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मुद्दा: अमेरिकी सपने जीने की दुखांत कहानियां... प्राप्य लक्ष्य और तबाही वाले झूठे सपनों का अंतर समझना ही होगा

Fri, 07 Feb 2025 04:36 AM IST
patralekha chatterjee पत्रलेखा चटर्जी
Updated Fri, 07 Feb 2025 04:36 AM IST
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सार
निर्वासित लोगों के परिवार सदमे में हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके बच्चों के डॉलर के सपने कैसे टूट गए।
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Deportation and Issue of Tragic US dream understanding difference of attainable goals and false dreams vital
अमेरिका से वापस लौटे अवैध अप्रवासी भारतीय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के पवित्र शहर अमृतसर में उतरे अमेरिकी सैन्य विमान ने 104 भारतीय प्रवासियों को वापस भेज दिया, जिनकी कहानियां बहुत जानी-पहचानी हैं। युवा भारतीयों द्वारा अपनी जान, हाथ-पैर और बैंक-बैलेंस को जोखिम


में डालकर ‘अमेरिकी सपने’ को साकार करने की कहानी पुरानी है। इनमें से कई तो अमेरिका पहुंच ही नहीं सके और बीच में ही अपनी जान गंवा बैठे।

यह भी पहली बार है कि ज्यादातर निर्वासित लोग भारत के समृद्ध राज्यों से हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इनमें गुजरात (33), हरियाणा (34) और पंजाब के तीस लोग हैं, कुछ लोग उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र के भी हैं।


पहले चरण में 48 निर्वासित भारतीय 25 वर्ष से कम उम्र के हैं। इनमें 25 महिलाएं एवं 12 नाबालिग भी हैं, जिनमें एक चार वर्ष का बच्चा भी है। भारत सरकार ने कहा है कि वह अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे सभी भारतीय नागरिकों की पहचान करने और उनके विवरण की पुष्टि करने के बाद उन्हें वापस भेजने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है। अमेरिका में करीब 7,25,000 भारतीय बिना दस्तावेज के हैं और जिन लोगों को पहले चरण में वापस भेजा गया है, वह एक छोटी संख्या है।

इनकी कहानियों में एक बात समान है-इनके सिर्फ सपने ही नहीं टूटे हैं, बल्कि ये भारी कर्ज में भी डूब गए हैं। इन निर्वासितों में से कई ने अमेरिका में अवैध प्रवेश के लिए लाखों रुपये खर्च किए, इस उम्मीद में कि अंततः उन्हें कानूनी दर्जा मिल जाएगा। कई अन्य वैध दस्तावेज पर अमेरिका में प्रवेश तो कर गए, लेकिन वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी वहीं टिके रहे। निर्वासित भारतीयों के परिवारों ने कर्ज लिया, अपनी जमीनें एवं घर बेचे और अपमान झेलने के अलावा अब वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इतनी बड़ी रकम कैसे चुकाई जाए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परिवारों ने अपने युवाओं को ‘डंकी रूट’ से विदेश भेजने के लिए एजेंटों को 40 से 60 लाख रुपये तक दिए थे, कई मामलों में तो यह रकम एक करोड़ या इससे ऊपर भी है। लेकिन यह कदम उल्टा पड़ गया। पंजाब के कपूरथला जिले के बहबल गांव का युवा गुरप्रीत सिंह मात्र छह महीने पहले अमेरिका गया था। उसके परिजनों का कहना है, ‘हमने अपना घर खो दिया, रिश्तेदारों, दोस्तों और अन्य लोगों से 45 लाख रुपये ऋण लिया। अब हम तभी बच सकते हैं, जब सरकार हमारी मदद करे। अन्यथा सब खत्म हो जाएगा।’

एक प्रमुख गुजराती अखबार गुजरात समाचार के अनुसार, ‘उत्तरी गुजरात के मेहसाणा, गांधीनगर, पाटन और बनासकांठा जिलों के विभिन्न गांवों के कुल 33 लोगों को निर्वासित किया गया है।’ मेहसाणा जिले में खेरवा, जोरारनंग और मेउ गांवों को तो ‘डोलारियो विस्तार’ (डॉलर क्षेत्र) के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इन गांवों से बड़ी संख्या में लोग वर्षों से विदेश में बस गए हैं। निर्वासित लोगों के परिवार सदमे में हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके बच्चों के डॉलर के सपने कैसे टूट गए। अवसाद में डूबे ये भारतीय, जिनके सपने धूमिल हो गए हैं, क्या लालच के प्रतीक हैं या ये युवा केवल अन्य लाखों लोगों की तरह बेहतर अवसर की तलाश में विदेश गए थे? विदेशी धरती पर कानून के उल्लंघन के कारण इनके साथ हुई घटनाएं दिल दहला देने वाली हैं।

कहा जा रहा है कि बेरोजगारी और कम वेतन के कारण समृद्ध राज्यों के युवा भी देश छोड़कर अमीर देशों में जाने को मजबूर हैं। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च कर अमेरिका पहुंचने के सपने देखने वाले इतने भी कम सामर्थ्यवान नहीं रहे होंगे। दरअसल, बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वे किसी तरह वहां पहुंच गए, तो वे अंततः वहां के नागरिक बन जाएंगे। यह बहुत ज्यादा अज्ञानता और भोलापन दर्शाता है। बढ़ती गलाकाट प्रतिस्पर्धा की दुनिया में हर देश सिर्फ अपने बारे में सोच रहा है, और अमीर देश बैरिकेड्स लगाकर संरक्षणवादी बन रहे हैं। भारत को इस समस्या की जड़ को खत्म करने के बारे में कदम उठाना चाहिए।

कानूनी दस्तावेजों के बिना दूसरे देशों में जीवन हमेशा जोखिम भरा होता है। अगर जीवन है, तो उम्मीद भी है। उम्मीद है कि ये युवा समाज में फिर से शामिल हो जाएंगे और उन्हें ऐसा काम मिल जाएगा, जिससे वे जीवनयापन करने में सक्षम हों। उम्मीद है कि वे हासिल करने लायक सपनों और तबाही लाने वाले झूठे सपनों के बीच अंतर करना सीख जाएंगे और झूठे सपनों के सौदागरों से सावधान रहेंगे।

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