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चैंपियन ऑफ द अर्थ

Fri, 27 Sep 2013 09:01 PM IST
अभिषेक सक्सेना
अभिषेक सक्सेना Updated Fri, 27 Sep 2013 09:01 PM IST
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champian of earth

उनका जन्म मदुरई के एक सामान्य परिवार में हुआ, लेकिन ग्यारह वर्ष की आयु में ही उन्हें अपने परिवार के साथ बंगलूरू आना पड़ा। उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि नन्हा वीरभद्रन भविष्य में मेधा की किन ऊंचाइयों को छूने वाला है।

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जिस स्कूल में वीरभद्रन रामानाथन का दाखिला कराया गया था, वहां पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी था, जबकि उन्हें तमिल के सिवाय किसी भाषा का ज्ञान ही नहीं था। इसी वजह से जब उनके अध्यापक कक्षा में पढ़ा रहे होते थे, वीरभद्रन दूर क्षितिज को निहारा करते। वायुमंडल की ओर शायद यह उनका पहला आकर्षण था। कहते हैं, ज्ञान पाने के अनंत दरवाजे होते हैं, बस जिज्ञासा होनी चाहिए। जल्द ही वीरभद्रन को समझ में आ गया कि किताबों में निहित ज्ञान को पाने के लिए अध्यापकों को सुनने के बजाय अपने दिमाग पर भरोसा करना ज्यादा उपयुक्त होगा।
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अन्नामलाई विश्वविद्यालय से स्नातक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से परास्नातक की डिग्री लेने के बाद उच्च अध्ययन के लिए वीरभद्रन ने अमेरिका का रुख किया, जहां उन्होंने पर्यावरणीय विज्ञान के अपने अध्ययन को नए आयाम दिए। दरअसल, 1970 के दशक तक सामान्य सोच यही थी कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए एकमात्र उत्तरदायी ग्रीनहाउस गैस कॉर्बन डाई ऑक्साइड है। यह वीरभद्रन ही थे, जिन्होंने खोज की कि इसके लिए क्लोरो फ्लोरो कार्बन समेत दूसरी ग्रीनहाउस गैसें भी जिम्मेदार हैं।
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उन्होंने उस अंतरराष्ट्रीय टीम का भी नेतृत्व किया, जिसने हिंद महासागरीय क्षेत्र में व्याप्त एटमॉस्फरिक ब्राउन क्लाड्स (एबीसी) की खोज की, जिसकी वजह से हिमालयी ग्लेशियर पिघल रहे हैं और भारत में मानसून में कमी आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर वातावरण में ब्लैक कार्बन के परिमाण में कमी लाई जा सके, तो ग्लोबल वार्मिंग से निपटा जा सकता है। उनके इसी विचार ने प्रोजेक्ट सूर्या को जन्म दिया, जिसने ग्रामीण भारत में परंपरागत चूल्हों के बजाय सौर उपकरणों को बढ़ावा दिया।


ब्लैक कार्बन उत्सर्जन में कटौती संबंधी महत्वपूर्ण शोध के लिए संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में उन्हें 2013 के चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार के लिए चुना है। पर वह इसे कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मानते। उनकी सोच है कि ग्लोबल वार्मिंग के रूप में आज मानव सभ्यता के सामने जो सबसे बड़ी समस्या खड़ी हुई है, जब तक वह हल नहीं होती, उनके कदम नहीं रुकने वाले।

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