटल भुगतान साधन है, जिसे राष्ट्रीय मुद्रा (भारतीय रुपया) में अंकित किया गया है। यह केंद्रीय बैंक, आरबीआई की प्रत्यक्ष देयता है। डिजिटल सॉवरेन करेंसी का यह नया रूप भारतीय रिजर्व बैंक में रखे गए भौतिक नकद रुपये या उसके भंडार के बराबर होगा। 

यह आरबीआई द्वारा जारी और विनियमित किया जाएगा और भौतिक रुपये की तरह सॉवरेन गारंटी द्वारा समर्थित होगा। क्रिप्टो मुद्राओं को न तो किसी केंद्रीय बैंक ने जारी किया है और न ही यह कानूनी तौर पर मान्य है। क्रिप्टो मुद्राएं किसी संस्था की देयता नहीं हैं और न ही किसी संपत्ति द्वारा समर्थित हैं। अत्यधिक अस्थिरता के कारण उनके मूल्य में उतार-चढ़ाव आता है। 

सीबीडीसी ई-रुपया रिजर्व बैंक द्वारा समर्थित है, जिसे जारी करने पर ई-रुपये की शेष राशि आरबीआई की बैलेंस शीट पर प्रतिबिंबित होगी और देश की बैलेंस शीट का भी हिस्सा बनेगी। इसलिए डिजिटल रुपया सीबीडीसी आरबीआई द्वारा जारी करेंसी नोटों का डिजिटल रूप है। 

यह बैंक नोटों से बहुत अलग नहीं है, लेकिन डिजिटल होने के कारण, इसमें लेन-देन करना आसान, तेज और सस्ता होने की संभावना है। इसमें सभी तरह के डिजिटल धन के लेन-देन संबंधी सभी लाभ भी हैं, जैसे-सुरक्षा, सुविधा और पारदर्शिता। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने भारतीय सीबीडीसी पर अपनी परिकल्पना के विवरण का खुलासा किया, और थोक में डिजिटल रुपये को लेन-देन में शामिल करने वाली पहली पायलट परियोजना एक नवंबर को लॉन्च की गई। 

केंद्रीय बैंक ने थोक में डिजिटल रुपये की पहली पायलट परियोजना शुरू करने के लिए नौ बैंकों को नियुक्त किया है। एक महीने में रिजर्व बैंक खुदरा स्तर पर भी पायलट परियोजना शुरू करेगा। बैंक बचत की तरह डिजिटल वॉलेट में कोई डिजिटल बचत का पता लगा सकेगा। डिजिटल रुपया वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में धन प्रवाह की व्यापक दृश्यता की अनुमति देगा। भारत में लोगों के पास 30 लाख करोड़ रुपये की एक बड़ी राशि है। लेकिन नीति-निर्माताओं को जरा भी अंदाजा नहीं है कि यह किसके पास, कब से और क्यों रखी हुई है। 

डिजिटल सीबीडीसी होने से अधिक पारदर्शिता और बेहतर मौद्रिक नीति लक्ष्यीकरण भी संभव होगा। डिजिटल रुपये के उपयोग में वृद्धि के साथ भौतिक मुद्रा की छपाई, भंडारण और वितरण की लागत कम हो जाएगी। सीबीडीसी के व्यापक उपयोग से अर्थव्यवस्था का विनियमीकरण और वित्तीयकरण बढ़ेगा। कर संग्रह में भी सुधार होगा, क्योंकि कर विभाग पता लगाने में सक्षम होगा। कॉरपोरेट जगत के लिए, सीबीडीसी तत्काल निपटान, ट्रैकिंग और नियंत्रण की पेशकश करेगा। इससे अर्थव्यवस्था में समग्र टकराव भी कम हो जाएगा।

भारत में कोविड के बाद तेजी से डिजिटल भुगतान और यूपीआई के शुरू होने से बड़े पैमाने पर जनता को फायदा हुआ है। जन-धन खातों, मोबाइल डाटा पैठ और आधार के संयोजन ने वित्तीय परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया है। रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों से लेकर पांच सितारा होटलों तक यूपीआई स्वीकृत है और क्यूआर कोड स्कैनिंग सार्वभौमिक हो गई है। इसने बड़ी संख्या में लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल किया है और अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाई है।

हालांकि, अन्य देशों का अनुभव 'सीबीडीसी के साथ क्या नहीं करना है' से संबंधित कुछ सबक देता है। जब नाइजीरिया सीबीडीसी शुरू करने वाला पहला अफ्रीकी राष्ट्र बना, तो यह उस देश के लगभग चार करोड़ बिना बैंक खाते वाले लोगों को आंशिक रूप से निशाना बना रहा था। वहां इसके अब तक के नतीजे निराशाजनक रहे हैं। 

हालांकि ई-नाइरा बिटकॉइन या एथेरियम के समान डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर तकनीक (डीएलटी) का उपयोग करता है और इसे डिजिटल वॉलेट में सहेजा जा सकता है। क्रिप्टोकरेंसी के लिए नाइजीरियाई लोगों का जुनून केंद्रीय बैंक की पेशकश तक सीमित नहीं है। शिक्षा और ग्राहकों के बदलते व्यवहार केंद्रीय बैंक के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां रही हैं। पर नाइजीरिया का केंद्रीय बैंक उत्साहित है। 10 लाख लोगों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आकर्षित करने के बाद इसने अगले अगस्त तक 80 लाख लोगों को डिजिटल मंच पर लाने का लक्ष्य रखा है। 

कुल मिलाकर, सीबीडीसी भविष्य का मार्ग है। हम अब भी डिजिटल रुपये के विकास के शुरुआती चरण में हैं और आगे कई चुनौतियां होंगी। अच्छी बात यह है कि सरकार और रिजर्व बैंक बहुत व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। यह व्यापक अर्थों में भविष्य का धन है और भारत ई-रूपी के लॉन्च के साथ इस भविष्य का नेतृत्व कर रहा है।

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