सक्रिय हो गए हैं सेक्यूलरिज्म के ठेकेदार
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सोचा था कि नरेंद्र मोदी के राज में वे लोग पीछे हट जाएंगे, जिन्होंने सेक्यूलरिज्म का वास्ता देकर उनको अछूत बनाने का प्रयास किया 2002 से लेकर आम चुनाव तक। ऐसा आंदोलन चलाया इन्होंने मोदी के खिलाफ कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम हुए। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री को अमेरिका ने वीजा देने से ही इन्कार कर दिया था। अब मोदी के लिए अच्छे दिन आए हैं, तो अमेरिकी विदेश मंत्री दिल्ली आए मोदी का नारा हिंदी में बोलते हुए। अमेरिकी बेशक हो गए होंगे मोदी के मुरीद, पर सेक्यूलरिज्म के ठेकेदार इतनी जल्दी युद्धभूमि से भागने वाले नहीं।
सेक्यूलर लोग हल्ला बोलने में इतने माहिर हैं कि मोदी सरकार के खिलाफ जितना हल्ला दिखा है संसद के इस सत्र में, उससे कई गुना ज्यादा बाहर दिखा है। यह सिलसिला शुरू हुआ मोदी के शपथ लेने के बाद उस घटना से, जिसमें पुणे के कट्टर हिंदूवादी हत्यारों ने एक बेगुनाह मुस्लिम युवक की हत्या की थी। उसका दोष मोदी पर डाला गया।
फिर जब शिवसेना के एक सांसद ने एक रोजेदार मुस्लिम सेवक के मुंह में रोटी ठूंसने की कोशिश की, तो इसका भी दोष मोदी के सिर लगाया गया। मैंने जब अपने कुछ 'सेक्यूलर' दोस्तों से पूछा कि इसमें प्रधानमंत्री का क्या कुसूर हो सकता है, तो जवाब मिला, 'उनका गठबंधन है शिवसेना से, तो उनको कुछ कहना चाहिए था।' इस घटना को लेकर हल्ला कम हुआ ही था कि एक भाजपा विधायक ने कह दिया कि सानिया मिर्जा तेलंगाना का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं, क्योंकि उन्होंने एक पाकिस्तानी से शादी की है। फिर से दोष प्रधानमंत्री पर थोपा गया। टीवी चर्चाओं का यह खास मुद्दा बन गया और शुरू हो गई है अफवाहें कि मोदी जान-बूझकर चुप हैं, क्योंकि वह बढ़ावा देना चाहते हैं कट्टरपंथी हिंदूवादियों को।
दरअसल मामला कुछ और है। कांग्रेस अभी तक अपनी हार हजम नहीं कर पाई है, सो हर तरह से नई सरकार के रास्ते में सेक्यूलर रोड़े फेंकने की कोशिश में लगी हुई है। संसद में रोज हंगामा किया जाता है सोची-समझी रणनीति के तहत। मोदी सरकार के सौ दिन पूरे नहीं हुए हैं कि कांग्रेस समर्थकों ने शुरू कर दिए हैं दिल्ली और मुंबई में सम्मेलन 'आइडिया ऑफ इंडिया' को लेकर। इस सम्मेलन में शामिल हुए महेश भट्ट और नंदिता दास जैसे सेक्यूलरिज्म के मशहूर सिपाही। इनका साथ दिया ऐसे लोगों ने, जिनका सीधा संपर्क है सोनिया गांधी से।
सावधान हो जाइए, प्रधानमंत्री जी। यह शुरुआत है। आंदोलन लंबा चलेगा। सो जरूरत है कि आप अपने उन साथियों पर नियंत्रण रखिए, जो अपने वक्तव्यों से इस सेक्यूलर फौज को असलाह देते हैं। उदाहरण है आपके अपने गुजरात से, जहां दीनानाथ बत्रा नामक प्रचारक ने भारत की प्राचीन सभ्यता का मजाक बना दिया है कई तरह के ऊटपटांग दावे करके, कि विश्व का पहला हवाई जहाज प्राचीन भारत में बना था और स्टेम सेल का ज्ञान भी हमारे पूर्वजों को था। विश्व की संस्कृति और सभ्यता को प्राचीन भारत की देन महान है, सो इस तरह के बेबुनियाद दावों की क्या आवश्यकता है? बच्चों को इसके बदले क्यों न प्राचीन भारत का असली इतिहास पढ़ाया जाए? आज संस्कृत भाषा को आधुनिक ढंग से पढ़ने हमारे बच्चे अमेरिका जाते हैं। कितनी शर्म की बात है।