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#CoronaPositive: अपनी कक्षा में

Deepak K. Srivastava दीपक के. श्रीवास्तव
Updated Wed, 01 Apr 2020 12:43 AM IST
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Coronavirus effect, online class and e learning after lockdown due to covid19
online class - फोटो : pixabay

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोविड-19 के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए विभिन्न भाषाओं में ऑनलाइन लर्निंग मॉड्यूल विकसित किए हैं। आईआईटी एवं आईआईएम सहित कई भारतीय संस्थान ऑनलाइन मोड में शिक्षा दे रहे हैं। विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए छात्रों को घर बैठे ऑनलाइन कक्षाओं में भागलेने की अनुमति दी है।


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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोविड-19 के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए विभिन्न भाषाओं में ऑनलाइन लर्निंग मॉड्यूल विकसित किए हैं। आईआईटी एवं आईआईएम सहित कई भारतीय संस्थान ऑनलाइन मोड में शिक्षा दे रहे हैं। विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए छात्रों को घर बैठे ऑनलाइन कक्षाओं में भागलेने की अनुमति दी है।

कोरोना ने ऑनलाइन शिक्षा को आवश्यकता बना दिया है और हमें ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली की संभावना और लाभों के बारे में सोचने के लिए मजबूर किया है। ऑनलाइन शिक्षा आधुनिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में एक है। पिछले दशक में इंटरनेट की उपलब्धता काफी बढ़ गई है।

ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली के लिए विश्वसनीय और सुरक्षित ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है, ताकि विभिन्न सॉफ्टवेयरों के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जा सके। उन्नत संचार सॉफ्टवेयर बेहतर दृश्यता के साथ लगातार सामने आ रहे हैं और दूरस्थ संचार को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए एक दूसरे से होड़ कर रहे हैं।

केपीएमजी और गूगल द्वारा किए गए एक अध्ययन 'ऑनलाइन एजुकेशन इन इंडिया : 2021' के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन शिक्षा का बाजार 2021 तक बढ़कर लगभग 1.96 अरब डॉलर होने की उम्मीद है और विभिन्न ऑनलाइन शिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए नामांकित छात्रों की संख्या 2021 के अंत तक बढ़कर करीब 96 हो जाने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन शिक्षा इसलिए पसंद की जाती है, क्योंकि यह सस्ती है। उच्च करियर आकांक्षाओं और कम आय के साथ भारतीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन शिक्षा के लिए अच्छा बाजारहो सकता है। भारत उन देशों में से है, जो सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास कर रहा है।

सरकार की महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया पहल के माध्यम से डिजिटल तकनीकों का उपयोग भारत के लिए अवसर है। इस पहल में स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम, रोजगार आदि जैसे क्षेत्रों की विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। इस पहल के एक हिस्से के रूप में कई शैक्षणिक संस्थान ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं।

1.3 अरब से अधिक की आबादी, हाई स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता, स्मार्टफोन का उपयोग और तकनीकी रूप से संचालित कार्यबल के साथ देश में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली से लाभ प्राप्त करने की अपार संभावनाएं हैं। विभिन्न भाषाओं में लगातार बढ़ती जानकारियां इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, जिन्हें भारत में अनेक लोग ऑनलाइन पढ़ना पसंद करते हैं।

ऑनलाइन शिक्षा मंच के कई लाभ

ऑनलाइन शिक्षा को अपनाने वाले विश्वविद्यालय और शैक्षिक संस्थान स्थान की परवाह किए बिना प्रौद्योगिकी के माध्यम से शैक्षिक जरूरतें पूरी करने की क्षमता में अधिक लचीलापन दिखा सकते हैं। कोरोना संकट के समय सबके स्वास्थ्य की रक्षा करने के अलावा विश्वसनीय और सुलभ ऑनलाइन शिक्षा मंच स्थापित करने के कई लाभ हैं। ऑनलाइन शिक्षा छात्रों और शिक्षकों के जीवन के अनुभव को मौलिक रूप से बदल देती है। उनके पास अपने कार्यक्रम तय करने को लेकर अधिक लचीलापन होता है।

निश्चित दिन और तय अवधि के बजाय छात्र तब ऑनलाइन शिक्षा का लाभ ले सकते हैं, जब उन्हें इसकी जरूरत महसूस होती है। शिक्षा के लिए एक बड़ी इमारत पर निर्भरता सीमित कर शैक्षिक संस्थान ऑनलाइन माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। देश को अपनी कामकाजी उम्र की आबादी के विकास को बनाए रखने के लिए सालाना कई लाख नए रोजगार सृजित करने की आवश्यकता है। इसके लिए उच्च शिक्षा दाखिले में वृद्धि जरूरी है। ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली छात्रों के नामांकन को बढ़ा सकती है ।

तेज तकनीकी प्रगति के मौजूदा परिदृश्य में पेशेवरों को  नियमित रूप से अपने नौकरी की विकसित भूमिकाओं में प्रासंगिक बने रहने के लिए स्वयं को फिर से हुनरमंद बनाने की जरूरत है। ऑनलाइन शिक्षा सही रोजगार के क्षेत्र से संबंधित कुछ सर्टिफिकेट कोर्स करने के लिए उनके लिए अच्छा माध्यम है। कई आईआईएम और आईआईटी ने लघु और मध्यम अवधि के विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की शुरुआत की है। हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऑनलाइन शिक्षा की दिशा में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं।

इनमें से कुछ बेहद लोकप्रिय हैं, जैसे एमओओसी, स्वयं ऑनलाइन कोर्स, ई-पीजी पाठशाला, जो छात्रों को मॉड्यूल आधारित ई-सामग्री के साथ राष्ट्रव्यापी शिक्षण संसाधनों की पहुंच प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी सभी प्रकार के पाठकों के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं में विभिन्न विषयों की शैक्षणिक सामग्री का डिजिटल भंडार है। शोधगंगा, ई-शोध सिंधु जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म शोधकर्ताओं को पीएच.डी. शोध और शोध लेखों तक पहुंच प्रदान करते हैं।

भारतीय शिक्षा प्रणाली दुनिया में सबसे विशाल

मुफ्त उपलब्ध कई सॉफ्टवेयर नियमित आधार पर शिक्षक और छात्र के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को संभव बनाते हैं। वर्तमान कोरोना संकट के दौरान देश के कई संस्थान ऐसा करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी विकास की तेज पटरी पर है। निकट भविष्य में और अधिक नए इंटर ऐक्टिव सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के सामने आने की उम्मीद है। भारतीय शिक्षा प्रणाली दुनिया में सबसे विशाल है, जिसमें स्कूली, उच्च और तकनीकी शिक्षा शामिल हैं। ऑनलाइन शिक्षा स्कूली शिक्षा के लिए भी प्रासंगिक है, जहां हर साल हजारों छात्र विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

स्कूली छात्रों के लिए भी स्मार्ट उपकरण कक्षा का वातावरण अधिक सुविधाजनक बना सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न उन्नत सॉफ्टवेयर और तकनीकों की उपलब्धता एक बार में बड़ी संख्या में छात्रों के लिए ऑनलाइन परीक्षा को संभव बनाती है। ऑनलाइन शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए राष्ट्र की सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने की आवश्यकता है, जो न केवल किफायती होगी, बल्कि कुशल कार्य बल का निर्माण करेगी। - दीपक के. श्रीवास्तव(प्रोफेसर), आईआईएम, तिरुचिरापल्ली
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