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वनडे की सर्वकालिक भारतीय टीम : तेंदुलकर तीसरे नंबर पर आ सकते हैं

Sun, 14 Jul 2019 01:25 AM IST
रामचंद्र गुहा रामचंद्र गुहा
रामचंद्र गुहा Published by: रामचंद्र गुहा Updated Sun, 14 Jul 2019 01:25 AM IST
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all-time Indian cricket team of one day match
सांकेतिक तस्वीर
जैसे-जैसे कोई बड़ा होता जाता है, वह सोचने लगता है कि चीजें तब कहीं बेहतर थीं, जब वह युवा था। उम्र के छठे दशक में मैं खुद भी अतीत से प्रेरित उदासीनता के पलों का सामना कर रहा हूं। मेरा गृह नगर देहरादून कभी साल के जंगलों, धान के खेतों और लीची के बागों की हरी-भरी घाटी हुआ करता था, आज वह बेहिसाब निर्माण के साथ ऐसी गंदी और बदबूदार राज्य की राजधानी में बदल चुका है, जिस पर भू माफिया का नियंत्रण है। नई दिल्ली की जिन अकादमिक संस्थाओं ने मुझे तराशा, वह मेरी युवावस्था में पहले दर्जे के संस्थान हुआ करते थे, लेकिन मेरे साठ का होते-होते वह दोयम दर्जे में बदल चुके हैं।

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जैसे-जैसे कोई बड़ा होता जाता है, वह सोचने लगता है कि चीजें तब कहीं बेहतर थीं, जब वह युवा था। उम्र के छठे दशक में मैं खुद भी अतीत से प्रेरित उदासीनता के पलों का सामना कर रहा हूं। मेरा गृह नगर देहरादून कभी साल के जंगलों, धान के खेतों और लीची के बागों की हरी-भरी घाटी हुआ करता था, आज वह बेहिसाब निर्माण के साथ ऐसी गंदी और बदबूदार राज्य की राजधानी में बदल चुका है, जिस पर भू माफिया का नियंत्रण है। नई दिल्ली की जिन अकादमिक संस्थाओं ने मुझे तराशा, वह मेरी युवावस्था में पहले दर्जे के संस्थान हुआ करते थे, लेकिन मेरे साठ का होते-होते वह दोयम दर्जे में बदल चुके हैं।

हालांकि मेरी उम्र का कोई भी संवेदनशील भारतीय यह जरूर स्वीकार करेगा कि एक क्षेत्र में हमारे देश का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। इसका संबंध राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की गुणवत्ता से है। इस मामले में हम फिसड्डी से महाशक्ति में बदल चुके हैं। वर्ष 1983 में जब भारत ने विश्व कप जीता था, तो इसे अपवाद जैसा माना गया था, क्योंकि यह उम्मीद ही नहीं थी कि हम सेमीफाइनल तक भी पहुंच पाएंगे। छत्तीस साल बाद जब हम सेमीफाइनल में बाहर हो गए, तो पूरा क्रिकेट जगत स्तब्ध रह गया, क्योंकि विजेता के रूप में हम सबसे पसंदीदा टीम थे।

यह आलेख उस दिन प्रकाशित हो रहा है, जब फाइनल हो रहा है और यह दुखद है कि हम वहां तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में मैं पाठकों के लिए सर्वकालिक भारतीय वन डे इलेवन प्रस्तुत कर रहा हूं। इन ग्यारह खिलाड़ियों के चयन में मैंने उन खिलाड़ियों के नामों पर विचार नहीं किया है, जिनका करियर पहले विश्व कप से पहले ही खत्म हो गया था। 

सी के नायडू और विनोद मांकड़ अन्य लोगों के साथ सीमित ओवर के प्रारूप के असली सितारे हो सकते थे, लेकिन उन्हें कभी इसमें खेलने का मौका नहीं मिला। मैंने इस टीम का चयन करते हुए खिलाड़ियों के इस खेल के बड़े प्रारूपों के रिकॉर्ड्स पर गौर नहीं किया है। वास्तव में मैंने जिन लोगों का चयन किया है, उनमें से कई तो हो सकता है कि अपने राज्यों के रणजी इलेवन में भी जगह न बना पाएं।     

ओपनर के रूप में मेरा सहज ज्ञान सबसे पहले दो मुंबईकरों सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा की ओर झुक रहा था, ये दोनों क्रिकेट की गेंद पर शानदार प्रहार करने वाले खिलाड़ी हैं, और इन दोनों का वन डे का अचंभित कर देने वाला रिकॉर्ड है। लेकिन और विचार करने के बाद मैं रोहित के साथ ओपनर के रूप में वीरेंद्र सहवाग को रख रहा हूं, क्योंकि वीरू में वृत्ताकार घेरा बनाकर खड़े सात खिलाड़ियों के बीच से चौका मारने की अद्भुत क्षमता है। 

तेंदुलकर तीसरे नंबर पर आ सकते हैं, तो इससे होगा यह कि यदि कोई विकेट जल्दी गिर जाता है, तो वह नई गेंद पर उसी आधिकारिक तरीके से लेग ग्लाइड्स और ऑफ साइड के शाट्स का चमत्कृत कर देना वाला संयोजन बना सकते हैं और कम से कम स्ट्रेट ड्राइव मार सकते हैं। सचिन के बाद सर्वकालिक महान भारतीय बल्लेबाज के रूप में उनके एकमात्र वास्तविक प्रतिद्वंद्वी और भारतीय टीम के वर्तमान कप्तान आएंगे।

