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अमेरिका को ओडिशी से परिचित कराती नृत्यांगना

Sun, 04 Aug 2019 02:22 PM IST
Trainee Trainee मरिआना हार्स, अमर उजाला
मरिआना हार्स, अमर उजाला Published by: Trainee Trainee Updated Sun, 04 Aug 2019 02:22 PM IST
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Dancer introduces America to Odissi
बिजयिनी सत्पथी और सुरूपा सेन - फोटो : twitter

कुछ साल पहले एक यादगार रात में बलुआ पत्थर से बने डेंड्योर मंदिर के सामने मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना बिजयिनी सत्पथी और सुरूपा सेन ने युगल प्रस्तुति दी थी। संगीत के साथ तालमेल बिठाते हुए वह प्रस्तुति इतनी सहज थी, मानो वे दोनों एक शरीर थीं और समय ठहर गया था। एकीकरण का वह रूप एक लंबी सहभागिता का फल था, उन महिलाओं ने दो दशक से अधिक समय तक एक साथ नृत्य किया था। पिछले साल के अंत में उन्होंने दक्षिण भारत के बंगलूरू में नृत्यग्राम के पास अपने घर पर एक कंपनी बनाई और नृत्य विद्यालय खोला। सेन कोरियोग्राफर हैं, जबकि सत्पथी स्टार नृत्यांगना और शिक्षिका हैं।


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चालीस की सत्पथी ने हाल ही में ब्रुकलिन में कहा कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, वह अपनी कलात्मकता को एक अछूते और अपरिवर्तित आयाम देने के लिए एक शाम नृत्य की एकल प्रस्तुति की कसौटी पर खुद को परखने की इच्छा रखती हैं। पिछले साल उन्होंने सेन से कहा कि वह कुछ नया तलाशने के लिए नृत्यग्राम से थोड़े समय के लिए अवसर लेना चाहती हैं। इसके बाद उन्होंने कंपनी की वरिष्ठ नृत्यांगना और स्कूल की निर्देशिका का पद छोड़ दिया। कुछ नया करने  की तलाश उन्हें न्यूयॉर्क वापस लाई, जहां ड्राइव ईस्ट फेस्टिवल में एक शाम वह, भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के वार्षिक उत्सव में प्रस्तुति देंगी। भारतीय शास्त्रीय नृत्य में ओडिशी नृत्य शैली की एक बेहतरीन नृत्यांगना को देखने का यह एक दुर्लभ अवसर होगा। सत्पथी का जन्म ओडिशा की राजधानी में हुआ; उनके आसपास की बहुत सारी लड़कियां स्थानीय नृत्यशालाओं में ओडिशी सीखती थीं। सत्पथी अपनी कक्षा में सर्वश्रेष्ठ थी। लेकिन अपने जीवन को नृत्य के प्रति समर्पित करने का विचार उनके मन में नहीं आया था। नृत्यग्राम के एक ऑडिशन से, जो उस समय नई नृत्यांगनाओं की भर्ती कर रहा था, उन्हें रास्ता मिला। वह बताती हैं, 'परिवार की अस्वीकृति के बावजूद जब मैं उस जगह गई, तो समझ गई कि यह वही है जो मैं करना चाहती हूं। मेरे माता-पिता ने मुझसे तीन साल तक बात नहीं की, पर मैं अपने निर्णय पर कायम रही।'

सत्पथी एक नृत्य शैली विकसित कर रही हैं, जिसमें योग, मार्शल आर्ट, व्यायाम और नाट्य शास्त्र में वर्णित शारीरिक अभ्यास शामिल हैं। इस गर्मी में उन्होंने पूरे अमेरिका में कार्यशालाएं आयोजित की हैं। कोरियोग्राफर मार्क मॉरिस, जो उन्हें 20 साल से अधिक समय से देख रहे हैं, कहते हैं, 'मैं अपने जीवनकाल की शीर्ष पांच नृत्यांगनाओं में उन्हें रखता हूं।'

अमेरिका में अकेले काम करने की वजह से सत्पथी को ओडिशी के बारे में अलग तरीके से सोचने को मिला। ड्राइव ईस्ट में वह सेन द्वारा तैयार एकल नृत्य का प्रदर्शन करेंगी, साथ ही केलुचरण महापात्र द्वारा तैयार पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन करेंगी। हालांकि इसकी बुनियादी मुद्राएं और तकनीक पीढ़ी दर पीढ़ी खत्म हो चुकी हैं, लेकिन शैली के भीतर अभिव्यंजक विविधता मौजूद है।   सत्पथी कहती हैं, 'मैं खुद की चीजों पर सवाल उठाती हूं। हालांकि कभी-कभी मुझे लगता है, शायद मैं यहां कुछ अलग कर सकती हूं।' अब तक नृत्य प्रस्तुतियों में वह दूसरे की कल्पनाओं को मंच पर आकार देती थीं। पहली बार वह चकित हैं कि अपनी ही धारणा के आधार पर नृत्य प्रस्तुति भला कैसी होगी। 'मेरे पास कोरियोग्राफी की क्षमता है,  लेकिन मुझे डर लगता है', वह कहती हैं। अभी वह 12वीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथ गीत गोविंद के एक पद से प्रेरित एकल नृत्य शैली पर काम कर रही हैं, जो भगवान कृष्ण और राधा के बीच प्रेम को याद करता है।

इस विशेष गीत में कृष्ण राधा के प्रति अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं, जो उसे देखने से इनकार करती हैं। सत्पथी कहती हैं, 'यह विदाई के विदारक दर्द के बारे में है।' यह विशेष विषय इन दिनों उनके दिमाग में है। अपने एकल नृत्य में, सत्पथी धीरे-धीरे, जमीन पर चलती हैं, उनका शरीर उदासी से भरा होता है। जाहिर है, सत्पथी के रूप में यहां नृत्यग्राम से एक नृत्यांगना उभर रही है। न्यूयॉर्क में उनकी दूसरी नृत्य प्रस्तुतियों की तरह यह एकल नृत्य भी गति व मूकाभिनय के माध्यम से खुद को बदलने की उनकी उल्लेखनीय क्षमता को प्रस्तुत करेगी, जिसे भारतीय नृत्य कला में अभिनय कहते हैं। ड्राइव ईस्ट में वह सीता हरण भी, जो गुरु महापात्रा द्वारा रचित महाकाव्य रामायण का एक अंश है, पेश करेंगी। पूरी तरह धार्मिक व्यक्ति न होने के बावजूद सत्पथी देवी-देवताओं पर आधारिक नृत्य प्रस्तुतियों को उसी महत्व और प्रभाव के साथ पेश करती हैं। वह कहती हैं, 'मैं राधा के नृत्य को पकड़ने में सक्षम हूं, क्योंकि नृत्य शैली की उस भावना को मैं अपने भीतर रखती हूं, और इस भूमिका में मैंने खुद को पूरी तरह सौंप दिया है। यह वह नृत्य है, जिसमें विश्वास शामिल है। यही मेरा धर्म है।'

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