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भाई, तू डिमांड में है
मुरली मनोहर श्रीवास्तव
Updated Sun, 02 Mar 2014 06:49 PM IST
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कहते हैं कि कभी घूरे के दिन भी फिरते हैं। सो कोई आश्चर्य नहीं कि आजकल हमारे दिन बहुर रहे हैं। सत्तर के दशक की सड़क छाप पैंट-शर्ट, जो हीरो के हिट होने की गारंटी थी, 21वीं सदी में फिर डिमांड में है। पुराने जमाने का हीरो जब सड़क से उठकर बंगला खड़ा करता और मां-बाप पर अत्याचार करने वालों से चुन-चुनकर बदला लेता, तब हॉल में बैठी पब्लिक इमोशनल होकर ताली बजाने लगती थी। उस जमाने में हीरो की घुटने पर फटी जींस फैशन आइकॉन बन गई थी। आज वही ट्रेंड लौट आया है।
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आज जिसे भी आगे बढ़ने की जरूरत नजर आती है, वह अपनी कीमती घड़ी, महंगी ड्रेस और ब्रांडेड जूता उतार कर जनपथ पर सस्ती पैंट-शर्ट और मफलर ढूंढता नजर आता है। फुटपाथ पर सोने वाला, सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाला और गोलगप्पे बेचने वाला आज डिमांड में है। ऑफिस के बाबू-सा दिखने की हसरत आज हर बड़ा आदमी पाल रहा है। किसी जमाने में सिक्यूरिटी लेकर चलना आन-बान और शान की निशानी था, आज यह पर्सनेलिटी पर बोझ नजर आता है। पहले बिना जान-पहचान और जुगाड़ के बड़े आदमी से मिल ही नहीं सकते थे। अब बड़े लोग व्यस्तता का चोला उतार खुद भीड़ से घुलने-मिलने को बेताब नजर आते हैं। मैनेजमेंट वालों के कांसेप्ट बदल रहे हैं और वे महानता बनाम साधारणता का चैप्टर खास तौर से सिलेबस में जोड़ रहे हैं। लगान और चक दे के साथ जंतर-मंतर आंदोलन की सफलता की कहानी भी मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को दिखाई जाने लगी है।
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अब मैं गली-मुहल्ले-नुक्कड़ पर ठलुआ खड़े लोगों से कहना चाहता हूं कि अपनी इनर्जी और विचारों की दौलत यों ही जाया मत करो। तुम डिमांड में हो। तुम्हें क्या पता कि तुम्हारे रहन-सहन और चाल-ढाल की क्लिपिंग यू-ट्यूब पर किस कदर हिट हो रही है। बड़े लोगों के चमचे तुम्हारे कपड़ों का नमूना लेकर चांदनी चौक की गलियों की खाक छान रहे हैं। कई तो कांटा-चम्मच छोड़कर यह सीख रहे हैं कि हाथ में दोना लेकर कैसे खाते हैं। कई उस सीन की नकल कर रहे हैं, जिसमें एक भूखा आदमी बिना पानी का घूंट पिए मिनटों में पूड़ी-सब्जी निगल जाता है। मुझे वह सीन बड़ा मारक लगता है, जिसमें कोई अनुभवहीन प्राणी इसे कॉपी करने के चक्कर में कौर गले में फंसाकर खांसने लगता है और उसकी लाल-लाल आंखें बाहर निकल आती हैं।
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कुछ भी हो, आज सिंपल दिखना डिमांड में है।