शुरुआती चार खिलाड़ियों ने तो बहुत आसानी से अपनी जगह बना ली। लेकिन पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने कौन आएगा? क्या हम गैप के बीच से जगह बनाने की उनकी क्षमता और उनके क्षेत्ररक्षण के लिए अजहरूद्दीन को रखें? या फिर मैच फिक्सिंग की बदनामी अब भी अजहर को घेरे हुए है (जबकि अदालतों ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया है)? यदि हम बाद वाली बात पर गौर करें, तो हम उनकी जगह राहुल द्रविड़ को प्रतिस्थापित कर सकते हैं, जो कि विभिन्न तरह से बल्लेबाजी कर सकते हैं, स्लिप में आने वाले सारे कैच ले सकते हैं और जरूरत पड़ने पर विकेट कीपर की भूमिका भी निभा सकते हैं।  

टीम में अगली तीन जगहों को भरने में कोई विवाद नहीं होना चाहिए। छठे नंबर पर हैं युवराज सिंह, त्रिआयामी भूमिका के लिए उनका दावा उनकी दर्ज उपलब्धियों पर टिका है न कि किसी अहंकारी चयनकर्ता के दावे पर। वह अपने बल्ले से नाटकीय तरीके से रन रेट को बढ़ा सकते हैं, किसी भी स्थान पर अच्छा क्षेत्ररक्षण कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कुछ ओवर गेंद भी डाल सकते हैं। उनके बाद देश के अब तक के महान ऑल राऊंडर कपिल देव होंगे। 

आठवें नंबर पर हमारे विकेट कीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी होंगे, जिनका तीसरा आयाम होगा उनका रणनीतिक कौशल। इस खास टीम में धोनी को ही कप्तान होना चाहिए और कोहली तथा कपिल को उनके अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए छोड़ देना चाहिए।   

अभी तीन जगहें और भरी जानी हैं। इनमें से दो में कुल मिलाकर किसी तरह की अड़चन नहीं है। एक स्थान जाएगा भारत के सर्वश्रेष्ठ स्पिन गेंदबाद अनिल कुंबले को और दूसरे में होंगे मेधावी तेज गेंदबाद जसप्रीत बुमराह; दोनों ही रन रेट गिराने और विकेट लेने में बराबरी से माहिर हैं। अंतिम स्थान के लिए मैं जहीन खान को पसंद करूंगा, जो कि गेंद की गति को परिवर्तित करने वाले स्विंग गेंदबाद हैं और बाएं हाथ का गेंदबाज होना उनकी अतिरिक्ति प्रतिभा है।

मेरे सर्वाकालिक भारतीय वन डे इलेवन का स्वरूप इस तरह होगाः 1.वीरेंद्र सहवाग, 2. रोहित शर्मा, 3. सचिन तेंदुलकर, 4. विराट कोहली, 5. राहुल द्रविड़, 6. युवराज सिंह, 7. कपिल देव, 8. एम एस धोनी (कप्तान), 9. अनिल कुंबले, 10. जहीर खान, 11. जसप्रीत बुमराह।

शुरुआती चार खिलाड़ी इसी क्रम में बल्लेबाजी करेंगे और बाकी के चार परिस्थितियों के अनुसार आएंगे। यदि विपक्षी टीम स्पिन के बजाए तेज गेंदबाजी पर भरोसा करेगी, तब द्रविड़ और कपिल को युवराज और धोनी से पहले भेजना होगा। यदि हम चेस कर रहे हैं और जरूरी रन रेट आठ से ऊपर हो, तो इसका उलटा हो सकता है। बल्लेबाजी अत्यंत मजबूत है और रन भी खूब बनेंगे। इसमें तीन शानदार स्ट्राइक बॉलर हैं और तीन सीमर हैं और एक स्पिनर। सहवाग, युवराज और सचिन इनके बीच पांचवें गेंदबाज की भूमिका निभा सकते हैं; इन सबमें जरूरी समय में विकेट लेने की क्षमता है। 

एक कमजोरी दिख रही है वह क्षेत्ररक्षण से जुड़ी है। सचिन, सहवाग और जहीर संभवतः यो-यो टेस्ट में नाकाम हो जाएं। चूंकि टीम के कप्तान धोनी हैं, तो यह टेस्ट अनिवार्य नहीं होगा। और जब ये तीनों मैदान से बाहर जाना चाहें, तो हमारे पास रवींद्र जडेजा बारहवें खिलाड़ी के तौर पर तो मौजूद रहेंगे ही।

जिन ग्यारह खिलाड़ियों का मैंने चयन किया है, उसका एक खास आयाम यह है कि इसमें 21वीं सदी की छाप है। इसमें 1983 की विजेता टीम के सिर्फ एक खिलाड़ी ने जगह बनाई; जबिक छह 2011 की विजेता टीम का हिस्सा थे। चार जो कि बड़ी संख्या नहीं है- मौजूदा टूर्नामेंट में खेल चुके हैं।

जीवन के इस क्षेत्र में, किसी भी रूप में, मेरे पास उदासीन होने का कोई कारण नहीं है। मेरे प्यारे देहरादून के माहौल को कटघरे में खड़ा कर दिया गया है; मेरे पुराने कॉलेज ने अपनी चमक खो दी है; लेकिन (हाल ही में न्यूजीलैंड से मिले झटके के बावजूद) हमारे क्रिकेटर्स उस समय की तुलना में अब बहुत बेहतर और प्रतिस्पर्धी हैं, जब मैं छोटा था।
 
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