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सब धन मिट्टी के समान

Mon, 04 Mar 2013 09:08 PM IST
Updated Mon, 04 Mar 2013 09:08 PM IST
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all kind of money like soil

हमें अपने जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति मोह जल्दी से जल्दी छोड़ देना चाहिए। जो व्यक्ति मोह-माया से ग्रस्त रहता है, वह आध्यात्मिक शक्ति को कभी महसूस नहीं कर सकता और अंततः पतन की ओर अग्रसर हो जाता है। इसलिए सांसारिक बंधन को तोड़ना ही हितकारी है।

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एक दरवेश एक दिन एक सूफी पीर के दर्शन के लिए पहुंचा। उसने देखा कि सूफी कीमती मखमल की गद्दी पर बैठे हैं। खेमे की सुनहरी रस्सियां खूंटों से बंधी हैं। दरवेश ने कहा, 'सूफी, मैं आपकी रूहानियत की तारीफ सुनकर दर्शन के लिए आया हूं। मैंने कल्पना की थी कि आपका जीवन अत्यंत सादा होगा। यहां आने पर आपके शाही ठाठ देखकर मुझे निराशा हुई है।'
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सूफी ने मुस्कुराकर कहा, 'मैं आपके साथ आराम की तमाम चीजें छोड़कर जंगल की ओर चलने को तैयार हूं।' देखते ही देखते सूफी पलंग से उठे और नंगे पैर दरवेश के साथ चल दिए।
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कुछ ही दूर पहुंचे थे कि दरवेश बोला, 'सूफी, मैं अपना कटोरा आपके खेमे में भूल आया। आप कुछ देर रुकें, मैं उसे लेकर लौटता हूं।' सूफी ने कहा, 'दरवेश साहब, अपने कटोरे से अभी तक आपका मोह नहीं छूटा है। जबकि मेरे खेमे की सुनहरी रस्सियां जिन खूंटों से बंधी थीं, वे मेरे सीने में नहीं, जमीन में ही गड़े थे। इसलिए मुझे उन्हें मिट्टी के समान छोड़ने में कोई दिक्कत नहीं हुई।' दरवेश का सिर शर्म से झुक गया।

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