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गेंदबाजी के उभरते सूर्य

Fri, 12 Jul 2013 10:36 PM IST
रमण कुमार सिंह
रमण कुमार सिंह Updated Fri, 12 Jul 2013 10:36 PM IST
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bowler bhuvneshwar

चेहरा-भुवनेश्वर कुमार

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महज छह महीने पहले अंतरराष्ट्रीय सीरीज का हिस्सा बनने वाले क्रिकेट खिलाड़ी के लिए दो बार मैन ऑफ द मैच और एक बार मैन ऑफ द सीरीज का खिताब हासिल करने के अलावा कई रिकॉर्ड अपने नाम करना करिश्मे से कम नहीं है। वेस्ट इंडीज में त्रिकोणीय शृंखला में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब पाने वाले बुलंदशहर के भुवनेश्वर कुमार सिंह मावी (जिन्हें उनके दोस्त एवं प्रशंसक भुवी कहते हैं) ने यह साबित कर दिया है कि वह भारतीय गेंदबाजी के उभरते हुए भुवनेश्वर (सू्र्य) हैं।

भुवी को अगर बड़ी बहन रेखा का सहयोग न मिलता, तो शायद ये कामयाबी सपना ही रह जाती। उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर पिता के पास इतना वक्त ही नहीं था कि वह भुवी के लिए समय निकाल पाते और गृहिणी मां को क्रिकेट का कुछ पता ही नहीं था। ऐसे में बहन ही भुवी को घर से सात-आठ किलोमीटर दूर स्टेडियम तक ले जाती थी।
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दाहिने हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज भुवी ने पहला धमाका तभी किया, जब उन्होंने एक घरेलू क्रिकेट मैच में सचिन को शून्य पर आउट कर दिया। और जब मौका मिला, तो उन्होंने यह साबित कर दिया कि कपिल देव और जहीर खान के बाद टीम इंडिया को जिस स्विंग बॉलर की तलाश थी, वह भुवी हो सकते हैं। अपने पहले एकदिवसीय मैच की पहली ही गेंद पर विकेट लेने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।
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भुवनेश्वर दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी शॉन पोलक की तरह स्टंप की सीध में गेदबाजी करते हैं। बेशक उनमें उमेश यादव की तरह गति नहीं है, और न ही इशांत शर्मा की तरह बाउंस है, पर फुल लेंग्थ गेंदबाजी उनकी ताकत है और गेंद को दोनों तरफ मूव कराने में वह दक्ष हैं। यही वजह है बाहर की तेज पिचों पर वह जितने सफल हैं, उतने ही अपने देश की धीमी पिचों पर भी।


अपनी सही लाइन एवं लेंग्थ के साथ सधी गेंदबाजी से विरोधी टीम को शुरुआत में ही झटके देने वाले भुवी व्यक्तिगत जीवन में कितने मासूम हैं, इसका पता इसी से चलता है कि पिछले दिनों जब किसी लड़की ने उन्हें बार-बार फोन करके परेशान किया, तो उन्होंने अपने कोच से झिझकते हुआ पूछा कि वह इस मुश्किल से कैसे निपटें। उत्तराखंड में आए जल प्रलय के बाद राहत कोष में एक लाख रुपये देकर उन्होंने जता दिया है कि वह सिर्फ क्रिकेट खेलना ही नहीं, दर्द बांटना भी जानते हैं।

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