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बौद्धिक संपदा से जुड़ा है विकास
पेट्रिक किलब्राइड
Updated Wed, 20 May 2015 08:21 PM IST
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बौद्धिक संपदा और नित नए विचारों का जन्म देश की अहम जरूरतों में से एक है। किसी भी देश की बौद्धिक संपदा व्यापार और अर्थव्यवस्था के निरंतर विकास लिए बहुत जरूरी है। भारत सरकार अपनी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा पर सही में गंभीर है या उसे सिर्फ मंत्रियों के समूह और विदेश दौरों तक ही सीमित रखा गया है, इस पर उद्योग जगत की पैनी नजर है। उद्योग जगत की दिलचस्पी इसमें है कि सरकार अपनी बौद्धिक संपदा के संरक्षण के लिए किन मूलभूत मानकों का प्रयोग करने वाली है।
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हाल के वर्षों में भारत की बौद्धिक संपदा के प्रति व्यापारिक प्रतिष्ठानों का मोहभंग हुआ है। अमेरिकी प्रतिनिधि भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि बौद्धिक संपदा के कारण भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों में भटकाव आया है और यही वजह है, जिसने रास्ते के पत्थर का काम किया है। बौद्धिक संपदा से जुड़े कमजोर नियम और कानूनों ने तीन मुख्य क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जिनमें फार्मास्यूटिकल, तकनीक और मनोरंजन शामिल हैं।
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पिछले दस वर्षों में, मनोरंजन के क्षेत्र में शर्तों के आधार पर किए गए समझौतों से होने वाली आय में कमी देखी गई। मनोरंजन क्षेत्र का मानना है कि कॉपीराइट कानूनों के उल्लंघन की वजह से व्यापक असर हुआ। जबकि, बिजनेस सॉफ्टवेयर एलाइंस (बीएसए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 में देश में 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर के गैर लाइसेंसी सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया गया और अब भारत में पाइरेसी का स्तर 60 फीसदी तक जा चुका है। इसका सीधा असर कंपनियों की आय पर पड़ता है, जिसकी वजह से इन कंपनियों से उम्मीद लगाना व्यर्थ होगा कि ये कंपनियां भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में प्रोत्साहन देंगी।
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राजनीतिक नेतृत्व की तरफ से निवेशकों को यह संदेश जाना चाहिए कि भारत बौद्धिक संपदा के संरक्षण के विषय में अब गंभीर है। कंपनियों को भरोसा चाहिए कि उनकी बौद्धिक संपत्ति सुरक्षित है। भारत में ज्ञान, रचनात्मकता और तकनीक की काफी संभावनाएं हैं, इसके बावजूद स्वामित्व संबंधी अधिकारों का लगातार हनन और मनाही निवेशकों के मन में भरोसे को कमजोर ही करेगा।
बौद्धिक संपदा के ढांचे पर विचार करें, तो जीआईपीसी के 30 देशों पर आधारित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में भारत को 29वां स्थान प्राप्त हुआ। यह दर्शाता है कि पिछले दो संस्करणों के मुकाबले भारत की स्थिति इस साल थोड़ी सुधरी है। पिछली बार भारत को अंतिम स्थान मिला था। यह अच्छा संकेत है, जो उद्योग जगत के मन में भारत के बौद्धिक संपदा संरक्षण की व्यवस्था के प्रति विश्वास कायम करेगा।
भारत की महान व्यावसायिक और अर्थव्यवस्था संबंधी काबिलियत का फायदा तब तक नहीं उठाया जा सकता, जब तक देश की नीतियां निवेश को प्रोत्साहन नहीं देती। बौद्धिक संपदा से जुड़े मजबूत और सुरक्षित अधिकारों को लागू और प्रोत्साहित करने की दिशा में सरकार बढ़ रही है, लेकिन तब तक उम्मीद के मुताबिक कामयाबी हासिल नहीं होगी, जब तक इस पहल को ठीक ढंग से क्रियान्वित न किया जाए।
- लेखक, अमेरिकी चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स के ग्लोबल इंटलेक्चुअल प्रापर्टी सेंटर में अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा के कार्यकारी निदेशक हैं